हरिवंश ने फिर से राज्यसभा सदस्य पद ग्रहण किया, उपराष्ट्रपति ने दिलाई शपथ
सारांश
Key Takeaways
- हरिवंश ने राज्यसभा में पुनः शपथ ली।
- यह उनका तीसरा कार्यकाल है, जो 2032 तक चलेगा।
- उन्हें राष्ट्रपति ने मनोनीत किया है।
- नीतीश कुमार भी इसी दिन शपथ ग्रहण किए।
- बिहार की राजनीति में यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हरिवंश नारायण सिंह एक बार फिर राज्यसभा के सदस्य बने हैं। शुक्रवार को उन्होंने राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ली। पिछले कई वर्षों से हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा के उपसभापति रहे हैं। उनके कार्यकाल के समाप्त होने पर उन्हें पुनः राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की थी।
मनोनीत होने के बाद उन्होंने शुक्रवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण किया। राज्यसभा में यह उनका तीसरा कार्यकाल है। प्रख्यात पत्रकार रहे हरिवंश का यह नया कार्यकाल वर्ष 2032 तक चलेगा। अधिसूचना में बताया गया था कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 80 के खंड (3) के साथ पठित खंड (1) के उपखंड (क) के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए राष्ट्रपति ने हरिवंश को राज्यसभा के लिए नामित किया है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के हाल ही में राज्यसभा से रिटायर होने के बाद, संसद के उच्च सदन में एक सीट खाली हो गई थी।
अहम है कि संविधान के अनुसार राष्ट्रपति राज्यसभा में 12 सदस्यों को नामित कर सकती हैं। ये सदस्य साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष ज्ञान या अनुभव के आधार पर मनोनीत होते हैं। इससे पहले नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा सांसद बनाया था। लेकिन इस बार जेडीयू ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया, और हरिवंश को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा राज्यसभा सांसद मनोनीत किया गया।
हरिवंश का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो गया था। 10 अप्रैल से उनका नया कार्यकाल आरंभ हुआ है। हरिवंश को पहली बार जेडीयू ने अप्रैल 2014 में बिहार से राज्यसभा भेजा था। 9 अगस्त 2018 को उन्हें राज्यसभा का उपसभापति बनाया गया। उल्लेखनीय है कि इसी दिन नीतीश कुमार ने भी राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। नई दिल्ली में राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उन्हें यह शपथ दिलाई।
इस अवसर पर राज्यसभा में नेता सदन और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन, कांग्रेस के जयराम रमेश, जेडीयू और भाजपा के अन्य नेता भी मौजूद रहे। नीतीश कुमार के इस शपथग्रहण ने बिहार की सियासत में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत की है।
उल्लेखनीय है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्य विधान परिषद के सदस्य रहे थे। लेकिन राज्यसभा के लिए निर्वाचन के बाद उन्होंने 30 मार्च को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। नीतीश कुमार मार्च महीने में संसद के उच्च सदन के लिए बिहार से निर्वाचित हुए थे।