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क्या अरुणाचल की सीमा पर तैनात वीर जवान रविन्द्र सिंह शहीद हो गए?

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क्या अरुणाचल की सीमा पर तैनात वीर जवान रविन्द्र सिंह शहीद हो गए?

सारांश

अरुणाचल प्रदेश की कठिन सीमाओं पर तैनात हवलदार रविन्द्र सिंह राणा ने देश की रक्षा करते हुए बलिदान दिया। उनके अंतिम संस्कार में जनसैलाब उमड़ पड़ा, जहां पूरे गांव ने शोक मनाया। उनकी बहादुरी को हमेशा याद किया जाएगा।

मुख्य बातें

हवलदार रविन्द्र सिंह ने देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिया।
उनकी शहादत ने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ाई।
अंतिम संस्कार में भारी जनसैलाब उमड़ा।
शहीद के परिवार को संपूर्ण गांव का समर्थन मिला।
उनका नाम सदैव वीरता के प्रतीक के रूप में याद किया जाएगा।

रुद्रप्रयाग, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अरुणाचल प्रदेश की कठिन और चुनौतीपूर्ण सीमाओं पर देश की रक्षा करते हुए उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद के आगर गांव के निवासी हवलदार रविन्द्र सिंह राणा (36) ने शहीद होकर देश की सेवा की। वे 15 गढ़वाल राइफल्स में तैनात थे। जब शुक्रवार को शहीद का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो पूरा क्षेत्र शोक में डूब गया।

गांव की गलियों में हर आंख में आंसू थे और परिजनों के करुण क्रंदन ने माहौल को गमगीन कर दिया। जानकारी के अनुसार, हवलदार रविन्द्र सिंह, जो कि सतेंद्र सिंह राणा के पुत्र थे, वर्तमान में अरुणाचल प्रदेश के अलोंग में तैनात थे, जहां 18 जनवरी को उन्होंने भारत माता की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।

वे अपने पीछे एक पुत्र और एक पुत्री छोड़ गए हैं। बलिदान की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

शहीद रविन्द्र सिंह की अंतिम यात्रा में ग्रामीण, युवा, महिलाएं और बुजुर्गों की भीड़ उमड़ पड़ी। “भारत माता की जय” और “शहीद अमर रहें” के नारों के बीच लोगों ने अपने लाल को अंतिम विदाई दी। इसके बाद अलकनंदा-मंदाकिनी नदी संगम पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। सेना के जवानों ने शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया और तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को अंतिम सलामी दी गई।

शहीद को पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति रही। सभी ने शहीद के साहस और बलिदान को नमन करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल ने कहा कि हम उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। वह देश की सेवा करते हुए शहीद हुए हैं, हम उन पर गर्व करते हैं। बाबा केदारनाथ उन्हें अपने चरणों में स्थान दें।

शहीद के परिजन सुदर्शन राणा ने कहा कि हमें अपने भाई पर गर्व है। वह देश के लिए शहीद हुए हैं। पूरे गांव को हवलदार रविन्द्र सिंह पर गर्व है। इनके पिता भी सेना में थे।

परिजनों ने कहा कि हवलदार रविन्द्र सिंह ने राष्ट्र की रक्षा करते हुए अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण का परिचय दिया। उनका सर्वोच्च बलिदान न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे जनपद, राज्य और देश के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत है। उनका नाम सदैव देशभक्ति और वीरता के प्रतीक के रूप में स्मरण किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूरे देश का है। शहीद हवलदार रविन्द्र सिंह ने अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए जो बलिदान दिया है, वह हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। हमें उनके साहस और समर्पण का सम्मान करना चाहिए।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हवलदार रविन्द्र सिंह का बलिदान कब हुआ?
हवलदार रविन्द्र सिंह का बलिदान 18 जनवरी को हुआ, जब वे अरुणाचल प्रदेश में तैनात थे।
उनका अंतिम संस्कार कब और कहां हुआ?
उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को उनके पैतृक गांव में सैन्य सम्मान के साथ किया गया।
हवलदार रविन्द्र सिंह के परिवार में कौन-कौन हैं?
हवलदार रविन्द्र सिंह के परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री हैं।
कौन से विधायक ने श्रद्धांजलि अर्पित की?
केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल ने हवलदार रविन्द्र सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की।
रविन्द्र सिंह ने किस रेजिमेंट में सेवा की थी?
हवलदार रविन्द्र सिंह 15 गढ़वाल राइफल्स में तैनात थे।
राष्ट्र प्रेस
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