क्या है हिमालय की देन काली इलायची? स्वाद और सेहत का अद्भुत संगम
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 22 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। हमारी रसोई में कई मसाले ऐसे होते हैं, जिनका सही मूल्यांकन नहीं किया जाता। इनमें से एक खास मसाला है काली इलायची। इसका स्वाद और खुशबू व्यंजनों को एक अद्वितीय पहचान प्रदान करती है। इसके साथ-साथ, यह सेहत के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।
काली इलायची को नेपाली इलायची भी कहा जाता है। यह मसाला नेपाल और भारत के हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है और इसका उपयोग सामान्यतः नमकीन व्यंजनों में किया जाता है। यह जिंजिबरेसी परिवार से संबंधित है। इसकी फलियां बड़ी, खुरदरी और गहरे भूरे या काले रंग की होती हैं, जिनके अंदर छोटे, चिपचिपे काले बीज होते हैं।
प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ चरक संहिता में, काली इलायची का उपयोग विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार के लिए किया गया है, जैसे दर्द, दुर्गंध, त्वचा रोग, मतली और पाचन संबंधी समस्याएं। इसे 'अंगमर्द प्रशमन महाकषाय' के अंतर्गत भी सूचीबद्ध किया गया है, जो शरीर के दर्द से राहत दिलाने में सहायक है।
आयुर्वेद के अनुसार, काली इलायची को 'दीपन' और 'पाचन' गुणों से युक्त समझा जाता है। इससे पाचन क्रिया से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं। गर्मियों में काली इलायची का पानी पीने से गैस, कब्ज, और पेट में दर्द की परेशानियाँ भी कम होती हैं। इसके साथ ही, यह इम्यूनिटी को मजबूत करने में भी सहायक है।
आयुर्वेदाचार्य के अनुसार, काली इलायची में 'ओज वर्धक' गुण होते हैं, जो मौसमी संक्रमण और बीमारियों के खतरे को कम करते हैं।
गर्मियों में काली इलायची का पानी पीने से शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है। यह किडनी को स्वस्थ रखता है, जिससे त्वचा और बालों से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं। शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलने से विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ भी दूर रहती हैं।
इसमें एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं, जो मुँह के बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करते हैं, साथ ही सांस की दुर्गंध और मसूड़ों की समस्याएं भी दूर करते हैं। इसकी तीखी सुगंध और औषधीय गुण सर्दी, खांसी और गले की खराश में राहत प्रदान कर सकते हैं।