ओडिशा: क्योंझर में बहन का कंकाल बैंक ले जाने की घटना पर CM माझी ने जताया दुख, जांच के आदेश
सारांश
Key Takeaways
- जीतू मुंडा 27 अप्रैल को बहन कलारा मुंडा का कंकाल लेकर ओडिशा ग्रामीण बैंक, क्योंझर पहुँचे।
- बहन के खाते में जमा ₹19,300 निकालने के लिए बैंक ने मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र की माँग की थी।
- CM मोहन चरण माझी ने घटना पर दुख जताते हुए उत्तरी राजस्व मंडल आयुक्त से जांच कराने के आदेश दिए।
- जिला रेड क्रॉस फंड से जीतू मुंडा को ₹30,000 की तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान की गई।
- तहसीलदार ने समन्वय कर ब्याज सहित ₹19,402 की राशि जीतू मुंडा को सौंपी।
- उत्तरी आरडीसी बुधवार से जांच शुरू करेंगे; रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश।
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मंगलवार, 28 अप्रैल को क्योंझर जिले से सामने आई एक अत्यंत पीड़ादायक घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया, जिसमें एक आदिवासी व्यक्ति जीतू मुंडा अपनी दिवंगत बहन कलारा मुंडा का कंकाल कब्र से निकालकर ओडिशा ग्रामीण बैंक की शाखा में ले गए। बैंक अधिकारियों द्वारा मृतक के खाते से पैसे निकालने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र की माँग किए जाने के बाद जीतू ने यह कदम उठाया था।
मुख्य घटनाक्रम
27 अप्रैल को जीतू मुंडा अपनी बहन कलारा मुंडा के कंकाल के साथ ओडिशा ग्रामीण बैंक की शाखा में पहुँचे। बहन के खाते में जमा ₹19,300 की राशि निकालने के लिए बैंक अधिकारियों ने मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र की माँग की थी, जिसे पूरा कर पाना जीतू के लिए सहज नहीं था। यह घटना सामने आते ही सोशल मीडिया पर देशभर में आक्रोश की लहर दौड़ गई।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और जांच के आदेश
मुख्यमंत्री माझी ने इस घटना को समाज और व्यवस्था दोनों के लिए चिंता का विषय बताया। उन्होंने अधिकारियों से आम नागरिकों के प्रति अधिक संवेदनशील होने की अपील की और उत्तरी राजस्व मंडल आयुक्त को इस मामले की जांच सौंपी। उत्तरी आरडीसी बुधवार से इस मामले की जांच शुरू करने वाले हैं, और मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि जांच रिपोर्ट जल्द से जल्द प्रस्तुत की जाए।
जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद जिला प्रशासन तत्काल सक्रिय हुआ। मुख्यमंत्री की 'लोक सेवा' नीति के तहत जिला रेड क्रॉस फंड से जीतू मुंडा को ₹30,000 की वित्तीय सहायता बिना देरी के प्रदान की गई। इसके साथ ही मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र की प्रक्रिया को 'फास्ट ट्रैक' मोड में पूरा करते हुए मेडिकल अधिकारी ने मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया।
तहसीलदार ने व्यक्तिगत रूप से बैंक अधिकारियों से समन्वय कर ब्याज सहित कुल ₹19,402 की राशि मंगलवार को जीतू मुंडा को सौंपी।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और व्यवस्थागत सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने बैंक और राज्य सरकार पर निशाना साधा तथा ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था में व्यापक सुधार की माँग की। गौरतलब है कि यह घटना उस व्यापक समस्या की ओर ध्यान दिलाती है, जिसमें दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले लोग सरकारी कागज़ी प्रक्रियाओं के बोझ तले दब जाते हैं।
आगे क्या होगा
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह घटना बैंकिंग जागरूकता की कमी के कारण हुई, लेकिन किसी भी स्तर पर लापरवाही की जांच जारी है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों को सरकारी और बैंकिंग सेवाएँ सुलभ कराने के लिए अधिक संवेदनशीलता बरती जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।