क्या तमिलनाडु में पोंगल पर मुफ्त धोती-साड़ी नहीं मिलने से राशन कार्डधारक निराश हैं?
सारांश
Key Takeaways
- पोंगल पर मुफ्त धोती और साड़ी का वितरण नहीं हुआ।
- कपड़ों की कमी से राशन कार्डधारकों में निराशा।
- सरकारी सहायता के बावजूद असंतोष का माहौल।
- हर साल इसी तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है।
- भविष्य के त्योहारों में सभी पात्र लोगों को लाभ सुनिश्चित करने की आवश्यकता।
चेन्नई, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु में पोंगल पर्व के दौरान राज्य सरकार द्वारा परंपरागत रूप से दी जाने वाली मुफ्त धोती और साड़ी इस बार कई राशन कार्डधारकों को नहीं मिल पाई, जिससे उनमें निराशा और नाराजगी का माहौल बना रहा।
हालांकि लाभार्थियों को नकद सहायता और अन्य आवश्यक वस्तुएं प्रदान की गईं, लेकिन कपड़ों की कमी के कारण कई जिलों की राशन दुकानों पर भ्रम और असंतोष की स्थिति बनी रही।
उचित मूल्य दुकानों (फेयर प्राइस शॉप) के पर्यवेक्षकों ने बताया कि अधिकांश दुकानों को पात्र कार्डधारकों की कुल संख्या के मुकाबले 60 प्रतिशत से भी कम धोती और साड़ियों की आपूर्ति मिली। सीमित स्टॉक के चलते कुछ लाभार्थियों को या तो केवल धोती या केवल साड़ी दी गई जबकि कई लोगों को दोनों में से कुछ भी नहीं मिला।
रामनाथपुरम के राशन कार्डधारक सुरेश कुमार ने बताया कि वे इस लाभ के पात्र थे, लेकिन उन्हें कपड़े नहीं मिले। उन्होंने कहा, “मुझे 3,000 रुपये की नकद सहायता, चावल, चीनी और गन्ना मिला, लेकिन जब मैंने धोती और साड़ी के बारे में पूछा तो दुकान कर्मचारियों ने बताया कि आवंटन कम है और बाद में आने के लिए कहा।”
एक राशन दुकान के पर्यवेक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि स्थिति संभालना मुश्किल हो गया था। उन्होंने बताया, “हमारी दुकान में 550 से अधिक कार्डधारक पात्र थे, लेकिन हमें केवल करीब 300 सेट मिले। मौखिक निर्देश दिए गए थे कि उपलब्ध सामग्री ही बांटी जाए और किसी तरह का तनाव न होने दिया जाए। शुरुआत में कुछ लोगों को दोनों कपड़े दिए गए, बाद में जो लोग मान गए उन्हें सिर्फ एक ही वस्तु दी गई।”
राशन दुकान कर्मचारियों के संगठनों ने कहा कि यह समस्या हर साल दोहराई जा रही है। कर्मचारी संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी सेल्वराज ने कहा, “हर साल मांग के मुकाबले आवंटन काफी कम रहता है। दुकानों के कर्मचारी ही लोगों को समझाने और अतिरिक्त आपूर्ति का आश्वासन देने को मजबूर होते हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में अतिरिक्त आपूर्ति आती ही नहीं।”
मदुरै के अरपलायम इलाके की निवासी लक्ष्मी देवी ने कहा कि उन्हें न साड़ी मिली, न धोती और न ही गन्ना। उन्होंने कहा, “मुझे नकद सहायता और जरूरी सामान तो मिला, लेकिन चावल की गुणवत्ता खराब थी। हमारे इलाके में ज्यादातर लोगों को कपड़े नहीं दिए गए और केवल कुछ पुरुषों को ही धोती मिली।”
वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों ने कपड़ों की कमी को स्वीकार करते हुए कहा कि उपलब्ध स्टॉक के आधार पर ही वितरण किया गया। अधिकारियों ने बताया कि कुछ जिलों को नए इंडेंट देने के बाद अतिरिक्त आपूर्ति मिली, लेकिन पोंगल वितरण प्रक्रिया समाप्त होने के कारण अब आगे और आवंटन की संभावना कम है।
इस कमी ने राज्य की सबसे प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं में से एक की योजना और खरीद प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाभार्थियों ने सरकार से मांग की है कि भविष्य के त्योहारों में सभी पात्र लोगों को पूरा लाभ सुनिश्चित किया जाए।