क्या पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में फिर से सीजफायर उल्लंघन किया?
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में सीजफायर का उल्लंघन किया है।
- भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई की।
- सीमा पर निगरानी उपकरणों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है।
- आतंकियों की घुसपैठ की कोशिशें लगातार बनी हुई हैं।
- जम्मू-कश्मीर पुलिस आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन चला रही है।
श्रीनगर, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर में एलओसी पर पाकिस्तान ने फिर से सीजफायर का उल्लंघन किया। यह घटना मंगलवार की रात घटित हुई, जब भारतीय सेना के राष्ट्रीय राइफल्स के जवान सीमा पर हाई-टेक कैमरे स्थापित कर रहे थे। इन कैमरों का उद्देश्य था कि एलओसी के ब्लाइंड स्पॉट्स को कवर करना और सीमा सुरक्षा को मजबूत करना।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मंगलवार की रात जब भारतीय सेना के जवान कैमरे स्थापित कर रहे थे, तब पाकिस्तानी सैनिकों ने बाधा डालने के लिए दो राउंड छोटे हथियारों से फायरिंग की। भारतीय सेना ने जवाब में एक ही नियंत्रित गोली चलाई। हालांकि, इस घटना में किसी भी पक्ष से कोई हताहत नहीं हुआ।
इसके बाद, भारतीय सेना ने घने जंगल क्षेत्र में घेराबंदी कर कड़ाई से तलाशी अभियान प्रारंभ किया, क्योंकि उन्हें संदेह था कि फायरिंग का असली उद्देश्य सीमा पार आतंकियों की घुसपैठ को सुविधाजनक बनाना हो सकता है।
यह एक नई स्थिति नहीं है। पाकिस्तान की सेना और रेंजर्स अक्सर एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सीजफायर का उल्लंघन करते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य आमतौर पर आतंकियों की घुसपैठ कराना या सीमा पर लगे निगरानी उपकरणों को बाधित करना होता है।
जम्मू-कश्मीर में एलओसी की लंबाई लगभग 740 किलोमीटर है। यह लाइन बरामुल्ला, कुपवाड़ा और बांदीपोरा जिलों से होकर गुजरती है, साथ ही जम्मू डिविजन के पुंछ, राजौरी और कुछ हिस्सों में भी एलओसी स्थित है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय सीमा लगभग 240 किलोमीटर लंबी है और यह जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों में फैली हुई है।
एलओसी की सुरक्षा भारतीय सेना द्वारा की जाती है, जबकि अंतरराष्ट्रीय सीमा की जिम्मेदारी बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) की होती है। दोनों ही स्थानों पर सेना और बीएसएफ का कार्य घुसपैठ, तस्करी और पाक की तरफ से ड्रोन गतिविधियों को रोकना है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा बल पीछे के इलाकों में आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन चलाते हैं, जिनका उद्देश्य आतंकवादी, उनके ओवरग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) और उनके समर्थक होते हैं।