क्या चेन्नई की जल सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री स्टालिन ने उठाया बड़ा कदम?
सारांश
Key Takeaways
- जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए कदम उठाया गया है।
- 342.60 करोड़ रुपये की मामल्लन जलाशय परियोजना का शुभारंभ हुआ।
- इससे 13 लाख लोगों को लाभ मिलने की संभावना है।
- जलाशय की भंडारण क्षमता 1.65 टीएमसी होगी।
- यह परियोजना दीर्घकालिक जल प्रबंधन को सुनिश्चित करेगी।
चेन्नई, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने सोमवार को चेंगलपट्टू जिले में ईस्ट कोस्ट रोड (ईसीआर) पर नेम्मेली में मामल्लन जलाशय परियोजना की आधारशिला रखी। ₹342.60 करोड़ की यह परियोजना, चेन्नई के तेजी से विकसित होते दक्षिणी उपनगरों की जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यह परियोजना जल संसाधन विभाग द्वारा लागू की जाएगी, जिसका उद्देश्य पेयजल आपूर्ति को बढ़ाना और क्षेत्र में दीर्घकालिक जल प्रबंधन को मजबूत करना है।
मुख्यमंत्री स्टालिन ने इस अवसर पर कहा कि किसी भी देश के लिए जल प्रबंधन उतना ही ज़रूरी है जितना कि वित्तीय प्रबंधन। उन्होंने यह भी कहा कि तमिल सभ्यता का विकास ऐतिहासिक रूप से जल स्रोतों के चारों ओर हुआ है और परंपरागत रूप से बस्तियां टिकाऊ जल स्रोतों के निकट स्थापित की गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, “यह परियोजना इतिहास में चेन्नई के बढ़ते क्षेत्रों को लाभ पहुंचाने वाली परियोजना के रूप में याद की जाएगी।”
पल्लव काल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पल्लव शासकों ने कांचीपुरम क्षेत्र में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 39 झीलों का निर्माण किया और जल निकायों के रखरखाव के लिए एक समर्पित प्रणाली विकसित की। उन्होंने बताया कि पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम, जिन्हें ‘मामल्लन’ के नाम से जाना जाता है, ने मामल्लापुरम की स्थापना की थी।
मुख्यमंत्री ने कहा, “चूंकि नया जलाशय इस ऐतिहासिक क्षेत्र के निकट बनाया जा रहा है, इसलिए इसका नाम ‘मामल्लन जलाशय’ रखना उचित है।”
डीएमके सरकार पर हो रही आलोचनाओं का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि कुछ लोग यह गलत प्रचार कर रहे हैं कि राज्य सरकार ने जलाशयों का निर्माण नहीं किया। उन्होंने बताया कि 1967 से 2011 के बीच डीएमके शासनकाल में पूरे तमिलनाडु में 43 जलाशयों का निर्माण किया गया था और उन्होंने आरोपों को खारिज करने के लिए उनके नाम भी गिनाए।
जल क्षेत्र में डीएमके सरकार की उपलब्धियों को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले पांच वर्षों से मेट्टूर बांध समय पर खोला जा रहा है, कावेरी डेल्टा पुनर्स्थापन परियोजनाएं किसानों के लाभ के लिए शुरू की गई हैं और बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे के कार्य किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि इनमें 121 चेक डैम, 63 एनीकट, 40,000 से अधिक झीलों की गाद निकासी और लगभग 1.3 लाख किलोमीटर नालों की बहाली शामिल है। उन्होंने फरवरी में शुरू की गई थामिराबरनी–करुमेनियार–नंबियार नदी जोड़ो नहर परियोजना का भी उल्लेख किया।
मामल्लन जलाशय परियोजना की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि यह परियोजना कोवलम बेसिन में ईसीआर–ओएमआर क्षेत्र के तिरुपोरूर और तिरुक्कझुकुंद्रम के बीच विकसित की जाएगी।
यह जलाशय लगभग 5,100 एकड़ क्षेत्र में फैला होगा, जिसमें 1.65 टीएमसी जल भंडारण क्षमता और 34 किलोमीटर लंबे बांध का निर्माण होगा। यह मणमथि झील से अतिरिक्त पानी को समुद्र में बहने से रोकेगा और तिरुवंदनधई से कोकिलामेडु के बीच पानी का भंडारण करेगा।
इस परियोजना से प्रतिदिन 170 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति होगी, जिससे शोलिंगनल्लूर, मेदावक्कम, पल्लीकरणई, सिरुसेरी और मामल्लापुरम सहित क्षेत्रों में रहने वाले करीब 13 लाख लोगों को लाभ मिलेगा। इसके अलावा, यह समुद्री जल के अतिक्रमण को भी रोकेगा और बकिंघम नहर के 15 किलोमीटर हिस्से की बहाली के जरिए मछुआरों को सुनिश्चित मत्स्य अधिकारों के साथ सहायता प्रदान करेगा।