राघव चड्ढा ने IIM अहमदाबाद के 'रेड ब्रिक समिट 2026' में युवाओं को दिया भारत-निर्माण का संदेश
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा 14 अक्टूबर 2026 को IIM अहमदाबाद के प्रतिष्ठित वार्षिक मैनेजमेंट समिट 'द रेड ब्रिक समिट 2026' (TRBS) में विशेष वक्ता के रूप में उपस्थित हुए। इस दौरान उन्होंने संस्थान के छात्रों के साथ लीडरशिप, गवर्नेंस और भारत के भविष्य जैसे अहम विषयों पर विस्तृत संवाद किया।
मुख्य संबोधन: युवा और राष्ट्र-निर्माण
अपने सेशन में चड्ढा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत की संस्थाओं, अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक जीवन की दिशा तय करने में युवाओं की भूमिका केंद्रीय है। उन्होंने कहा कि युवा भारत ही आने वाले दशकों में देश की नींव रखेगा। सेशन के दौरान छात्रों ने लीडरशिप और गवर्नेंस पर तीखे और सुविचारित सवाल उठाए, जिन पर खुलकर विचार-विमर्श हुआ।
छात्रों से संवाद और कैंपस का अनुभव
चड्ढा ने छात्रों की जिज्ञासा और आत्मविश्वास की सराहना करते हुए कहा, 'आईआईएम अहमदाबाद में बहुत अच्छा समय बीता। कितने टैलेंटेड, जिज्ञासु और कॉन्फिडेंट युवा हैं।' सेशन के बाहर उन्होंने कैंपस का भ्रमण किया, क्रिएटिव स्टॉल्स देखे और कई गेम्स में भी भाग लिया। हल्के-फुल्के माहौल में छात्रों से मिलने को उन्होंने विशेष रूप से यादगार बताया।
TRBS का 10वाँ संस्करण: 'बियॉन्ड द बोर्डरूम'
इस वर्ष TRBS का 10वाँ संस्करण 'बियॉन्ड द बोर्डरूम' थीम पर आयोजित किया गया। दो दिवसीय इस आयोजन में स्पीकर सेशन, वर्कशॉप, नेशनल-लेवल केस कॉम्पिटिशन और विविध गतिविधियाँ शामिल रहीं। चर्चा के विषयों में एंटरप्रेन्योरशिप, लीडरशिप, गवर्नेंस, मार्केटिंग, फाइनेंस, कंसल्टिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रोडक्ट मैनेजमेंट प्रमुख रहे।
समिट की विरासत: दिग्गजों का मंच
गौरतलब है कि IIM अहमदाबाद का 'द रेड ब्रिक समिट' पिछले कई वर्षों से देश के शीर्ष राजनेताओं, उद्योग जगत के नेताओं, अर्थशास्त्रियों और विचारकों को एकजुट करता आया है। इससे पहले इस मंच पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर डॉ. रघुराम राजन और सी. रंगराजन, सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश जस्टिस इंदु मल्होत्रा, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी, मॉडर्न मार्केटिंग के जनक फिलिप कोटलर और अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा जैसी हस्तियाँ वक्ता रह चुकी हैं।
आगे की राह
चड्ढा की इस उपस्थिति ने संस्थान के भीतर सार्वजनिक नीति और गवर्नेंस को लेकर युवाओं की बढ़ती दिलचस्पी को उजागर किया है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में युवा नेतृत्व और नीति-निर्माण में नई पीढ़ी की भागीदारी को लेकर बहस तेज़ हो रही है। आने वाले वर्षों में TRBS जैसे मंचों से युवाओं और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद और गहरा होने की उम्मीद है।