21 सितंबर 2026
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एआई इनोवेशन में ग्लोबल लीडर बन सकता है भारत, टेक एग्जीक्यूटिव्स बोले — इंजीनियरिंग टैलेंट और डिजिटल इंफ्रा है सबसे बड़ी ताकत

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एआई इनोवेशन में ग्लोबल लीडर बन सकता है भारत, टेक एग्जीक्यूटिव्स बोले — इंजीनियरिंग टैलेंट और डिजिटल इंफ्रा है सबसे बड़ी ताकत

सारांश

सीएटल में दो शीर्ष टेक सीईओ का स्पष्ट संदेश — भारत एआई इनोवेशन की वैश्विक दौड़ में सिर्फ भागीदार नहीं, बल्कि अगुआ बन सकता है। डिजिटल पहचान, UPI और विशाल इंजीनियरिंग टैलेंट को उद्यमशीलता इकोसिस्टम से जोड़ना ही असली परीक्षा है।

मुख्य बातें

वीम के सीईओ आनंद ईश्वरन ने कहा कि भारत का डिजिटल पहचान और पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर एआई के वैश्विक उपयोग की नींव तैयार करता है।
रिदम के सीईओ वेट्री वलोर ने भारत में लाखों उद्यमी तैयार करने की क्षमता पर ज़ोर दिया, सिर्फ नौकरियाँ पैदा करने पर नहीं।
ईश्वरन ने खेती, हेल्थकेयर और सार्वजनिक सेवाओं में एआई-आधारित समाधानों की वैश्विक संभावना बताई।
भारतीय-अमेरिकी समुदाय मेंटरिंग, नीतिगत सुझाव और तकनीकी विशेषज्ञता से इस बदलाव में योगदान दे सकता है।
वलोर ने एआई को ज्ञान और जानकारी की असमानता दूर करने का सशक्त माध्यम बताया।

भारत का मज़बूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और विशाल इंजीनियरिंग टैलेंट पूल देश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित इनोवेशन में ग्लोबल लीडर बनाने की ठोस ज़मीन तैयार कर चुका है। सीएटल में 21 सितंबर 2026 को अलग-अलग साक्षात्कारों में वरिष्ठ टेक्नोलॉजी एग्जीक्यूटिव्स ने यह मत व्यक्त किया कि भारत को केवल रोज़गार सृजन तक सीमित न रहकर एक जीवंत उद्यमशीलता इकोसिस्टम बनाने पर भी समान ज़ोर देना चाहिए।

भारत की डिजिटल नींव — एक बड़ी उपलब्धि

वीम के सीईओ आनंद ईश्वरन ने कहा कि भारत ने डिजिटल पहचान और डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के ज़रिये बड़े पैमाने पर तकनीकी रूपांतरण के लिए ज़रूरी आधार पहले ही तैयार कर लिया है। उन्होंने कहा, 'एक अरब से ज़्यादा लोगों के लिए काम करने वाला डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना एक बेहद बड़ी और चुनौतीपूर्ण उपलब्धि थी।' ईश्वरन ने इस मज़बूत आधार का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को दिया।

गौरतलब है कि भारत का UPI नेटवर्क आज दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम पेमेंट प्रणालियों में से एक है, और आधार से जुड़ा डिजिटल पहचान ढाँचा एआई-संचालित सेवाओं की डिलीवरी के लिए एक अद्वितीय आधार प्रदान करता है।

एआई से खेती, स्वास्थ्य और सार्वजनिक सेवाओं को फायदा

ईश्वरन के अनुसार भारत में खेती, हेल्थकेयर और सार्वजनिक सेवाओं जैसे क्षेत्रों में एआई-आधारित समाधान विकसित करने की अपार क्षमता है। उन्होंने कहा, 'अभी भारत के पास एआई का इस्तेमाल करने और ऐसे नतीजे दिखाने का मौका है, जिनका उपयोग करके दुनिया मानवता के भले के लिए एआई के फायदे हासिल कर सकती है।' इससे फसल उत्पादकता बढ़ाने, संक्रामक बीमारियों से लड़ने और समाज को ठोस लाभ पहुँचाने वाले एप्लिकेशन बनाए जा सकते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर एआई के सामाजिक उपयोग को लेकर बहस तेज़ हो रही है और विकासशील देशों में इसके व्यावहारिक अनुप्रयोग की माँग बढ़ रही है।

उद्यमिता पर ज़ोर — नौकरी लेने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनाएँ

रिदम के सीईओ और को-फाउंडर वेट्री वलोर ने इन विचारों से सहमति जताते हुए कहा कि आर्थिक विकास की चर्चाओं में अक्सर केवल नौकरी सृजन पर ध्यान केंद्रित रहता है, जबकि देश को एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने की दिशा में भी सक्रिय रूप से काम करना चाहिए जो लोगों को अपना व्यवसाय शुरू करने में सक्षम बनाए। वलोर ने कहा कि टेक्नोलॉजी, टैलेंट और एआई तक पहुँच के साथ भारत में लाखों उद्यमी तैयार करने की क्षमता है।

उन्होंने एआई को एक शक्तिशाली माध्यम बताया जो जानकारी और ज्ञान तक पहुँच को सर्वसुलभ बना सकता है। उनके अनुसार, जानकारी की कमी के कारण अतीत में अनेक लोग अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पाए, और एआई विशेषज्ञता को अधिक सुलभ बनाकर उस अंतर को पाटने में मदद कर रहा है।

भारतीय-अमेरिकी समुदाय की भूमिका

वलोर ने कहा कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय इस तकनीकी रूपांतरण में अहम भूमिका निभा सकता है — अपनी तकनीकी विशेषज्ञता साझा करके, नए फाउंडर्स को मेंटरिंग देकर और उभरते तकनीकी बदलावों को अपनाने में सहायक नीतिगत सुझाव देकर। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका में भारतीयों के उद्यमशीलता सफर से मिली सीख भारत में नीति-निर्माताओं और नए फाउंडर्स के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।

आगे की राह

विशेषज्ञों का यह दृष्टिकोण ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार IndiaAI Mission के तहत एआई अनुसंधान और अनुप्रयोग को बढ़ावा देने के लिए कदम उठा रही है। उद्योग जगत के जानकारों के अनुसार, यदि भारत अपनी डिजिटल नींव, इंजीनियरिंग प्रतिभा और बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम का समुचित उपयोग करे, तो वैश्विक एआई परिदृश्य में उसकी स्थिति आने वाले वर्षों में और अधिक मज़बूत हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या भारत अभी भी मुख्यतः वैश्विक टेक कंपनियों के लिए प्रतिभा का स्रोत बना हुआ है। उद्यमिता की बात सही दिशा में है, लेकिन इसके लिए नियामक सरलीकरण, जोखिम पूँजी की उपलब्धता और विफलता को स्वीकार करने वाली संस्कृति — तीनों की एक साथ ज़रूरत है, जो अभी भी अधूरी है। वैश्विक एआई नेतृत्व का दावा तब तक अधूरा रहेगा जब तक भारत में बने एआई उत्पाद वैश्विक बाज़ार में अपनी जगह नहीं बनाते।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत एआई इनोवेशन में ग्लोबल लीडर कैसे बन सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का विशाल इंजीनियरिंग टैलेंट पूल और आधार-UPI जैसा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर एआई-आधारित समाधानों के विकास और विस्तार के लिए एक मज़बूत आधार प्रदान करता है। यदि इसे एक सशक्त उद्यमशीलता इकोसिस्टम से जोड़ा जाए, तो भारत वैश्विक एआई परिदृश्य में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
वीम के सीईओ आनंद ईश्वरन ने भारत के बारे में क्या कहा?
आनंद ईश्वरन ने कहा कि भारत ने डिजिटल पहचान और पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के ज़रिये तकनीकी रूपांतरण का आधार तैयार कर लिया है। उन्होंने खेती, हेल्थकेयर और सार्वजनिक सेवाओं में एआई के उपयोग से मानवता को व्यापक लाभ पहुँचाने की संभावना जताई।
रिदम के सीईओ वेट्री वलोर ने उद्यमिता पर क्या राय दी?
वेट्री वलोर ने कहा कि भारत को नौकरी सृजन के साथ-साथ एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने पर ध्यान देना चाहिए जो लाखों लोगों को अपना व्यवसाय शुरू करने में सक्षम बनाए। उनके अनुसार, एआई जानकारी और विशेषज्ञता की असमानता को दूर करके उद्यमिता की राह आसान बना सकता है।
भारतीय-अमेरिकी समुदाय भारत के एआई विकास में कैसे योगदान दे सकता है?
वलोर के अनुसार, भारतीय-अमेरिकी समुदाय अपनी तकनीकी विशेषज्ञता साझा करके, नए फाउंडर्स को मेंटरिंग देकर और उभरते तकनीकी बदलावों के लिए नीतिगत सुझाव देकर भारत के एआई इकोसिस्टम को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
भारत में एआई का उपयोग किन क्षेत्रों में सबसे ज़्यादा प्रभावशाली हो सकता है?
ईश्वरन ने खेती, हेल्थकेयर और सार्वजनिक सेवाओं को सबसे अधिक संभावना वाले क्षेत्र बताया। इन क्षेत्रों में एआई-आधारित समाधान फसल उत्पादकता बढ़ाने, संक्रामक बीमारियों से लड़ने और सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने में मददगार साबित हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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