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दिव्यांग बच्चों को जन्म से मिलेगी पेंशन, केंद्र ने राशि भी बढ़ाई; लाभार्थी 8.33 लाख से बढ़कर 27.48 लाख

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दिव्यांग बच्चों को जन्म से मिलेगी पेंशन, केंद्र ने राशि भी बढ़ाई; लाभार्थी 8.33 लाख से बढ़कर 27.48 लाख

सारांश

केंद्र सरकार ने दिव्यांग बच्चों के लिए पेंशन की न्यूनतम आयु सीमा समाप्त कर दी — अब जन्म से ही पात्रता मिलेगी। पात्रता मानक 80% से घटाकर 40% और पेंशन राशि बढ़ाकर ₹375–₹625 प्रति माह की गई। लाभार्थी 8.33 लाख से बढ़कर 27.48 लाख हो गए।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना में अब जन्म से ही पात्रता; 18 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा समाप्त।
दिव्यांगता का पात्रता मानक 80% से घटाकर 40% किया गया।
केंद्रीय सहायता 79 वर्ष तक के लिए ₹375 प्रति माह और 80 वर्ष व अधिक के लिए ₹625 प्रति माह ।
लाभार्थियों की संख्या 8.33 लाख से बढ़कर 27.48 लाख हुई।
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 2.68 करोड़ दिव्यांग व्यक्ति, जो जनसंख्या का 2.21% ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 नवंबर 2026 को घोषणा की कि केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना के तहत जन्म से ही पात्र दिव्यांग बच्चों के लिए पेंशन का रास्ता खोल दिया है और पेंशन राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। एशियाई पैरा खेलों से लौटे खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए मोदी ने बताया कि कैबिनेट ने हाल ही में दिव्यांगजनों की पेंशन को लेकर कई अहम निर्णय लिए हैं।

क्या बदला योजना में

नई व्यवस्था के तहत पेंशन पाने के लिए 18 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। अब गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों में जन्मे दिव्यांग बच्चे जन्म से ही इस योजना के लाभार्थी बन सकते हैं, बशर्ते उनके पास मानक दिव्यांगता प्रमाण पत्र हो। इसके साथ ही दिव्यांगता का पात्रता मानक भी 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे अधिक लोग इस योजना के दायरे में आ सकेंगे।

बढ़ी हुई पेंशन राशि

केंद्रीय सहायता राशि को भी संशोधित किया गया है। 79 वर्ष तक की आयु के लाभार्थियों को अब ₹375 प्रति माह और 80 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को ₹625 प्रति माह की केंद्रीय सहायता मिलेगी। इन बदलावों के परिणामस्वरूप योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या 8.33 लाख से बढ़कर 27.48 लाख हो गई है — यानी करीब तीन गुना से अधिक की वृद्धि।

किन तीन समूहों को होगा लाभ

सरकार के अनुसार इस निर्णय से तीन प्रमुख समूह लाभान्वित होंगे। पहला — वे व्यक्ति जो 40 से 79 प्रतिशत के बीच दिव्यांग प्रमाणित हैं और गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों से आते हैं। दूसरा — गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों में मानक दिव्यांगता प्रमाण पत्र के साथ जन्मे बच्चे, जिन्हें अब 18 वर्ष का होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। तीसरा — वे लाभार्थी जो पहले से पेंशन पा रहे हैं, उन्हें अब बढ़ी हुई दरें स्वतः मिलेंगी।

व्यापक संदर्भ: दिव्यांगता और नीति

2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 2.68 करोड़ दिव्यांग व्यक्ति हैं, जो कुल जनसंख्या का 2.21 प्रतिशत है। गौरतलब है कि 2016 के दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम की अनुसूची में 21 प्रकार की दिव्यांगताएं निर्धारित की गई हैं। यह नीतिगत बदलाव ऐसे समय में आया है जब सरकार दिव्यांजन सशक्तीकरण को सामाजिक न्याय एजेंडे का केंद्र बताती रही है। आयु सीमा हटाना और पात्रता मानक का उदारीकरण — दोनों मिलकर योजना की पहुँच को उल्लेखनीय रूप से विस्तृत करते हैं।

आगे की राह

नई दरें और आयु-मुक्त पात्रता मानदंड पहले से लागू हो चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि क्रियान्वयन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जमीनी स्तर पर दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया कितनी सुगम और सुलभ है। लाभार्थियों की संख्या में तीन गुना वृद्धि इस योजना को सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विस्तार के रूप में स्थापित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

संख्याओं की उपलब्धि अधूरी रहेगी।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना में क्या नया बदलाव हुआ है?
केंद्र सरकार ने पेंशन के लिए 18 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा हटा दी है, जिससे जन्म से ही पात्र दिव्यांग बच्चे लाभार्थी बन सकते हैं। साथ ही दिव्यांगता का पात्रता मानक 80% से घटाकर 40% कर दिया गया है।
नई दिव्यांग पेंशन राशि कितनी है?
79 वर्ष तक की आयु के लाभार्थियों को ₹375 प्रति माह और 80 वर्ष व उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को ₹625 प्रति माह की केंद्रीय सहायता मिलेगी। यह राशि पहले से पेंशन पा रहे लाभार्थियों को भी स्वतः प्राप्त होगी।
इस बदलाव से कितने लोग लाभान्वित होंगे?
नए नियमों के बाद लाभार्थियों की कुल संख्या 8.33 लाख से बढ़कर 27.48 लाख हो गई है। इस विस्तार का सबसे बड़ा लाभ उन गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को होगा जिनमें दिव्यांग बच्चे हैं।
कौन से तीन समूह इस योजना से लाभान्वित होंगे?
पहला — 40 से 79% के बीच दिव्यांग प्रमाणित और गरीबी रेखा से नीचे के वयस्क। दूसरा — मानक दिव्यांगता प्रमाण पत्र वाले बच्चे जो गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों में जन्मे हों। तीसरा — पहले से योजना के लाभार्थी जिन्हें अब बढ़ी हुई दरें मिलेंगी।
भारत में दिव्यांग जनसंख्या कितनी है?
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 2.68 करोड़ दिव्यांग व्यक्ति थे, जो कुल जनसंख्या का 2.21% है। 2016 के दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के तहत 21 प्रकार की दिव्यांगताएं मान्यता प्राप्त हैं।
राष्ट्र प्रेस
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