दिव्यांगजन पेंशन में जल्द बढ़ोतरी करेगी यूपी सरकार: सीएम योगी आदित्यनाथ का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 30 सितंबर 2026 को गोरखपुर में संकेत दिया कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों की मासिक पेंशन में शीघ्र एक और बढ़ोतरी करने जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेंशन पहले ₹300 थी, जिसे ₹500 और फिर ₹1,000 किया गया, और अब 'कुछ दिनों में' इसे फिर बढ़ाया जाएगा। यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में चल रहे सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में की गई।
कार्यक्रम और सहायक उपकरण वितरण
गोरखपुर क्लब में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और एचयूआरएल गोरखपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 509 दिव्यांगजनों को 664 सहायक उपकरण वितरित किए। वितरित उपकरणों में 127 मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल, 25 ई-ट्राईसाइकिल, 70 ट्राईसाइकिल, स्मार्ट केन, ब्रेल किट, 90 हियरिंग एड और 5 स्मार्टफोन शामिल रहे। हरभजन सिंह और दीपू मिश्रा को स्मार्टफोन, खुशी को ब्रेल लिपि में गीता और नीरज यादव को ब्रेल रामचरितमानस प्रदान की गई।
सीएम योगी के मुख्य बिंदु
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज की प्रगति की असली कसौटी यह है कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक कितनी सहजता से पहुँच रहा है। उन्होंने संस्कृत सूक्ति 'अयोग्यो पुरुषो नास्ति' का उल्लेख करते हुए कहा कि कोई व्यक्ति अयोग्य नहीं होता, जरूरत उसे अवसर से जोड़ने वाले की होती है। ऋषि अष्टावक्र, सूरदास, रवींद्र जैन और पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा सहित पैरालंपिक खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 'पदक केवल मजबूत भुजाओं से नहीं, मजबूत हौसलों से जीते जाते हैं।'
योगी ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2015 में 'विकलांग' के स्थान पर 'दिव्यांग' शब्द प्रचलित कर समाज का दृष्टिकोण बदलने का प्रयास किया था।
बजट वृद्धि और डिजिटल पहचान
राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने बताया कि पूर्ववर्ती सपा सरकार में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग का बजट ₹665 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹2,200 करोड़ हो गया है। प्रदेश में 17 लाख से अधिक दिव्यांगजनों की डिजिटल पहचान सुनिश्चित कर उन्हें पहचान-पत्र उपलब्ध कराए गए हैं। वर्ष 2026-27 में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में शिविर लगाकर पेंशन से वंचित दिव्यांगजनों को योजनाओं से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश को देश का पहला ऐसा राज्य बताया जहाँ दिव्यांगजनों के लिए दो विश्वविद्यालय संचालित हैं — लखनऊ में डॉ. शकुंतला मिश्रा दिव्यांगजन सशक्तीकरण विश्वविद्यालय और चित्रकूट में जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय। कॉक्लियर इंप्लांट पर ₹6 लाख तक का व्यय सरकार वहन करती है। तीन से सात वर्ष के श्रवणबाधित, दृष्टिबाधित और बौद्धिक दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए बचपन डे केयर सेंटरों का विस्तार किया जा रहा है — वर्तमान में 25 केंद्र सक्रिय हैं और 28 नए केंद्र खोले जाएँगे। प्रदेश के सभी 18 मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
आगे की राह
सरकार दिव्यांगजनों को सीएम युवा, पीएम स्वनिधि, ओडीओपी, पीएम विश्वकर्मा, पीएम मुद्रा और स्टैंडअप इंडिया जैसी योजनाओं से जोड़ने पर बल दे रही है ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। ब्रेल व ऑडियो सूचना, टैक्टाइल पाथ, सांकेतिक भाषा और कैप्शन जैसी सुलभता सेवाओं का विस्तार जारी है। पेंशन वृद्धि की अगली घोषणा 'कुछ दिनों में' होने की उम्मीद है, जो प्रदेश के लाखों दिव्यांग लाभार्थियों के लिए सीधा आर्थिक राहत लेकर आएगी।