14 अक्टूबर 2026
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कैबिनेट का बड़ा फैसला: NSAP को ₹53,428 करोड़ के साथ 2031 तक बढ़ाया, 3.20 करोड़ लाभार्थियों को राहत

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कैबिनेट का बड़ा फैसला: NSAP को ₹53,428 करोड़ के साथ 2031 तक बढ़ाया, 3.20 करोड़ लाभार्थियों को राहत

सारांश

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने NSAP को ₹53,428 करोड़ के साथ 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी। सबसे बड़ा बदलाव दिव्यांग पेंशन में — पात्रता 80% से घटाकर 40% और न्यूनतम आयु सीमा खत्म। 3.20 करोड़ लाभार्थियों को राहत मिलेगी और योजनाओं के नाम भी 'प्रधानमंत्री' ब्रांड में बदले जाएँगे।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 14 अक्टूबर 2026 को NSAP को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी।
योजना के लिए ₹53,428 करोड़ का प्रावधान; देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 3.20 करोड़ लाभार्थी लाभान्वित होंगे।
दिव्यांग पेंशन की पात्रता 80% से घटाकर 40% बेंचमार्क दिव्यांगता की गई; न्यूनतम आयु सीमा समाप्त — अब जन्म से दिव्यांग भी पात्र।
दिव्यांग लाभार्थियों को 0-79 वर्ष तक ₹375/माह और 80 वर्ष या अधिक को ₹625/माह मिलेगा।
NSAP का नाम बदलकर 'प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना' ; सभी उप-योजनाएँ भी 'प्रधानमंत्री' ब्रांड में पुनर्नामित होंगी।
ग्रामीण विकास विभाग अगले तीन महीनों में संशोधित दिशा-निर्देश जारी करेगा।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 14 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक अगले पाँच वर्षों के लिए जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के तहत योजना के लिए ₹53,428 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया गया है, जिससे देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 3.20 करोड़ लाभार्थियों को सीधा फायदा मिलेगा। यह फैसला देश के वृद्ध, विधवा, दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों को सामाजिक सुरक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करता है।

योजनाओं के नाम में बदलाव

कैबिनेट के इस निर्णय के तहत राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का नाम बदलकर 'प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना' किया जाएगा। इसी क्रम में इसकी सभी प्रमुख उप-योजनाओं के नाम भी बदले जाएँगे।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना का नाम अब प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना का नाम प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना का नाम प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना और राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना का नाम प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना रखा जाएगा।

दिव्यांगजन पेंशन में महत्वपूर्ण संशोधन

कैबिनेट ने दिव्यांगजन पेंशन योजना में कई अहम बदलावों को हरी झंडी दी है। अब 0 से 79 वर्ष तक के दिव्यांग लाभार्थियों को ₹375 प्रति माह और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को ₹625 प्रति माह की सहायता राशि दी जाएगी।

पात्रता के मोर्चे पर भी बड़ी राहत दी गई है। पहले इस योजना का लाभ लेने के लिए 80 प्रतिशत दिव्यांगता अनिवार्य थी, जिसे घटाकर अब 40 प्रतिशत बेंचमार्क दिव्यांगता कर दिया गया है। यह बदलाव दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के अनुरूप है, जो बेंचमार्क दिव्यांगता को 40 प्रतिशत से जोड़ता है और यह भी अनिवार्य करता है कि दिव्यांगजनों को मिलने वाली सहायता समान श्रेणी की अन्य योजनाओं की तुलना में कम से कम 25 प्रतिशत अधिक हो।

इसके अतिरिक्त, दिव्यांग पेंशन के लिए न्यूनतम आयु की शर्त समाप्त कर दी गई है — अब जन्म से दिव्यांग व्यक्ति भी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे।

वृद्धावस्था, विधवा और परिवार लाभ योजनाएँ यथावत जारी

सरकार ने स्पष्ट किया है कि वृद्धावस्था पेंशन योजना, विधवा पेंशन योजना और परिवार लाभ योजना अपने मौजूदा स्वरूप में ही जारी रहेंगी। इन योजनाओं के पात्र लाभार्थियों को पहले की भाँति सहायता मिलती रहेगी।

गौरतलब है कि NSAP की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को हुई थी और यह संविधान के अनुच्छेद 41 में निहित राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों पर आधारित है। केंद्र सरकार इस योजना के तहत 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्तपोषण प्रदान करती है, ताकि पूरे देश में लाभार्थियों को समान सहायता सुनिश्चित की जा सके।

क्रियान्वयन की समयसीमा

ग्रामीण विकास विभाग अगले तीन महीनों के भीतर संशोधित दिशा-निर्देश जारी करेगा और उन्हें लागू करेगा। यह ऐसे समय में आया है जब बुजुर्गों की बढ़ती संख्या और दिव्यांगजनों के समावेश को लेकर नागरिक संगठन लंबे समय से अधिक समावेशी पात्रता मानकों की माँग कर रहे थे।

इस फैसले से यह भी स्पष्ट है कि सरकार सामाजिक सुरक्षा के बुनियादी ढाँचे को अगले पाँच वर्षों तक बनाए रखने के प्रति प्रतिबद्ध है और दिव्यांगजनों के लिए बाधाएँ कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

428 करोड़ की यह स्वीकृति सामाजिक सुरक्षा की निरंतरता का संकेत है, लेकिन असली परख पेंशन राशि की पर्याप्तता पर होगी — वृद्धावस्था और विधवा पेंशन की मौजूदा दरें एक दशक से अधिक समय से बढ़ती महँगाई के सामने कमज़ोर मानी जाती रही हैं। दिव्यांग पात्रता को 80% से 40% पर लाना वास्तविक सुधार है और 2016 के कानून के साथ तालमेल बिठाने में देरी का स्वीकार भी; सवाल यह है कि नए लाभार्थियों तक पहुँच की निगरानी कैसे होगी। योजनाओं का पुनर्नामकरण राजनीतिक ब्रांडिंग के रूप में पढ़ा जाएगा, पर ज़मीन पर असर तब दिखेगा जब तीन महीने में जारी होने वाले दिशा-निर्देश लागू होंगे।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को कितने समय के लिए और कितने बजट के साथ बढ़ाया गया है?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने NSAP को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पाँच वर्षों के लिए ₹53,428 करोड़ के प्रावधान के साथ जारी रखने की मंजूरी दी है। इससे देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 3.20 करोड़ लाभार्थी लाभान्वित होंगे।
दिव्यांगजन पेंशन योजना में क्या बदलाव किए गए हैं?
दिव्यांग पेंशन की पात्रता के लिए अनिवार्य दिव्यांगता प्रतिशत 80% से घटाकर 40% बेंचमार्क दिव्यांगता कर दी गई है। न्यूनतम आयु सीमा भी समाप्त कर दी गई है, जिससे जन्म से दिव्यांग व्यक्ति भी अब इस योजना के पात्र होंगे। सहायता राशि 0-79 वर्ष के लाभार्थियों के लिए ₹375 प्रति माह और 80 वर्ष या उससे अधिक के लिए ₹625 प्रति माह तय की गई है।
NSAP और उसकी उप-योजनाओं के नाम क्या होंगे?
NSAP का नाम बदलकर 'प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना' किया जाएगा। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना, विधवा पेंशन योजना और दिव्यांग पेंशन योजना तथा राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना के नाम क्रमशः 'प्रधानमंत्री' ब्रांड में बदले जाएँगे। वृद्धावस्था, विधवा और परिवार लाभ योजनाओं की सहायता राशि और पात्रता शर्तें पहले की तरह बनी रहेंगी।
संशोधित दिशा-निर्देश कब से लागू होंगे?
ग्रामीण विकास विभाग अगले तीन महीनों के भीतर संशोधित दिशा-निर्देश जारी करेगा और उन्हें लागू करेगा। यह प्रक्रिया 14 अक्टूबर 2026 को कैबिनेट की मंजूरी के बाद से शुरू मानी जाएगी।
NSAP में केंद्र सरकार का वित्तपोषण किस अनुपात में होता है?
केंद्र सरकार NSAP के तहत 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्तपोषण प्रदान करती है। यह योजना संविधान के अनुच्छेद 41 में निहित नीति निर्देशक सिद्धांतों के अंतर्गत 15 अगस्त 1995 से चल रही है, जिसका उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सामाजिक सुरक्षा देना है।
राष्ट्र प्रेस
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