14 अक्टूबर 2026
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एनएसएपी को ₹53,428 करोड़ के साथ 5 साल की मंजूरी, 3.2 करोड़ लाभार्थियों को राहत

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एनएसएपी को ₹53,428 करोड़ के साथ 5 साल की मंजूरी, 3.2 करोड़ लाभार्थियों को राहत

सारांश

केंद्रीय कैबिनेट ने एनएसएपी को ₹53,428 करोड़ के बजट के साथ अगले पाँच साल जारी रखने की मंजूरी दी — 3.2 करोड़ बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों को राहत। पद्मश्री डॉ. कनुभाई टेलर ने इसे दिव्यांग कल्याण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

मुख्य बातें

केंद्रीय कैबिनेट ने 14 अक्टूबर 2026 को एनएसएपी को अगले 5 वर्षों के लिए ₹53,428 करोड़ के बजट के साथ जारी रखने की मंजूरी दी।
देशभर में करीब 3 करोड़ 20 लाख लाभार्थियों — बुजुर्ग, विधवाएँ, दिव्यांगजन — को योजना का लाभ मिलता रहेगा।
दिव्यांगता लाभ के लिए पात्रता सीमा 40 प्रतिशत निर्धारित की गई है, जिससे पहले की तुलना में अधिक लोग पात्र बनेंगे।
कनुभाई टेलर , डिसेबल्ड वेलफेयर ट्रस्ट ऑफ इंडिया के संस्थापक-अध्यक्ष, ने फैसले का स्वागत कर PM मोदी का आभार जताया।
टेलर ने कहा कि मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के 20 मिनट के भीतर दिव्यांगजनों के कल्याण की प्रतिबद्धता जताई थी।

केंद्रीय कैबिनेट ने 14 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) को अगले पाँच वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी दी, जिसके लिए ₹53,428 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में लिए गए इस निर्णय से देशभर के करीब 3 करोड़ 20 लाख लाभार्थियों को आर्थिक सहायता मिलती रहेगी। इस योजना के दायरे में बुजुर्ग, विधवा महिलाएँ, दिव्यांगजन और समाज के कमजोर वर्ग शामिल हैं।

योजना का दायरा और लाभार्थी

एनएसएपी के तहत वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांगता सहायता जैसे घटकों के ज़रिये सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाती है। उल्लेखनीय है कि इस बार दिव्यांगता लाभ के लिए पात्रता सीमा 40 प्रतिशत निर्धारित की गई है, जिससे पहले की तुलना में अधिक लोग योजना के लाभ के हक़दार बन सकेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव उन लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो मध्यम दिव्यांगता के बावजूद रोज़गार पाने में गंभीर बाधाओं का सामना करते हैं।

डॉ. कनुभाई टेलर की प्रतिक्रिया

सूरत स्थित डिसेबल्ड वेलफेयर ट्रस्ट ऑफ इंडिया के संस्थापक-अध्यक्ष और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. कनुभाई टेलर ने इस निर्णय का स्वागत किया और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए आर्थिक सहायता उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने में सहायक हो सकती है।

डॉ. टेलर ने कहा, भारत सरकार को यह कदम बहुत पहले उठा लेना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से अब तक इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी दिव्यांगजनों के लिए कुछ करने की ज़रूरत को समझते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि दिव्यांगजनों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास सराहनीय है।

पुराना संबंध और सामाजिक प्रतिबद्धता

डॉ. टेलर ने प्रधानमंत्री के साथ अपनी पुरानी मुलाकात का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि जब मोदी पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे, तब पदभार संभालने के करीब 20 मिनट के भीतर उनकी मुलाकात हुई थी और उस समय भी मोदी ने दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए काम करने की इच्छा जताई थी। डॉ. टेलर के अनुसार, आज प्रधानमंत्री के रूप में उठाए जा रहे कदम उसी सोच को आगे बढ़ाने का हिस्सा हैं।

आम जनता पर असर

योजना की निरंतरता से बुजुर्गों को बढ़ती उम्र में नियमित आर्थिक सहायता मिलती रहेगी, जिससे वे अपनी दैनिक ज़रूरतें पूरी कर सकेंगे और दूसरों पर पूर्ण निर्भरता से बच सकेंगे। दिव्यांगजनों के लिए 40 प्रतिशत की पात्रता सीमा उन लोगों तक सहायता पहुँचाने में मददगार होगी जो रोज़गार बाज़ार में प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थ हैं। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा की माँग लगातार बढ़ रही है।

आगे की राह

गौरतलब है कि एनएसएपी देश के सबसे पुराने केंद्र-प्रायोजित सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में से एक है और इसे जारी रखने का यह निर्णय करोड़ों वंचित परिवारों के लिए दीर्घकालिक राहत का संकेत देता है। आने वाले महीनों में योजना के क्रियान्वयन की दिशा और राज्यों के साथ समन्वय पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ₹53,428 करोड़ का यह बजट वास्तव में 3.2 करोड़ लाभार्थियों की बढ़ती ज़रूरतों और महँगाई के अनुपात में पर्याप्त है। एनएसएपी के तहत मासिक पेंशन राशि वर्षों से न्यूनतम स्तर पर बनी हुई है और आलोचकों का कहना है कि यह वास्तविक जीवनयापन लागत से काफी कम है। 40 प्रतिशत दिव्यांगता सीमा का निर्धारण सकारात्मक है, पर क्रियान्वयन में राज्य-स्तरीय असमानताएँ और पात्रता सत्यापन की जटिलताएँ इस लाभ को ज़मीन तक पहुँचने से अक्सर रोकती रही हैं।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनएसएपी योजना क्या है और इससे किसे लाभ मिलता है?
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) केंद्र सरकार की एक प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना है जो बुजुर्गों, विधवा महिलाओं और दिव्यांगजनों को नियमित आर्थिक सहायता प्रदान करती है। वर्तमान में इससे देशभर में करीब 3 करोड़ 20 लाख लाभार्थी जुड़े हैं।
कैबिनेट ने एनएसएपी के लिए कितना बजट मंजूर किया है?
केंद्रीय कैबिनेट ने 14 अक्टूबर 2026 को एनएसएपी को अगले पाँच वर्षों के लिए ₹53,428 करोड़ के बजट के साथ जारी रखने की मंजूरी दी है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में लिया गया।
दिव्यांगजनों के लिए पात्रता में क्या बदलाव किया गया है?
इस बार दिव्यांगता लाभ के लिए पात्रता सीमा 40 प्रतिशत निर्धारित की गई है, जिससे पहले की तुलना में अधिक लोग योजना के अंतर्गत आ सकेंगे। पद्मश्री डॉ. कनुभाई टेलर ने इसे महत्वपूर्ण कदम बताया है क्योंकि 40 प्रतिशत दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को भी रोज़गार पाने में गंभीर कठिनाइयाँ होती हैं।
डॉ. कनुभाई टेलर कौन हैं और उनकी प्रतिक्रिया क्यों महत्वपूर्ण है?
डॉ. कनुभाई टेलर सूरत स्थित डिसेबल्ड वेलफेयर ट्रस्ट ऑफ इंडिया के संस्थापक-अध्यक्ष हैं और उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। दिव्यांग कल्याण के क्षेत्र में उनके दशकों के अनुभव के कारण उनकी प्रतिक्रिया इस नीति के व्यावहारिक महत्व को रेखांकित करती है।
एनएसएपी की निरंतरता से बुजुर्गों को क्या फायदा होगा?
योजना जारी रहने से बुजुर्गों को नियमित आर्थिक सहायता मिलती रहेगी, जिससे वे अपनी दैनिक ज़रूरतें पूरी कर सकेंगे और दूसरों पर पूर्ण निर्भरता से बच सकेंगे। डॉ. टेलर के अनुसार, यह सहायता उन्हें अधिक सम्मान के साथ जीवन जीने में मददगार है।
राष्ट्र प्रेस
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