एनएसएपी को ₹53,428 करोड़ के साथ 5 साल की मंजूरी, 3.2 करोड़ लाभार्थियों को राहत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कैबिनेट ने 14 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) को अगले पाँच वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी दी, जिसके लिए ₹53,428 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में लिए गए इस निर्णय से देशभर के करीब 3 करोड़ 20 लाख लाभार्थियों को आर्थिक सहायता मिलती रहेगी। इस योजना के दायरे में बुजुर्ग, विधवा महिलाएँ, दिव्यांगजन और समाज के कमजोर वर्ग शामिल हैं।
योजना का दायरा और लाभार्थी
एनएसएपी के तहत वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांगता सहायता जैसे घटकों के ज़रिये सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाती है। उल्लेखनीय है कि इस बार दिव्यांगता लाभ के लिए पात्रता सीमा 40 प्रतिशत निर्धारित की गई है, जिससे पहले की तुलना में अधिक लोग योजना के लाभ के हक़दार बन सकेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव उन लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो मध्यम दिव्यांगता के बावजूद रोज़गार पाने में गंभीर बाधाओं का सामना करते हैं।
डॉ. कनुभाई टेलर की प्रतिक्रिया
सूरत स्थित डिसेबल्ड वेलफेयर ट्रस्ट ऑफ इंडिया के संस्थापक-अध्यक्ष और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. कनुभाई टेलर ने इस निर्णय का स्वागत किया और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए आर्थिक सहायता उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने में सहायक हो सकती है।
डॉ. टेलर ने कहा, भारत सरकार को यह कदम बहुत पहले उठा लेना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से अब तक इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी दिव्यांगजनों के लिए कुछ करने की ज़रूरत को समझते हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री को दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि दिव्यांगजनों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास सराहनीय है।
पुराना संबंध और सामाजिक प्रतिबद्धता
डॉ. टेलर ने प्रधानमंत्री के साथ अपनी पुरानी मुलाकात का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि जब मोदी पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे, तब पदभार संभालने के करीब 20 मिनट के भीतर उनकी मुलाकात हुई थी और उस समय भी मोदी ने दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए काम करने की इच्छा जताई थी। डॉ. टेलर के अनुसार, आज प्रधानमंत्री के रूप में उठाए जा रहे कदम उसी सोच को आगे बढ़ाने का हिस्सा हैं।
आम जनता पर असर
योजना की निरंतरता से बुजुर्गों को बढ़ती उम्र में नियमित आर्थिक सहायता मिलती रहेगी, जिससे वे अपनी दैनिक ज़रूरतें पूरी कर सकेंगे और दूसरों पर पूर्ण निर्भरता से बच सकेंगे। दिव्यांगजनों के लिए 40 प्रतिशत की पात्रता सीमा उन लोगों तक सहायता पहुँचाने में मददगार होगी जो रोज़गार बाज़ार में प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थ हैं। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा की माँग लगातार बढ़ रही है।
आगे की राह
गौरतलब है कि एनएसएपी देश के सबसे पुराने केंद्र-प्रायोजित सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में से एक है और इसे जारी रखने का यह निर्णय करोड़ों वंचित परिवारों के लिए दीर्घकालिक राहत का संकेत देता है। आने वाले महीनों में योजना के क्रियान्वयन की दिशा और राज्यों के साथ समन्वय पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा।