17 सितंबर 2026
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दिव्यांग सशक्तिकरण पर पद्मश्री कनुभाई टेलर बोले — मोदी ने 'दया' की जगह 'आत्मनिर्भरता' की सोच दी

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दिव्यांग सशक्तिकरण पर पद्मश्री कनुभाई टेलर बोले — मोदी ने 'दया' की जगह 'आत्मनिर्भरता' की सोच दी

सारांश

सूरत के पद्मश्री कनुभाई टेलर का कहना है कि मोदी ने दिव्यांगों को 'सहायता का पात्र' से 'आत्मनिर्भर नागरिक' बनाने की सोच दी। भरूच में ₹28 करोड़ की लागत से बन रहा ओल्ड एज होम इसी सोच की मिसाल है, जहाँ 200 दिव्यांग बुजुर्गों को सम्मानजनक जीवन मिलेगा।

मुख्य बातें

पद्मश्री कनुभाई हसमुखभाई टेलर ने 17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर दिव्यांग कल्याण पर अपने विचार साझा किए।
उनके अनुसार मोदी के नेतृत्व में दिव्यांग नीति 'आर्थिक सहायता' से बदलकर 'हुनर और रोजगार आधारित आत्मनिर्भरता' पर केंद्रित हुई है।
भरूच में निर्माणाधीन दिव्यांग बुजुर्गों के लिए ओल्ड एज होम पर अब तक ₹28 करोड़ खर्च; केवल 5% काम शेष है।
इस केंद्र में करीब 200 दिव्यांग बुजुर्गों को सरकारी सहायता मिलने की योजना है।
कनुभाई की संस्था की ओर से जन्मदिवस पर 76 दिव्यांगजनों को व्हीलचेयर वितरित की जाएगी।
परियोजना का शिलान्यास मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने किया था; उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी के हाथों होने की उम्मीद।

सूरत के पद्मश्री सम्मानित समाजसेवी कनुभाई हसमुखभाई टेलर ने 17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर दिव्यांग कल्याण और पुनर्वास के क्षेत्र में आए नीतिगत बदलावों पर अपने विचार साझा किए। 72 वर्षीय कनुभाई के अनुसार, मोदी के नेतृत्व में सरकार और समाज दोनों की दृष्टि में मूलभूत परिवर्तन आया है — अब दिव्यांगजनों को सहायता का पात्र नहीं, बल्कि स्वावलंबी नागरिक के रूप में देखा जा रहा है।

सोच में बदलाव: 'रोटी देना नहीं, बनाना सिखाना'

कनुभाई टेलर ने कहा कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले दिव्यांगों के लिए सरकारी और सामाजिक सहायता का बड़ा हिस्सा मुख्यतः भोजन या आर्थिक मदद तक सीमित था। उन्होंने कहा, 'सोच यह होनी चाहिए कि दिव्यांग व्यक्ति को केवल रोटला न दिया जाए, बल्कि उसे रोटी या भाखरी बनाना सिखाया जाए, ताकि वह स्वयं कमाकर अपना और अपने परिवार का सहारा बन सके।' उनके अनुसार, इस बदली हुई सोच ने दिव्यांगजनों में आत्मविश्वास बढ़ाया है और समाज में उनके प्रति सम्मान को मजबूत किया है।

पहले और अब: परिवार में दृष्टिकोण का बदलाव

उन्होंने बताया कि पहले कई परिवारों में दिव्यांग बच्चे को लाचार या परिवार पर बोझ समझा जाता था। आज नौकरी या स्वरोजगार के जरिए कमाने वाले दिव्यांग अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भागीदारी निभा रहे हैं। कनुभाई ने इसे दिव्यांगजनों के आत्मसम्मान में आए सकारात्मक बदलाव का ठोस उदाहरण बताया।

भरूच में ओल्ड एज होम: ₹28 करोड़ की परियोजना अंतिम चरण में

भरूच में दिव्यांग बुजुर्गों के लिए निर्माणाधीन ओल्ड एज होम अपने अंतिम चरण में है और लगभग पाँच प्रतिशत काम शेष है। इस परियोजना में अब तक करीब ₹28 करोड़ व्यय हो चुके हैं। परियोजना का शिलान्यास गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने किया था। कनुभाई ने उम्मीद जताई कि इस केंद्र का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों हो। इस केंद्र में करीब 200 दिव्यांग बुजुर्गों को सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की योजना है, जिन्हें पर्याप्त भोजन और देखभाल नहीं मिल पाती।

जन्मदिवस पर सामाजिक पहल: 76 दिव्यांगों को व्हीलचेयर

प्रधानमंत्री के जन्मदिवस के अवसर पर कनुभाई टेलर की संस्था की ओर से 76 दिव्यांगजनों को व्हीलचेयर प्रदान की जाएगी। संस्था द्वारा स्कूल में बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था भी की जाती है और इस अवसर पर कई सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कनुभाई ने कहा कि दिव्यांगों को फुटपाथ पर भीख माँगने या रेलवे स्टेशन पर रहने की स्थिति से बाहर निकालकर सम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए।

कनुभाई की व्यक्तिगत भावना और आगे की राह

अपनी व्यक्तिगत भावनाएं साझा करते हुए कनुभाई ने कहा कि उनका राजनीति से कोई संबंध नहीं है, लेकिन अपने 72 वर्ष के जीवन में उन्होंने नरेंद्र मोदी जैसा समर्पित व्यक्ति नहीं देखा। उन्होंने प्रधानमंत्री के गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक के लंबे सार्वजनिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि दिव्यांग कल्याण के क्षेत्र में नीतिगत सोच का यह बदलाव उनके लिए विशेष महत्व रखता है। कनुभाई के अनुसार दिव्यांग व्यक्ति को दया का पात्र नहीं, बल्कि समाज का सक्षम और सम्मानित हिस्सा बनाने की दिशा में प्रयास निरंतर जारी रहने चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो नीतिगत बदलाव को व्यवहार में देख रहे हैं — यह महज़ राजनीतिक प्रशंसा नहीं। हालाँकि 'आत्मनिर्भर दिव्यांग' की परिकल्पना सशक्त है, इसकी असली कसौटी यह है कि कौशल-प्रशिक्षण कार्यक्रमों से निकलने वाले दिव्यांजनों की वास्तविक रोजगार दर क्या है। भरूच का ₹28 करोड़ का ओल्ड एज होम एक ठोस पहल है, लेकिन देश में दिव्यांग बुजुर्गों की कुल संख्या के सापेक्ष 200 लाभार्थियों की क्षमता अभी भी प्रतीकात्मक है। समाज की भूमिका पर कनुभाई का ज़ोर सही दिशा में है — सरकारी योजनाएँ तब ही टिकाऊ होती हैं जब सामाजिक दृष्टिकोण भी साथ बदले।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पद्मश्री कनुभाई टेलर कौन हैं और दिव्यांग कल्याण में उनका क्या योगदान है?
कनुभाई हसमुखभाई टेलर सूरत, गुजरात के 72 वर्षीय समाजसेवी हैं, जिन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान से नवाजा है। वे दशकों से दिव्यांगजनों के पुनर्वास, आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं।
भरूच में बन रहा दिव्यांग ओल्ड एज होम क्या है और इसमें किसे लाभ मिलेगा?
भरूच में दिव्यांग बुजुर्गों के लिए एक ओल्ड एज होम का निर्माण हो रहा है, जिस पर अब तक करीब ₹28 करोड़ खर्च हो चुके हैं और लगभग 5% काम शेष है। इसमें करीब 200 ऐसे दिव्यांग बुजुर्गों को सरकारी सहायता मिलेगी जिन्हें पर्याप्त भोजन और देखभाल नहीं मिल पाती।
कनुभाई टेलर के अनुसार मोदी से पहले और बाद में दिव्यांग नीति में क्या अंतर आया?
कनुभाई के अनुसार, पहले दिव्यांगों के लिए सहायता मुख्यतः भोजन या आर्थिक मदद तक सीमित थी। मोदी के नेतृत्व में नीतिगत जोर अब हुनर-विकास और रोजगार पर है, ताकि दिव्यांग व्यक्ति स्वयं कमाकर परिवार का सहारा बन सके।
मोदी जन्मदिवस पर कनुभाई टेलर की संस्था ने क्या पहल की?
कनुभाई टेलर की संस्था ने 17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री के जन्मदिवस के अवसर पर 76 दिव्यांगजनों को व्हीलचेयर वितरित करने की घोषणा की। इसके साथ ही संस्था स्कूली बच्चों के लिए भोजन और अन्य सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित कर रही है।
भरूच ओल्ड एज होम का उद्घाटन कब और किसके हाथों होगा?
परियोजना अंतिम चरण में है और लगभग 5% काम शेष है। कनुभाई टेलर ने उम्मीद जताई है कि उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होगा। परियोजना का शिलान्यास गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने किया था।
राष्ट्र प्रेस
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