दिव्यांग सशक्तिकरण पर पद्मश्री कनुभाई टेलर बोले — मोदी ने 'दया' की जगह 'आत्मनिर्भरता' की सोच दी
सारांश
मुख्य बातें
सूरत के पद्मश्री सम्मानित समाजसेवी कनुभाई हसमुखभाई टेलर ने 17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर दिव्यांग कल्याण और पुनर्वास के क्षेत्र में आए नीतिगत बदलावों पर अपने विचार साझा किए। 72 वर्षीय कनुभाई के अनुसार, मोदी के नेतृत्व में सरकार और समाज दोनों की दृष्टि में मूलभूत परिवर्तन आया है — अब दिव्यांगजनों को सहायता का पात्र नहीं, बल्कि स्वावलंबी नागरिक के रूप में देखा जा रहा है।
सोच में बदलाव: 'रोटी देना नहीं, बनाना सिखाना'
कनुभाई टेलर ने कहा कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले दिव्यांगों के लिए सरकारी और सामाजिक सहायता का बड़ा हिस्सा मुख्यतः भोजन या आर्थिक मदद तक सीमित था। उन्होंने कहा, 'सोच यह होनी चाहिए कि दिव्यांग व्यक्ति को केवल रोटला न दिया जाए, बल्कि उसे रोटी या भाखरी बनाना सिखाया जाए, ताकि वह स्वयं कमाकर अपना और अपने परिवार का सहारा बन सके।' उनके अनुसार, इस बदली हुई सोच ने दिव्यांगजनों में आत्मविश्वास बढ़ाया है और समाज में उनके प्रति सम्मान को मजबूत किया है।
पहले और अब: परिवार में दृष्टिकोण का बदलाव
उन्होंने बताया कि पहले कई परिवारों में दिव्यांग बच्चे को लाचार या परिवार पर बोझ समझा जाता था। आज नौकरी या स्वरोजगार के जरिए कमाने वाले दिव्यांग अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भागीदारी निभा रहे हैं। कनुभाई ने इसे दिव्यांगजनों के आत्मसम्मान में आए सकारात्मक बदलाव का ठोस उदाहरण बताया।
भरूच में ओल्ड एज होम: ₹28 करोड़ की परियोजना अंतिम चरण में
भरूच में दिव्यांग बुजुर्गों के लिए निर्माणाधीन ओल्ड एज होम अपने अंतिम चरण में है और लगभग पाँच प्रतिशत काम शेष है। इस परियोजना में अब तक करीब ₹28 करोड़ व्यय हो चुके हैं। परियोजना का शिलान्यास गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने किया था। कनुभाई ने उम्मीद जताई कि इस केंद्र का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों हो। इस केंद्र में करीब 200 दिव्यांग बुजुर्गों को सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की योजना है, जिन्हें पर्याप्त भोजन और देखभाल नहीं मिल पाती।
जन्मदिवस पर सामाजिक पहल: 76 दिव्यांगों को व्हीलचेयर
प्रधानमंत्री के जन्मदिवस के अवसर पर कनुभाई टेलर की संस्था की ओर से 76 दिव्यांगजनों को व्हीलचेयर प्रदान की जाएगी। संस्था द्वारा स्कूल में बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था भी की जाती है और इस अवसर पर कई सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कनुभाई ने कहा कि दिव्यांगों को फुटपाथ पर भीख माँगने या रेलवे स्टेशन पर रहने की स्थिति से बाहर निकालकर सम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए।
कनुभाई की व्यक्तिगत भावना और आगे की राह
अपनी व्यक्तिगत भावनाएं साझा करते हुए कनुभाई ने कहा कि उनका राजनीति से कोई संबंध नहीं है, लेकिन अपने 72 वर्ष के जीवन में उन्होंने नरेंद्र मोदी जैसा समर्पित व्यक्ति नहीं देखा। उन्होंने प्रधानमंत्री के गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक के लंबे सार्वजनिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि दिव्यांग कल्याण के क्षेत्र में नीतिगत सोच का यह बदलाव उनके लिए विशेष महत्व रखता है। कनुभाई के अनुसार दिव्यांग व्यक्ति को दया का पात्र नहीं, बल्कि समाज का सक्षम और सम्मानित हिस्सा बनाने की दिशा में प्रयास निरंतर जारी रहने चाहिए।