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आईआईएम काशीपुर की बड़ी पहल: रेलवे, अस्पताल, पंचायती राज और शिक्षा में बनेंगे दक्ष प्रोफेशनल

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आईआईएम काशीपुर की बड़ी पहल: रेलवे, अस्पताल, पंचायती राज और शिक्षा में बनेंगे दक्ष प्रोफेशनल

सारांश

आईआईएम काशीपुर ने रेलवे, हॉस्पिटल, शिक्षा और पंचायती राज के लिए विशेष कार्यकारी MBA शुरू किया है। इस साल 546 छात्रों को डिग्री मिली, जिनमें 39% से अधिक महिलाएं हैं। 500 सरकारी प्रिंसिपल-प्रोफेसर भी प्रशिक्षित किए गए।

मुख्य बातें

आईआईएम काशीपुर ने रेलवे प्रबंधन और हॉस्पिटल मैनेजमेंट के लिए विशेष कार्यकारी MBA पाठ्यक्रम शुरू किए हैं।
इस वर्ष 546 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें 280 MBA और 14 PhD शामिल हैं।
MBA (एनालिटिक्स) में 73% से अधिक छात्राएं, पूरे बैच में महिला भागीदारी 39.19% — पिछले वर्ष से 6% अधिक।
हाल ही में लगभग 500 सरकारी प्रिंसिपल और प्रोफेसर को नई शिक्षा नीति और डिजिटल शिक्षण पर प्रशिक्षण दिया गया।
73 लाइव प्रोजेक्ट्स में 300 से अधिक छात्रों ने ग्रामीण विकास और MSME क्षेत्र में व्यावहारिक कार्य किया।
संस्थान के निदेशक प्रोफेसर नीरज द्विवेदी और बोर्ड अध्यक्ष संदीप सिंह ने सामाजिक उत्तरदायित्व को संस्थान की मुख्य प्राथमिकता बताया।

आईआईएम काशीपुर ने केंद्र व राज्य सरकारों से संबद्ध संस्थानों के लिए दक्ष प्रबंधकीय पेशेवर तैयार करने की महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीन संचालित इस संस्थान ने रेलवे, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और पंचायती राज जैसे अहम सार्वजनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षित नेतृत्व की कमी को पूरा करने का बीड़ा उठाया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब देश में सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता और प्रशासनिक दक्षता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

रेलवे प्रबंधन के लिए विशेष कार्यकारी MBA

आईआईएम काशीपुर ने रेलवे प्रबंधन के लिए एक विशेष कार्यकारी MBA पाठ्यक्रम शुरू किया है, जो मेट्रो रेल, भारतीय रेल, हाई स्पीड रेल और विविध रेल नेटवर्क के संचालन को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह पाठ्यक्रम सप्लाई चेन प्रबंधन, रेलवे प्रशासन और बड़े बुनियादी ढांचे परियोजनाओं के कुशल क्रियान्वयन पर केंद्रित है।

गौरतलब है कि भारत में रेलवे दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्कों में से एक है, फिर भी प्रशिक्षित प्रबंधकों की कमी लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है। इस पाठ्यक्रम के जरिए उस खाई को पाटने की कोशिश की जा रही है।

हॉस्पिटल मैनेजमेंट: स्वास्थ्य सेवाओं में गुणात्मक सुधार की राह

हॉस्पिटल मैनेजमेंट पाठ्यक्रम के अंतर्गत अस्पतालों में मरीजों की सुविधा, संसाधनों का अनुकूल उपयोग, आपातकालीन सेवाओं की दक्षता, डिजिटल हेल्थ सिस्टम और प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करने पर विशेष बल दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण अस्पताल प्रबंधकों को ऐसे व्यावहारिक कौशल से लैस करता है जिससे वे सीमित संसाधनों में बेहतर और त्वरित सेवाएं दे सकें।

यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी अस्पतालों में प्रशिक्षित प्रशासनिक नेतृत्व की कमी अक्सर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। आईआईएम काशीपुर का यह प्रयास उस अंतर को भरने की दिशा में एक ठोस कदम है।

शिक्षा क्षेत्र: 500 सरकारी प्रिंसिपल और प्रोफेसर हुए प्रशिक्षित

आईआईएम काशीपुर के निदेशक प्रोफेसर नीरज द्विवेदी के अनुसार, संस्थान का लक्ष्य केवल व्यक्तिगत करियर निर्माण नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना जगाना भी है। इसी दिशा में हाल ही में लगभग 500 सरकारी प्रिंसिपल और प्रोफेसर को आधुनिक प्रबंधन, नेतृत्व कौशल और संस्थागत विकास पर प्रशिक्षण दिया गया।

इस प्रशिक्षण में नई शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन, डिजिटल शिक्षण तकनीकों के उपयोग और शैक्षणिक संस्थानों में बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। इससे कक्षाओं में हो रही पढ़ाई का सीधा असर जमीनी बदलावों पर दिखेगा।

दीक्षांत समारोह: 546 छात्रों को डिग्री, महिलाओं की बढ़ी भागीदारी

बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अंतरिम अध्यक्ष संदीप सिंह ने बताया कि इस वर्ष 546 विद्यार्थियों को विभिन्न प्रबंधन और शोध कार्यक्रमों में डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 280 MBA, 160 MBA (एनालिटिक्स), 34 कार्यकारी MBA, 58 कार्यकारी MBA (एनालिटिक्स) और 14 PhD के विद्यार्थी शामिल रहे।

विशेष उल्लेखनीय यह है कि MBA (एनालिटिक्स) कार्यक्रम में 73 प्रतिशत से अधिक छात्राएं शामिल रहीं, जबकि पूरे बैच में महिलाओं की हिस्सेदारी 39.19 प्रतिशत रही — जो पिछले वर्ष के 33 प्रतिशत से काफी अधिक है। यह आंकड़ा प्रबंधन और डेटा विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति का प्रमाण है।

73 लाइव प्रोजेक्ट्स से जुड़े 300 से अधिक छात्र

संस्थान के अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम के तहत इस बैच के 300 से अधिक विद्यार्थियों ने 73 लाइव प्रोजेक्ट्स में भाग लिया। इन परियोजनाओं के माध्यम से ग्रामीण विकास और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) के विकास जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक कार्य किया गया।

यह मॉडल उस पारंपरिक धारणा को तोड़ता है जिसमें आईआईएम जैसे संस्थानों को केवल कॉर्पोरेट जगत की फैक्ट्री माना जाता था। अब ये संस्थान सार्वजनिक सेवाओं और ग्रामीण भारत के विकास में भी सक्रिय भूमिका निभाने की ओर बढ़ रहे हैं। आने वाले वर्षों में इस मॉडल का विस्तार अन्य आईआईएम संस्थानों तक भी हो सकता है, जो भारत की सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में एक बड़ा परिवर्तन ला सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

रेलवे और स्कूल दशकों से प्रशिक्षित नेतृत्व की कमी झेल रहे हैं, तो यह पहल इतनी देर से क्यों आई? महिलाओं की 39% से अधिक भागीदारी एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब ये प्रशिक्षित पेशेवर जमीन पर उतरेंगे और व्यवस्था से टकराएंगे। यदि यह मॉडल सफल रहा, तो अन्य आईआईएम संस्थानों को भी इसी राह पर चलना होगा — और यही भारत की असली जरूरत है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईआईएम काशीपुर ने कौन-कौन से नए कोर्स शुरू किए हैं?
आईआईएम काशीपुर ने रेलवे प्रबंधन और हॉस्पिटल मैनेजमेंट के लिए विशेष कार्यकारी MBA पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। इसके अलावा शिक्षा क्षेत्र और पंचायती राज से जुड़े लोगों के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
आईआईएम काशीपुर में इस साल कितने छात्रों को डिग्री मिली?
इस वर्ष आईआईएम काशीपुर के दीक्षांत समारोह में 546 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 280 MBA, 160 MBA (एनालिटिक्स), 34 कार्यकारी MBA, 58 कार्यकारी MBA (एनालिटिक्स) और 14 PhD शामिल हैं।
आईआईएम काशीपुर में महिला छात्रों की भागीदारी कितनी रही?
इस वर्ष पूरे बैच में महिलाओं की हिस्सेदारी 39.19 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष के 33 प्रतिशत से अधिक है। MBA (एनालिटिक्स) कार्यक्रम में तो 73 प्रतिशत से अधिक छात्राएं शामिल रहीं।
आईआईएम काशीपुर ने सरकारी शिक्षकों को कैसे प्रशिक्षित किया?
आईआईएम काशीपुर ने हाल ही में लगभग 500 सरकारी प्रिंसिपल और प्रोफेसर को आधुनिक प्रबंधन, नेतृत्व और नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर प्रशिक्षण दिया। इस प्रशिक्षण में डिजिटल शिक्षण तकनीक और प्रशासनिक सुधार पर विशेष जोर दिया गया।
आईआईएम काशीपुर के लाइव प्रोजेक्ट्स में किन क्षेत्रों पर काम हुआ?
संस्थान के 73 लाइव प्रोजेक्ट्स में 300 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। इन परियोजनाओं में ग्रामीण विकास और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) के विकास पर केंद्रित कार्य किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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