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भारत का केमिकल उद्योग 2030 तक $300 अरब, 2040 तक $1 ट्रिलियन: सरकारी फैक्टशीट

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भारत का केमिकल उद्योग 2030 तक $300 अरब, 2040 तक $1 ट्रिलियन: सरकारी फैक्टशीट

सारांश

भारत का $220 अरब का रसायन उद्योग 2040 तक $1 ट्रिलियन के पड़ाव की ओर बढ़ रहा है। भव्य रसायन योजना के तीन विशेष पार्क, ₹1 लाख करोड़ का आरडीआई कोष और दोगुने से ज़्यादा एफडीआई — ये संकेत बताते हैं कि सरकार इस क्षेत्र को वैश्विक मूल्य शृंखला में एक अहम खिलाड़ी बनाने के लिए गंभीर है।

मुख्य बातें

भारत का रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग फिलहाल $220 अरब का है; 2030 तक $300 अरब और 2040 तक $1 ट्रिलियन का अनुमान।
भारत दुनिया का छठा सबसे बड़ा रसायन उत्पादक और डाई निर्यात में दूसरे स्थान पर है।
2014-2026 के बीच क्षेत्र में ₹1,04,895 करोड़ का एफडीआई — पिछले दशक से दोगुना।
भव्य रसायन योजना के तहत ₹3,030 करोड़ से तीन विशेष केमिकल पार्क, प्रत्येक कम से कम 8 वर्ग किमी ।
आरडीआई योजना के तहत ₹1 लाख करोड़ का कोष; नवाचार और आत्मनिर्भरता का लक्ष्य।
क्षेत्र में 13,000 बड़े उद्योग और 4.45 लाख एमएसएमई सक्रिय।

भारत का रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग, जो फिलहाल लगभग $220 अरब का है, 2030 तक $300 अरब और 2040 तक $1 ट्रिलियन के स्तर तक पहुँच सकता है। केंद्र सरकार द्वारा 7 नवंबर 2026 को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट में यह अनुमान सामने आया है। इस दस्तावेज़ के अनुसार, यह क्षेत्र भारत की औद्योगिक और विनिर्माण वृद्धि का एक निर्णायक स्तंभ बनता जा रहा है।

वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति

फैक्टशीट के मुताबिक, भारत इस समय दुनिया का छठा सबसे बड़ा रसायन उत्पादक और एशिया का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है। इस क्षेत्र के उत्पाद औषधि, वस्त्र, निर्माण, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता वस्तुओं सहित दर्जनों उद्योगों की रीढ़ हैं। विशेष रसायनों में भी भारत की स्थिति उल्लेखनीय है — देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डाई निर्माता और निर्यातक है, जबकि कृषि रसायनों के निर्यात में तीसरे स्थान पर है।

उत्पादन में उछाल और एफडीआई की रफ्तार

प्रमुख रसायनों और पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उत्पादन 2015-16 के 45,638 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर 2024-25 में 58,617 हजार मीट्रिक टन पर पहुँच गया। यह वृद्धि उत्पादन क्षमता विस्तार, विशेषीकृत विनिर्माण हब के उभार और बुनियादी ढाँचे में सुधार का परिणाम बताई जा रही है।

सरकार ने अधिकांश रसायन क्षेत्रों में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) स्वचालित मार्ग के तहत खुला रखा है। इसका असर भी दिखता है — 2014 से 2026 के बीच इस क्षेत्र में ₹1,04,895 करोड़ का एफडीआई आया, जो 2004 से 2014 के बीच प्राप्त ₹45,240 करोड़ से दोगुने से भी ज़्यादा है। यह आँकड़ा क्षेत्र की निवेश-अनुकूल नीतियों की स्पष्ट पुष्टि करता है।

भव्य रसायन योजना: तीन विशेष पार्क

जुलाई 2026 में मंजूर की गई भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (भव्य रसायन) के तहत देश में तीन विशेष केमिकल पार्क स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक पार्क का क्षेत्रफल कम से कम 8 वर्ग किलोमीटर (लगभग 2,000 एकड़) होगा। केंद्र सरकार हर पार्क के लिए ₹1,000 करोड़ तक की सहायता देगी, और संबंधित राज्य सरकार को कम से कम ₹500 करोड़ का योगदान करना होगा।

इस योजना का कुल वित्तीय प्रावधान ₹3,030 करोड़ है — जिसमें ₹3,000 करोड़ बुनियादी ढाँचे और सामान्य सुविधाओं के लिए और ₹30 करोड़ प्रशासनिक खर्चों के लिए रखे गए हैं। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पाँच वर्षों के लिए लागू रहेगी।

आरडीआई योजना: ₹1 लाख करोड़ का नवाचार कोष

नवंबर 2025 में शुरू की गई अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना के लिए ₹1 लाख करोड़ का विशेष कोष बनाया गया है। इस योजना का उद्देश्य निजी क्षेत्र के अनुसंधान और नवाचार निवेश को प्रोत्साहित करना है। यह दीर्घकालिक वित्तपोषण और पुनर्वित्त सुविधा प्रदान करती है, जिससे उन्नत तकनीकों को अपनाने, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और महत्वपूर्ण उभरती प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिलेगी।

उद्योग का व्यापक आधार

फैक्टशीट के अनुसार, इस समय इस क्षेत्र में लगभग 13,000 बड़े उद्योग और 4.45 लाख सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सक्रिय हैं। यह व्यापक औद्योगिक आधार इस क्षेत्र को केवल निर्यात केंद्र नहीं, बल्कि घरेलू रोज़गार और मूल्य सृजन का एक बड़ा स्रोत भी बनाता है। सरकार का लक्ष्य समर्पित केमिकल पार्क और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में बढ़ती भागीदारी के ज़रिये इस क्षमता को और विस्तार देना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या तीन केमिकल पार्क और एक आरडीआई कोष उस संरचनात्मक बदलाव के लिए पर्याप्त हैं जो वैश्विक मूल्य शृंखला में प्रवेश के लिए ज़रूरी है। भारत दशकों से विशेष रसायनों में चीन के मुकाबले पिछड़ता रहा है — न केवल नीति के कारण, बल्कि लॉजिस्टिक्स लागत, कच्चे माल की उपलब्धता और कुशल जनशक्ति की कमी के कारण भी। एफडीआई के दोगुने होने का आँकड़ा उत्साहजनक है, पर जब तक पार्कों का आवंटन, राज्यों की भागीदारी और उत्पादन मील के पत्थर पारदर्शी रूप से सार्वजनिक नहीं किए जाते, यह लक्ष्य एक फैक्टशीट की सुर्खी बनकर रह सकता है।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग 2040 तक $1 ट्रिलियन कैसे बनेगा?
केंद्र सरकार की फैक्टशीट के अनुसार, 100% एफडीआई की अनुमति, विशेष केमिकल पार्क, आरडीआई कोष और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में बढ़ती भागीदारी इस लक्ष्य की नींव हैं। उद्योग का मौजूदा आकार $220 अरब है और 2030 तक $300 अरब का मध्यवर्ती लक्ष्य रखा गया है।
भव्य रसायन योजना क्या है और इसका बजट कितना है?
भव्य रसायन (भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन) जुलाई 2026 में स्वीकृत योजना है, जिसके तहत तीन विशेष केमिकल पार्क बनाए जाएंगे। इसका कुल वित्तीय प्रावधान ₹3,030 करोड़ है और यह 2026-27 से 2030-31 तक पाँच वर्षों के लिए लागू रहेगी।
केमिकल पार्क में केंद्र और राज्य सरकार का योगदान क्या होगा?
केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के लिए ₹1,000 करोड़ तक की सहायता देगी, जबकि संबंधित राज्य सरकार को कम से कम ₹500 करोड़ का योगदान देना अनिवार्य होगा। प्रत्येक पार्क का न्यूनतम क्षेत्रफल 8 वर्ग किलोमीटर (लगभग 2,000 एकड़) निर्धारित है।
भारत में रसायन क्षेत्र में एफडीआई की स्थिति क्या है?
2014 से 2026 के बीच रसायन क्षेत्र में ₹1,04,895 करोड़ का एफडीआई आया, जो 2004-2014 के ₹45,240 करोड़ से दोगुने से अधिक है। अधिकांश रसायन उपक्षेत्रों में 100% एफडीआई स्वचालित मार्ग के तहत अनुमत है।
भारत वैश्विक रसायन उद्योग में किस स्थान पर है?
भारत वर्तमान में दुनिया का छठा सबसे बड़ा रसायन उत्पादक और एशिया का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है। डाई निर्माण और निर्यात में देश दूसरे स्थान पर है, जबकि कृषि रसायन निर्यात में तीसरे स्थान पर।
राष्ट्र प्रेस
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