भारत का केमिकल उद्योग 2030 तक $300 अरब, 2040 तक $1 ट्रिलियन: सरकारी फैक्टशीट
सारांश
मुख्य बातें
भारत का रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग, जो फिलहाल लगभग $220 अरब का है, 2030 तक $300 अरब और 2040 तक $1 ट्रिलियन के स्तर तक पहुँच सकता है। केंद्र सरकार द्वारा 7 नवंबर 2026 को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट में यह अनुमान सामने आया है। इस दस्तावेज़ के अनुसार, यह क्षेत्र भारत की औद्योगिक और विनिर्माण वृद्धि का एक निर्णायक स्तंभ बनता जा रहा है।
वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति
फैक्टशीट के मुताबिक, भारत इस समय दुनिया का छठा सबसे बड़ा रसायन उत्पादक और एशिया का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है। इस क्षेत्र के उत्पाद औषधि, वस्त्र, निर्माण, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता वस्तुओं सहित दर्जनों उद्योगों की रीढ़ हैं। विशेष रसायनों में भी भारत की स्थिति उल्लेखनीय है — देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डाई निर्माता और निर्यातक है, जबकि कृषि रसायनों के निर्यात में तीसरे स्थान पर है।
उत्पादन में उछाल और एफडीआई की रफ्तार
प्रमुख रसायनों और पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उत्पादन 2015-16 के 45,638 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर 2024-25 में 58,617 हजार मीट्रिक टन पर पहुँच गया। यह वृद्धि उत्पादन क्षमता विस्तार, विशेषीकृत विनिर्माण हब के उभार और बुनियादी ढाँचे में सुधार का परिणाम बताई जा रही है।
सरकार ने अधिकांश रसायन क्षेत्रों में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) स्वचालित मार्ग के तहत खुला रखा है। इसका असर भी दिखता है — 2014 से 2026 के बीच इस क्षेत्र में ₹1,04,895 करोड़ का एफडीआई आया, जो 2004 से 2014 के बीच प्राप्त ₹45,240 करोड़ से दोगुने से भी ज़्यादा है। यह आँकड़ा क्षेत्र की निवेश-अनुकूल नीतियों की स्पष्ट पुष्टि करता है।
भव्य रसायन योजना: तीन विशेष पार्क
जुलाई 2026 में मंजूर की गई भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (भव्य रसायन) के तहत देश में तीन विशेष केमिकल पार्क स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक पार्क का क्षेत्रफल कम से कम 8 वर्ग किलोमीटर (लगभग 2,000 एकड़) होगा। केंद्र सरकार हर पार्क के लिए ₹1,000 करोड़ तक की सहायता देगी, और संबंधित राज्य सरकार को कम से कम ₹500 करोड़ का योगदान करना होगा।
इस योजना का कुल वित्तीय प्रावधान ₹3,030 करोड़ है — जिसमें ₹3,000 करोड़ बुनियादी ढाँचे और सामान्य सुविधाओं के लिए और ₹30 करोड़ प्रशासनिक खर्चों के लिए रखे गए हैं। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पाँच वर्षों के लिए लागू रहेगी।
आरडीआई योजना: ₹1 लाख करोड़ का नवाचार कोष
नवंबर 2025 में शुरू की गई अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना के लिए ₹1 लाख करोड़ का विशेष कोष बनाया गया है। इस योजना का उद्देश्य निजी क्षेत्र के अनुसंधान और नवाचार निवेश को प्रोत्साहित करना है। यह दीर्घकालिक वित्तपोषण और पुनर्वित्त सुविधा प्रदान करती है, जिससे उन्नत तकनीकों को अपनाने, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और महत्वपूर्ण उभरती प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिलेगी।
उद्योग का व्यापक आधार
फैक्टशीट के अनुसार, इस समय इस क्षेत्र में लगभग 13,000 बड़े उद्योग और 4.45 लाख सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सक्रिय हैं। यह व्यापक औद्योगिक आधार इस क्षेत्र को केवल निर्यात केंद्र नहीं, बल्कि घरेलू रोज़गार और मूल्य सृजन का एक बड़ा स्रोत भी बनाता है। सरकार का लक्ष्य समर्पित केमिकल पार्क और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में बढ़ती भागीदारी के ज़रिये इस क्षमता को और विस्तार देना है।