हूती हमलों पर भारत का कड़ा विरोध, UNSC में सऊदी अरब के साथ एकजुटता; भारतीय नागरिक की मौत
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने 16 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के बार-बार हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की और सभी पक्षों से संयम बरतने तथा तनाव कम करने की अपील की। इन हमलों में हैदराबाद के आईटी इंजीनियर मोहम्मद यूसुफ अली की रियाद हवाई अड्डे पर मौत हो जाने से यह मामला भारत के लिए और भी संवेदनशील हो गया है।
UNSC में भारत का पक्ष
पी. हरीश ने मध्य पूर्व की स्थिति पर आयोजित तिमाही खुली बहस के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा के मामले में भारत वहाँ की सरकार और जनता के साथ पूरी मज़बूती से खड़ा है। उन्होंने कहा, 'क्षेत्र में बढ़ता तनाव बेहद चिंताजनक है और मौजूदा हालात अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं।' हरीश ने किसी संगठन का नाम लिए बिना सऊदी अरब के नागरिक ढाँचे पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की।
भारतीय नागरिक की मौत
हैदराबाद निवासी आईटी इंजीनियर मोहम्मद यूसुफ अली की रियाद हवाई अड्डे पर हुए हमले में मृत्यु हो गई। वे इस्लाम के एक पवित्र स्थल की यात्रा पर गए हुए थे। हरीश ने UNSC में इस जानकारी को सार्वजनिक करते हुए कहा कि इन हमलों में कई लोगों की जान गई है, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। यह घटना उस व्यापक खतरे की प्रत्यक्ष अनुभूति है जो हूती हमले भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए उत्पन्न कर रहे हैं।
समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर चिंता
भारत ने समुद्री जहाजों और नाविकों पर हो रहे हमलों की भी निंदा की, जिनमें भारतीय नागरिक शामिल हैं। हरीश ने जोर देकर कहा कि बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट और दक्षिणी लाल सागर की सुरक्षा पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण इन समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखना वैश्विक हित में है। गौरतलब है कि लाल सागर मार्ग से भारत का अरबों डॉलर का व्यापार गुज़रता है।
यमन संघर्ष और हूती विद्रोहियों की पृष्ठभूमि
हूती विद्रोही यमन का एक शक्तिशाली सशस्त्र समूह है जिसे ईरान का समर्थन प्राप्त माना जाता है। यह समूह यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के विरुद्ध लड़ रहा है और सऊदी अरब पर नियमित हमले करता रहा है, क्योंकि सऊदी अरब उस सरकार का समर्थन करता है। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व पहले से ही कई मोर्चों पर अस्थिरता का सामना कर रहा है और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
यमन की संप्रभुता पर भारत का रुख
भारत ने यमन की एकता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। हरीश ने कहा, 'भारत यमन गणराज्य की एकता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराता है और उसके आंतरिक मामलों में किसी भी तरह के हस्तक्षेप का विरोध करता है।' भारत की यह स्थिति उसकी परंपरागत 'संप्रभुता का सम्मान' नीति के अनुरूप है, लेकिन एक भारतीय नागरिक की मौत के बाद इस बयान का कूटनीतिक वज़न और बढ़ गया है।