भारत का डॉप्लर वेदर रडार नेटवर्क 14 से बढ़कर 50 हुआ, 87% देश कवर: डॉ. जितेंद्र सिंह
सारांश
भारत का मौसम निगरानी तंत्र एक दशक में कायापलट हो गया है। DWR नेटवर्क 14 से 50 तक पहुँचा, 87% देश कवर हुआ और मिशन मौसम के तहत 50 और रडार की योजना है। यह सिर्फ बुनियादी ढाँचे की उपलब्धि नहीं — यह आपदा प्रबंधन और आम नागरिक की दिनचर्या दोनों को बदल रहा है।
मुख्य बातें
जितेंद्र सिंह ने 29 अप्रैल 2026 को IMD मुख्यालय, नई दिल्ली में DWR नेटवर्क विस्तार की जानकारी दी।
भारत के डॉप्लर वेदर रडार की संख्या 2014 के बाद से 14 से बढ़कर 50 हो गई है — 250 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि।
नेटवर्क अब देश के 87 प्रतिशत से अधिक भूभाग को कवर करता है।
मिशन मौसम के तहत आने वाले समय में 50 और रडार स्थापित किए जाएंगे।
IMD अब बारिश की तीव्रता, ओलावृष्टि की संभावना और बारिश की बूंदों के आकार तक का अनुमान लगाने में सक्षम है।
बेहतर मौसम भविष्यवाणी क्षमता का लाभ पड़ोसी देशों को भी मिल रहा है।
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को कहा कि भारत ने 2014 के बाद से अपने डॉप्लर वेदर रडार (DWR) नेटवर्क में 250 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की है — रडार इकाइयों की संख्या 14 से बढ़कर 50 हो गई है। नई दिल्ली स्थित भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) मुख्यालय में एक सेल्फी प्वाइंट के उद्घाटन के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि इस विस्तार से देश के 87 प्रतिशत से अधिक भूभाग को रडार कवरेज मिल रही है, जिससे चक्रवात, भारी वर्षा और आंधी-तूफान की भविष्यवाणी पहले से कहीं अधिक सटीक हो गई है।
विस्तार की मुख्य उपलब्धियाँ
डॉ. सिंह ने कहा,
संपादकीय दृष्टिकोण
लेकिन असली कसौटी यह है कि यह क्षमता आपदा में कितनी जल्दी और कितनी सटीक चेतावनी में तब्दील होती है। गौरतलब है कि भारत में बाढ़ और चक्रवात से होने वाली मौतें तब भी होती हैं जब पूर्वानुमान सटीक होता है — क्योंकि अंतिम-छोर तक सूचना पहुँचाने की व्यवस्था अभी भी कमज़ोर है। मिशन मौसम के तहत 50 और रडार की योजना महत्वाकांक्षी है, लेकिन बिना प्रशिक्षित जनशक्ति और स्थानीय आपदा प्रबंधन तंत्र से एकीकरण के, ये रडार अपनी पूरी क्षमता नहीं दिखा पाएंगे।
RashtraPress
2 अगस्त 2026
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत में अभी कितने डॉप्लर वेदर रडार हैं?
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, भारत में अभी 50 डॉप्लर वेदर रडार (DWR) हैं, जो 2014 में केवल 14 थे। यह 250 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है।
मिशन मौसम क्या है और इसके तहत क्या होगा?
मिशन मौसम भारत सरकार की मौसम सेवाओं को उन्नत करने की योजना है। इसके तहत मौजूदा 50 DWR के अलावा 50 और रडार स्थापित किए जाएंगे, जिससे मौसम पूर्वानुमान की सटीकता और कवरेज में और सुधार होगा।
डॉप्लर वेदर रडार से मौसम भविष्यवाणी कैसे बेहतर होती है?
डॉप्लर वेदर रडार से बारिश की तीव्रता, बारिश का प्रकार, ओलावृष्टि की संभावना और बारिश की बूंदों के आकार तक का अनुमान लगाया जा सकता है। इससे चक्रवात, भारी वर्षा और आंधी-तूफान की भविष्यवाणी अधिक सटीक हो जाती है।
DWR नेटवर्क से पड़ोसी देशों को कैसे फायदा होता है?
डॉ. सिंह के अनुसार, भारत की बेहतर मौसम भविष्यवाणी क्षमता का लाभ पड़ोसी देशों को भी मिल रहा है, जिससे क्षेत्रीय मौसम सहयोग मजबूत हो रहा है। हालाँकि इस सहयोग के विस्तृत ब्यौरे का उल्लेख नहीं किया गया।
IMD के DWR नेटवर्क से आम नागरिकों को क्या फायदा है?
डॉ. सिंह ने कहा कि अब लोगों द्वारा घर से निकलने से पहले मोबाइल पर मौसम की जानकारी देखना आम बात हो गई है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से मौसम पूर्वानुमान की सटीकता, पहुँच और भरोसे में सुधार हुआ है।