पीयूष गोयल की बर्लिन यात्रा: भारत-जर्मनी ने व्यापार व निवेश बढ़ाने पर की उच्चस्तरीय चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 23 अक्टूबर 2026 को बर्लिन में उच्चस्तरीय बैठकों की एक श्रृंखला में हिस्सा लिया, जिसमें भारत-जर्मनी द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग को नई गति देने पर विचार-विमर्श हुआ। इन बैठकों में भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को ठोस व्यावसायिक अवसरों में बदलने की संभावनाएँ भी प्रमुखता से उठाई गईं। गोयल की यह यात्रा भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को प्रौद्योगिकी, व्यापार और आपूर्ति शृंखला जैसे क्षेत्रों में और सुदृढ़ करने के जारी प्रयासों का हिस्सा है।
मुख्य घटनाक्रम
गोयल और जर्मनी की संघीय आर्थिक मामलों एवं ऊर्जा मंत्री कैथरीना रीशे ने संयुक्त रूप से बर्लिन में जर्मन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (DGAP) के इंडिया सेंटर का उद्घाटन किया। इस केंद्र का उद्देश्य भारत-जर्मनी संबंधों पर नीतिगत शोध और संरचित संवाद को बढ़ावा देना है।
दोनों मंत्रियों ने DGAP और जर्मन बिजनेस की एशिया-प्रशांत समिति (APA) के सहयोग से आयोजित भारत-जर्मनी बिजनेस राउंडटेबल की सह-अध्यक्षता भी की, जिसमें जर्मनी की प्रमुख कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और कारोबारी नेता उपस्थित रहे।
भारत-EU FTA पर केंद्रित चर्चा
आधिकारिक बयान के अनुसार, राउंडटेबल के बाद हुई विस्तृत चर्चा में प्रस्तावित भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते को वास्तविक व्यापार और निवेश अवसरों में परिणत करने पर विशेष जोर दिया गया। गोयल ने अपने संबोधन में विकास की गति तेज करने और व्यापार के एक नए युग की शुरुआत की बात कही, जबकि रीशे ने FTA को औद्योगिक क्षेत्र में व्यावहारिक रूप देने पर अपने विचार साझा किए।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार वार्ता वर्षों से चल रही है और कई दौरों के बाद भी अंतिम समझौता अभी बाकी है। जर्मनी यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते इस वार्ता में निर्णायक भूमिका निभाता है।
बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में भागीदारी
'बर्लिन ग्लोबल डायलॉग' में गोयल ने 'नया युग, नए गठबंधन: तीसरा रास्ता?' शीर्षक वाली पैनल चर्चा में हिस्सा लिया। इस चर्चा में जर्मन चांसलर के निवेश मामलों के व्यक्तिगत प्रतिनिधि मार्टिन ब्लेसिंग, सिंगापुर के मानव संसाधन मंत्री डॉ. टैन सी लेंग और मार्सेगाग्लिया स्टील की अध्यक्ष एवं CEO एम्मा मार्सेगाग्लिया भी शामिल हुईं।
गोयल ने अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों में आपसी विश्वास, एक-दूसरे की आर्थिक क्षमताओं के पूरक होने और मज़बूत एवं लचीली आपूर्ति शृंखलाओं के महत्व पर विशेष बल दिया।
100 भारतीय कंपनियों का प्रतिनिधिमंडल
गोयल की जर्मनी और नीदरलैंड की इस यात्रा में लगभग 100 भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल उनके साथ है। यह आँकड़ा इस यात्रा की व्यावसायिक महत्वाकांक्षा को रेखांकित करता है — यह केवल राजनयिक औपचारिकता नहीं, बल्कि सक्रिय निवेश-आकर्षण अभियान है।
गौरतलब है कि जर्मनी पहले से ही भारत के शीर्ष यूरोपीय व्यापारिक सहयोगियों में से एक है और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग में प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल, रासायनिक और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र अग्रणी रहे हैं। आने वाले महीनों में इन बैठकों के ठोस परिणाम सामने आने की उम्मीद है।