भारत में ऑफिस स्पेस मांग Q3 2026 में 26% उछली, हैदराबाद-बेंगलुरु अग्रणी
सारांश
मुख्य बातें
भारत के शीर्ष आठ प्रमुख शहरों में ऑफिस स्पेस की मांग जुलाई-सितंबर 2026 (तीसरी तिमाही) के दौरान तिमाही आधार पर 26 प्रतिशत बढ़कर 14.1 मिलियन स्क्वायर फीट पर पहुँच गई। रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी कुशमैन एंड वेकफील्ड की 10 अक्टूबर 2026 को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। यह वृद्धि मजबूत लीजिंग गतिविधियों और नई ऑफिस आपूर्ति में बढ़ोतरी के संयुक्त प्रभाव से संभव हुई।
मुख्य आँकड़े और बाज़ार का रुझान
रिपोर्ट के अनुसार, हालाँकि तिमाही आधार पर वृद्धि प्रभावशाली रही, लेकिन कुल शुद्ध अवशोषण (नेट एब्सॉर्प्शन) में सालाना आधार पर 18 प्रतिशत की नरमी दर्ज की गई। विश्लेषकों के अनुसार इसकी मुख्य वजह 2025 की तीसरी तिमाही का असाधारण रूप से ऊँचा आधार है, जिससे सीधी तुलना में गिरावट स्वाभाविक दिखती है।
वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक देश के शीर्ष आठ शहरों में कुल ऑफिस मांग 36.7 मिलियन स्क्वायर फीट रही है। इसी अवधि में ग्रॉस लीजिंग वॉल्यूम (जीएलवी) करीब 22 मिलियन स्क्वायर फीट रहा, जो तिमाही आधार पर 3 प्रतिशत अधिक है।
शहरवार प्रदर्शन: हैदराबाद शीर्ष पर, बेंगलुरु दूसरे स्थान पर
शहरों के स्तर पर देखें तो हैदराबाद ने इस तिमाही में सबसे अधिक 4.1 मिलियन स्क्वायर फीट की ऑफिस मांग दर्ज की, जो राष्ट्रीय कुल का करीब 29 प्रतिशत है। बेंगलुरु 4 मिलियन स्क्वायर फीट की मांग के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
यह ऐसे समय में आया है जब दोनों शहर वैश्विक प्रौद्योगिकी और वित्तीय कंपनियों के लिए भारत में प्रमुख परिचालन केंद्र बनते जा रहे हैं। गौरतलब है कि पिछली कई तिमाहियों से बेंगलुरु और हैदराबाद मिलकर राष्ट्रीय ऑफिस मांग का आधे से अधिक हिस्सा अवशोषित कर रहे हैं।
जीसीसी की निर्णायक भूमिका
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) इस वृद्धि के सबसे बड़े चालक बनकर उभरे हैं। Q3 2026 में जीसीसी ने कुल 9.1 मिलियन स्क्वायर फीट स्पेस लिया, जो तिमाही के कुल जीएलवी का 42 प्रतिशत है। बेंगलुरु और पुणे में जीसीसी की उपस्थिति विशेष रूप से प्रबल रही — इन दोनों बाज़ारों में कुल लीजिंग गतिविधियों में जीसीसी की हिस्सेदारी लगभग 65 प्रतिशत रही।
कुशमैन एंड वेकफील्ड के इंडिया, एसईए, एमईए और एपीएसी ऑफिस एवं रिटेल के चीफ एग्जीक्यूटिव अंशुल जैन ने कहा, 'इस तेजी में जीसीसी की भूमिका अहम रही है, क्योंकि ग्लोबल कंपनियाँ भारत में अपनी मौजूदगी और क्षमताएँ लगातार बढ़ा रही हैं। इस मांग के पीछे कुशल लोगों की बड़ी संख्या, लागत के मामले में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता और ग्लोबल बिजनेस रणनीतियों में भारत का बढ़ता महत्व जैसे कारण हैं।'
सेक्टरवार विश्लेषण: बीएफएसआई अग्रणी, आईटी-बीपीएम दूसरे स्थान पर
सेक्टर के नज़रिए से बीएफएसआई (बैंकिंग, वित्तीय सेवाएँ और बीमा) इस तिमाही में सबसे अधिक मांग वाला क्षेत्र रहा, जिसकी कुल लीजिंग में 24 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। इसके बाद आईटी-बीपीएम क्षेत्र ने 22 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरा स्थान हासिल किया।
यह बदलाव उल्लेखनीय है — परंपरागत रूप से आईटी-बीपीएम भारतीय ऑफिस बाज़ार का सबसे बड़ा उपभोक्ता रहा है, लेकिन अब बीएफएसआई क्षेत्र की बढ़ती मांग संरचनात्मक विविधीकरण का संकेत देती है।
आगे की संभावनाएँ
अंशुल जैन ने आगे कहा, 'जैसे-जैसे कंपनियाँ अपने पोर्टफोलियो को लेकर दीर्घकालिक नज़रिया अपना रही हैं, हमें भारत के ऑफिस मार्केट में लगातार वृद्धि की उम्मीद है।' वर्ष 2026 की शेष तिमाही में जीसीसी विस्तार और बीएफएसआई क्षेत्र की मांग इस गति को बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।