बिजली मांग का ऐतिहासिक रिकॉर्ड: भारत में पीक डिमांड 256.11 गीगावॉट के पार
सारांश
Key Takeaways
- 26 अप्रैल 2025 को भारत में बिजली की अधिकतम मांग 256.11 गीगावॉट के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंची।
- यह आंकड़ा 25 अप्रैल के 252.07 गीगावॉट के पिछले रिकॉर्ड को महज 24 घंटे में तोड़ता है।
- विद्युत मंत्रालय ने इस गर्मी में पीक डिमांड 270 गीगावॉट तक पहुंचने का अनुमान जताया है।
- IMD ने अप्रैल से जून 2025 तक भीषण लू की चेतावनी दी है, कई राज्यों में तापमान 45°C से अधिक हो सकता है।
- हरियाणा, UP, बिहार, राजस्थान, MP, गुजरात, महाराष्ट्र समेत 12 राज्यों में भीषण गर्मी का अनुमान।
- बिजली उत्पादन पर्याप्त रहने के कारण कोई बिजली कटौती नहीं हुई, लेकिन आगे की स्थिति पर नज़र बनाए रखना ज़रूरी है।
नई दिल्ली, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत में भीषण गर्मी के बीच शनिवार, 26 अप्रैल 2025 को देश की बिजली की अधिकतम मांग ने नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्थापित कर दिया। विद्युत मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, पीक पावर डिमांड 256.11 गीगावॉट तक पहुंच गई, जो अब तक की सर्वाधिक बिजली खपत है। घरेलू और व्यावसायिक दोनों क्षेत्रों में एयर कंडीशनर व कूलिंग उपकरणों के बढ़ते उपयोग को इस उछाल की प्रमुख वजह बताया जा रहा है।
कैसे टूटा पिछला रिकॉर्ड?
इससे पहले शुक्रवार, 25 अप्रैल को देश में बिजली की अधिकतम मांग 252.07 गीगावॉट दर्ज की गई थी, जो उस समय तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा था। महज 24 घंटे के भीतर यह रिकॉर्ड टूट गया और मांग 4 गीगावॉट से अधिक बढ़ गई।
वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि देश में बिजली उत्पादन इस बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त रहा, इसलिए किसी भी राज्य में बिजली कटौती की नौबत नहीं आई। यह राहत की बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले वर्षों में गर्मी के दौरान कई राज्यों को लोडशेडिंग का सामना करना पड़ा था।
विद्युत मंत्रालय का अनुमान और आगे की चुनौती
विद्युत मंत्रालय ने पहले ही अनुमान जारी किया था कि इस गर्मी के मौसम में देश की पीक पावर डिमांड 270 गीगावॉट तक पहुंच सकती है। अब जबकि अप्रैल के अंत में ही 256 गीगावॉट का आंकड़ा छू लिया गया है, मई-जून में स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल के मध्य से तापमान में लगातार हो रही वृद्धि ने बिजली की खपत को तेज़ी से बढ़ाया है। इससे पहले अप्रैल की शुरुआत में बेमौसम बारिश के कारण तापमान अपेक्षाकृत कम था, जिससे बिजली की मांग भी नियंत्रित रही थी। लेकिन जैसे ही बारिश थमी और तापमान चढ़ा, खपत में भारी उछाल आया।
मौसम विभाग की चेतावनी और लू का खतरा
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, देश के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से 5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक ऊपर चला गया है। IMD ने अप्रैल से जून 2025 तक पूरे देश में भीषण लू चलने की चेतावनी जारी की है।
उत्तर भारत के गंगा के मैदानी इलाकों, मध्य भारत और पूर्वी तटीय राज्यों में सामान्य से अधिक लू की आशंका जताई गई है। कई क्षेत्रों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है और उच्च आर्द्रता मिलकर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश में अप्रैल, मई और जून में भीषण गर्मी का अनुमान है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और केरल के कुछ हिस्सों में अप्रैल के अंत से ही लू की स्थिति बन चुकी है।
स्वास्थ्य पर असर और सावधानियां
अत्यधिक गर्मी से हीट एग्जॉस्शन और हीट स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है। यह खतरा विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और बाहर काम करने वाले मजदूरों के लिए अधिक गंभीर है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे प्यास न लगने पर भी पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर खुद को हाइड्रेटेड रखें। दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें और हल्के रंग के ढीले-ढाले कपड़े पहनें जो गर्मी को परावर्तित करें तथा हवा का आवागमन बनाए रखें।
ऊर्जा क्षेत्र पर व्यापक असर और आगे की राह
गौरतलब है कि भारत पिछले कुछ वर्षों से गर्मियों में बिजली की मांग के नए रिकॉर्ड बनाता रहा है। 2023 में पहली बार पीक डिमांड 229 गीगावॉट को पार किया था, 2024 में यह 250 गीगावॉट के करीब पहुंची थी, और अब 2025 में 256 गीगावॉट का आंकड़ा छू लिया गया है। यह प्रवृत्ति स्पष्ट करती है कि जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी की तीव्रता और बिजली की मांग दोनों तेज़ी से बढ़ रही हैं।
आने वाले हफ्तों में यदि तापमान और बढ़ा तो 270 गीगावॉट का लक्ष्य भी पार हो सकता है। ऐसे में सरकार और बिजली वितरण कंपनियों के लिए यह ज़रूरी हो जाएगा कि वे आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत बनाए रखें और किसी भी संकट से निपटने के लिए पहले से तैयार रहें।