भारत-कतर छठी एफओसी बैठक: व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा पर बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
भारत और कतर ने 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित छठी विदेश कार्यालय परामर्श (एफओसी) बैठक में दोनों देशों के बीच बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी की विस्तृत समीक्षा की। इस उच्चस्तरीय बैठक में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, सुरक्षा, कांसुलर मामले, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग सहित कई अहम क्षेत्रों पर विचार-विमर्श हुआ।
बैठक का मुख्य घटनाक्रम
बैठक की सह-अध्यक्षता भारतीय पक्ष की ओर से श्रीप्रिया रंगनाथन और कतर की ओर से विदेश मंत्रालय के महासचिव डॉ. अहमद हसन अल-हमादी ने की। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने के ठोस उपायों पर भी चर्चा की।
बैठक में कतर में भारत के राजदूत डॉ. के. श्रीकर रेड्डी भी उपस्थित रहे। दोनों पक्षों ने आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
राजदूत रेड्डी की कतर में सक्रिय भूमिका
डॉ. के. श्रीकर रेड्डी 5 सितंबर 2026 को दोहा पहुँचे थे, जहाँ कार्यवाहक राजदूत संदीप कुमार और कतर के प्रोटोकॉल विभाग के निदेशक इब्राहिम यूसुफ फखरो ने उनका औपचारिक स्वागत किया।
राजदूत रेड्डी ने 10 सितंबर को कतर के विदेश राज्य मंत्री सुल्तान बिन साद अल-मुरैखी को अपने प्रत्यय-पत्र की प्रति प्रस्तुत की और भारत-कतर रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के तरीकों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। भारतीय दूतावास ने एक्स पर इस मुलाकात के बारे में बताया कि राजदूत ने भारतीय नेतृत्व की ओर से अभिवादन भी पहुँचाया।
गौरतलब है कि इससे पहले राजदूत रेड्डी ने कतर के विदेश मंत्रालय के एशियाई मामलों के निदेशक से भी मुलाकात की थी, जिसमें दोनों देशों के बीच बहुआयामी साझेदारी को और सुदृढ़ करने पर विशेष ज़ोर दिया गया था।
भारत-कतर संबंधों का महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में भारत की कूटनीतिक सक्रियता लगातार बढ़ रही है। कतर भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत है — भारत बड़े पैमाने पर कतर से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) आयात करता है। इसके अलावा कतर में भारतीय प्रवासी समुदाय की बड़ी उपस्थिति इस संबंध को और भी अहम बनाती है।
आलोचकों का कहना है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक और श्रम-संबंधी मुद्दों पर अभी और काम की ज़रूरत है, लेकिन कूटनीतिक जानकारों के अनुसार एफओसी जैसे संस्थागत मंच दीर्घकालिक संबंध निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर संवाद
एफओसी बैठक में केवल द्विपक्षीय मसले ही नहीं, बल्कि आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय और बहुपक्षीय विषयों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। यह मध्य-पूर्व में बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक तालमेल का संकेत है।
आगे क्या
इस एफओसी बैठक के नतीजे आने वाले महीनों में भारत-कतर सहयोग की दिशा तय करेंगे। ऊर्जा, निवेश और कांसुलर सेवाओं के क्षेत्र में ठोस पहलों की उम्मीद जताई जा रही है। दोनों देशों के बीच यह संस्थागत संवाद मजबूत द्विपक्षीय ढाँचे की नींव को और पक्का करता है।