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भारत का सौर कृषि मॉडल अफ्रीका के लिए बन सकता है रोल मॉडल: PM मोदी का एक्स पर संदेश

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भारत का सौर कृषि मॉडल अफ्रीका के लिए बन सकता है रोल मॉडल: PM मोदी का एक्स पर संदेश

सारांश

PM मोदी ने एक्स पर केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी का लेख साझा करते हुए कहा कि भारत का सौर ऊर्जा आधारित कृषि मॉडल अफ्रीका के लिए एक प्रभावी और दोहराने योग्य समाधान है। पीएम-कुसुम और इंटरनेशनल सोलर अलायंस जैसी पहलें इस दिशा में पहले से काम कर रही हैं।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 17 जून 2026 को एक्स पर कहा कि भारत का सौर कृषि मॉडल अफ्रीका के लिए बड़े पैमाने पर अपनाया जा सकने वाला उदाहरण है।
पीएम-कुसुम और इंटरनेशनल सोलर अलायंस को सौर ऊर्जा आधारित कृषि के विस्तार में महत्वपूर्ण पहल बताया गया।
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा — भारत की सौर क्रांति देश की सीमाओं से आगे नई राहें खोल रही है।
भारत का अनुभव उन देशों के लिए प्रासंगिक है जो ऊर्जा उपलब्धता , जलवायु परिवर्तन और खाद्य उत्पादन की चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
इंटरनेशनल सोलर अलायंस में 120 से अधिक देश सदस्य हैं, जिनमें अनेक अफ्रीकी राष्ट्र शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 17 जून 2026 को कहा कि स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ कृषि के क्षेत्र में भारत जो मॉडल विकसित कर रहा है, वह अफ्रीकी देशों के लिए बड़े पैमाने पर अपनाया जा सकने वाला समाधान बन सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी का एक लेख साझा करते हुए यह बात कही।

मोदी का एक्स पर संदेश

अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, 'सौर ऊर्जा एक परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में उभर रही है। कृषि के लिए स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग का भारत का मॉडल अफ्रीका के लिए बड़े पैमाने पर अपनाया जा सकने वाला उदाहरण है, जो साझा समृद्धि को मजबूत करेगा, समुदायों को सशक्त बनाएगा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा। यह हमारे किसानों और हम सभी के लिए गर्व की बात है।'

पीएम-कुसुम और इंटरनेशनल सोलर अलायंस की भूमिका

केंद्रीय मंत्री जोशी के लेख में प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (इंटरनेशनल सोलर अलायंस) को सौर ऊर्जा आधारित कृषि के विस्तार में अहम भूमिका निभाने वाली पहलों के रूप में रेखांकित किया गया है। लेख के अनुसार, इन योजनाओं ने न केवल भारतीय किसानों की आय में सुधार किया है, बल्कि पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता भी घटाई है।

अफ्रीका के लिए क्यों प्रासंगिक है यह मॉडल

लेख में कहा गया है कि सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई और कृषि प्रणालियों को सफलतापूर्वक अपनाने का भारत का अनुभव उन देशों और क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है, जो ऊर्जा उपलब्धता, जलवायु परिवर्तन और खाद्य उत्पादन जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। अफ्रीका के कई देश इन्हीं समस्याओं से ग्रस्त हैं, और भारत का अनुभव वहाँ एक व्यावहारिक मार्गदर्शक बन सकता है।

प्रल्हाद जोशी की प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी एक्स पर यही लेख साझा करते हुए कहा कि भारत की सौर क्रांति देश की सीमाओं से बहुत आगे तक नई राहें खोल रही है। उन्होंने कहा, 'भारत की सौर क्रांति अब दुनिया के कई देशों के लिए नई संभावनाओं के रास्ते तैयार कर रही है।' जोशी ने यह भी रेखांकित किया कि पीएम-कुसुम और इंटरनेशनल सोलर अलायंस के माध्यम से भारत का यह मॉडल कई देशों में खाद्य सुरक्षा मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने में योगदान दे रहा है।

आगे की दिशा

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक दक्षिण (Global South) में अपनी भूमिका को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है। गौरतलब है कि इंटरनेशनल सोलर अलायंस में 120 से अधिक देश सदस्य हैं, जिनमें अफ्रीका के कई राष्ट्र शामिल हैं। यदि भारत का सौर कृषि मॉडल अफ्रीकी देशों में सफलतापूर्वक लागू होता है, तो यह ऊर्जा कूटनीति के क्षेत्र में भारत की साख को और मजबूत कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और ऐसे में इसे अफ्रीका के लिए 'मॉडल' के रूप में प्रस्तुत करना सवाल उठाता है। असली परीक्षा यह है कि इंटरनेशनल सोलर अलायंस के ढाँचे के भीतर यह मॉडल किस हद तक व्यावहारिक रूप से स्थानांतरित हो सकता है। वैश्विक दक्षिण में नेतृत्व की भूमिका निभाने की भारत की महत्वाकांक्षा तब विश्वसनीय बनेगी, जब घरेलू क्रियान्वयन के आँकड़े भी उतने ही मज़बूत हों।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने भारत के सौर कृषि मॉडल के बारे में क्या कहा?
PM मोदी ने 17 जून 2026 को एक्स पर कहा कि कृषि के लिए स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग का भारत का मॉडल अफ्रीका के लिए बड़े पैमाने पर अपनाया जा सकने वाला उदाहरण है। उन्होंने इसे साझा समृद्धि, सामुदायिक सशक्तिकरण और खाद्य सुरक्षा के लिहाज़ से महत्वपूर्ण बताया।
पीएम-कुसुम योजना क्या है और इसका अफ्रीका से क्या संबंध है?
प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) भारत सरकार की एक योजना है जो किसानों को सौर ऊर्जा चालित पंप और सिंचाई सुविधाएँ प्रदान करती है। इस योजना के अनुभव को अफ्रीकी देशों के लिए एक व्यावहारिक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जो ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
इंटरनेशनल सोलर अलायंस में कितने देश शामिल हैं?
इंटरनेशनल सोलर अलायंस में 120 से अधिक देश सदस्य हैं, जिनमें अफ्रीका के कई राष्ट्र शामिल हैं। यह गठबंधन सौर ऊर्जा के वैश्विक विस्तार और विकासशील देशों में स्वच्छ ऊर्जा तक पहुँच बढ़ाने के लिए काम करता है।
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इस विषय पर क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने एक्स पर अपना लेख साझा करते हुए कहा कि भारत की सौर क्रांति देश की सीमाओं से बहुत आगे तक नई राहें खोल रही है। उन्होंने पीएम-कुसुम और इंटरनेशनल सोलर अलायंस को किसानों की आय बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा मजबूत करने में अहम बताया।
भारत का सौर कृषि मॉडल अफ्रीका के लिए क्यों उपयुक्त माना जा रहा है?
अफ्रीका के कई देश ऊर्जा उपलब्धता, जलवायु परिवर्तन और खाद्य उत्पादन की गंभीर चुनौतियों से जूझ रहे हैं। भारत ने सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई और कृषि प्रणालियों को सफलतापूर्वक अपनाकर यह दिखाया है कि नवीकरणीय ऊर्जा खेती की उत्पादकता बढ़ा सकती है और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता घटा सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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