भारत-स्वीडन साझेदारी: रक्षा, ग्रीन टेक और इनोवेशन में अपार संभावनाएं — SIBC सीईओ रॉबिन सुखिया
सारांश
मुख्य बातें
स्वीडन-इंडिया बिजनेस काउंसिल (SIBC) के महासचिव और सीईओ रॉबिन सुखिया ने 22 अक्टूबर 2026 को कहा कि भारत और स्वीडन के बीच रक्षा विनिर्माण, हरित प्रौद्योगिकी, नवाचार और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उनके अनुसार दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंध निरंतर प्रगाढ़ हो रहे हैं और यह साझेदारी आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयां छू सकती है।
रक्षा विनिर्माण: नाटो देशों की बढ़ती खरीद और भारत के कॉरिडोर
सुखिया ने बताया कि भारतीय कंपनियां अब स्वीडन और व्यापक यूरोपीय बाजारों को समझने के लिए सक्रिय रूप से आगे आ रही हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि नाटो देशों में रक्षा खरीद गतिविधियां तेज़ी से बढ़ रही हैं, जबकि भारत में उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर निवेश और उत्पादन के नए केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।
उनके अनुसार सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता एक सुदृढ़ औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करना है, और भारत में यह प्रक्रिया निरंतर गति पकड़ रही है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत 'मेक इन इंडिया' के तहत रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने की कोशिशों में जुटा है।
हरित ऊर्जा और जलवायु सहयोग
हरित ऊर्जा और जलवायु लक्ष्यों पर बात करते हुए सुखिया ने कहा कि भारत ने विशेष रूप से सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल इंटरनेशनल सोलर अलायंस का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मंच ने वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को नई दिशा दी है और स्वीडन भी इसका सहभागी है।
उन्होंने कहा, 'स्वीडन और भारत के बीच ऊर्जा दक्षता, हरित प्रौद्योगिकी, कार्बन कटौती और सतत औद्योगिक विकास से जुड़े कई कार्यक्रम पहले से संचालित हो रहे हैं। जलवायु परिवर्तन से निपटने और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देने में दोनों देश मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।'
भू-राजनीतिक माहौल और वैश्विक संस्थानों में भारत की भूमिका
बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य पर सुखिया ने कहा, 'भारत और स्वीडन दोनों लोकतांत्रिक मूल्यों और नियम-आधारित विश्व व्यवस्था में विश्वास रखते हैं। कुछ मुद्दों पर दृष्टिकोण भिन्न हो सकता है, लेकिन समग्र रूप से दोनों देशों की सोच काफी मेल खाती है।'
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक संस्थानों में भारत की भूमिका का विस्तार ज़रूरी है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन इस दिशा में एक अहम कदम हो सकता है।
निवेश माहौल: नीतियों से आगे प्रक्रियाओं की भविष्यवाणी ज़रूरी
भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की संभावनाओं पर सुखिया ने माना कि पिछले वर्षों में हज़ारों नियमों और प्रक्रियाओं को सरल किया जाना सकारात्मक संकेत है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि असली चुनौती नीतियों के क्रियान्वयन और अनुमोदनों की निश्चित समयसीमा को लेकर बनी हुई है।
उनके शब्दों में, 'उद्योग जगत के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज़ समय की निश्चितता होती है। यदि किसी परियोजना की मंजूरी में एक वर्ष लगेगा, तो निवेशक उसके अनुसार योजना बना सकते हैं। लेकिन मंजूरी की समयसीमा स्पष्ट न होने पर निवेश निर्णय प्रभावित होते हैं।' गौरतलब है कि वैश्विक सप्लाई चेन 'जस्ट-इन-टाइम' मॉडल पर निर्भर है, इसलिए सीमा शुल्क प्रक्रियाओं में देरी उत्पादन को सीधे नुकसान पहुंचा सकती है।
इनोवेशन और भारत-EU FTA: गेम-चेंजर की संभावना
सुखिया ने कहा कि भारत-स्वीडन सहयोग का सबसे बड़ा स्तंभ नवाचार है। स्वीडन दुनिया के सर्वाधिक नवाचारी देशों में गिना जाता है, जबकि भारत के पास विशाल प्रतिभा और कुशल मानव संसाधन का अतुलनीय आधार है। उनके अनुसार, स्वीडन की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की प्रतिभा मिलकर नए उत्पाद, नई सेवाएं और नई कंपनियां विकसित कर सकती हैं, जिससे बड़े पैमाने पर रोज़गार सृजित होगा।
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर उन्होंने इसे वैश्विक स्तर पर 'गेम-चेंजर' करार दिया। उनके अनुसार यह समझौता दुनिया की लगभग एक चौथाई अर्थव्यवस्था और करीब दो अरब लोगों को जोड़ने वाला मंच बन सकता है। FTA लागू होने के बाद कई यूरोपीय कंपनियां भारत में नए अवसर तलाशेंगी और भारतीय कंपनियों को यूरोप के विशाल बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी — जिससे व्यापार, निवेश और रोज़गार सृजन को बड़ा बल मिलेगा।