22 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत-स्वीडन साझेदारी: रक्षा, ग्रीन टेक और इनोवेशन में अपार संभावनाएं — SIBC सीईओ रॉबिन सुखिया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत-स्वीडन साझेदारी: रक्षा, ग्रीन टेक और इनोवेशन में अपार संभावनाएं — SIBC सीईओ रॉबिन सुखिया

सारांश

SIBC के सीईओ रॉबिन सुखिया के अनुसार, भारत और स्वीडन की साझेदारी अब कूटनीतिक दायरे से निकलकर रक्षा, ग्रीन टेक और इनोवेशन की ठोस ज़मीन पर खड़ी हो रही है। भारत-EU FTA को 'गेम-चेंजर' बताते हुए उन्होंने निवेश के लिए प्रक्रियाओं की पूर्वानुमेयता को सबसे बड़ी शर्त करार दिया।

मुख्य बातें

SIBC सीईओ रॉबिन सुखिया ने 22 अक्टूबर 2026 को कहा कि भारत-स्वीडन साझेदारी में रक्षा, ग्रीन टेक और इनोवेशन नए ग्रोथ इंजन बन सकते हैं।
उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर को निवेश और उत्पादन के उभरते केंद्र बताया गया।
इंटरनेशनल सोलर अलायंस का हवाला देते हुए कहा कि स्वीडन और भारत ऊर्जा दक्षता व कार्बन कटौती में मिलकर काम कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए अनुमोदनों की स्पष्ट समयसीमा को सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया।
भारत-EU FTA को दुनिया की एक चौथाई अर्थव्यवस्था और करीब दो अरब लोगों को जोड़ने वाला 'गेम-चेंजर' करार दिया।
UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन को वैश्विक संस्थानों में भारत की बढ़ती भूमिका के लिए आवश्यक बताया।

स्वीडन-इंडिया बिजनेस काउंसिल (SIBC) के महासचिव और सीईओ रॉबिन सुखिया ने 22 अक्टूबर 2026 को कहा कि भारत और स्वीडन के बीच रक्षा विनिर्माण, हरित प्रौद्योगिकी, नवाचार और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उनके अनुसार दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंध निरंतर प्रगाढ़ हो रहे हैं और यह साझेदारी आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयां छू सकती है।

रक्षा विनिर्माण: नाटो देशों की बढ़ती खरीद और भारत के कॉरिडोर

सुखिया ने बताया कि भारतीय कंपनियां अब स्वीडन और व्यापक यूरोपीय बाजारों को समझने के लिए सक्रिय रूप से आगे आ रही हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि नाटो देशों में रक्षा खरीद गतिविधियां तेज़ी से बढ़ रही हैं, जबकि भारत में उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर निवेश और उत्पादन के नए केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।

उनके अनुसार सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता एक सुदृढ़ औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करना है, और भारत में यह प्रक्रिया निरंतर गति पकड़ रही है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत 'मेक इन इंडिया' के तहत रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने की कोशिशों में जुटा है।

हरित ऊर्जा और जलवायु सहयोग

हरित ऊर्जा और जलवायु लक्ष्यों पर बात करते हुए सुखिया ने कहा कि भारत ने विशेष रूप से सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल इंटरनेशनल सोलर अलायंस का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मंच ने वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को नई दिशा दी है और स्वीडन भी इसका सहभागी है।

उन्होंने कहा, 'स्वीडन और भारत के बीच ऊर्जा दक्षता, हरित प्रौद्योगिकी, कार्बन कटौती और सतत औद्योगिक विकास से जुड़े कई कार्यक्रम पहले से संचालित हो रहे हैं। जलवायु परिवर्तन से निपटने और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देने में दोनों देश मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।'

भू-राजनीतिक माहौल और वैश्विक संस्थानों में भारत की भूमिका

बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य पर सुखिया ने कहा, 'भारत और स्वीडन दोनों लोकतांत्रिक मूल्यों और नियम-आधारित विश्व व्यवस्था में विश्वास रखते हैं। कुछ मुद्दों पर दृष्टिकोण भिन्न हो सकता है, लेकिन समग्र रूप से दोनों देशों की सोच काफी मेल खाती है।'

उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक संस्थानों में भारत की भूमिका का विस्तार ज़रूरी है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन इस दिशा में एक अहम कदम हो सकता है।

निवेश माहौल: नीतियों से आगे प्रक्रियाओं की भविष्यवाणी ज़रूरी

भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की संभावनाओं पर सुखिया ने माना कि पिछले वर्षों में हज़ारों नियमों और प्रक्रियाओं को सरल किया जाना सकारात्मक संकेत है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि असली चुनौती नीतियों के क्रियान्वयन और अनुमोदनों की निश्चित समयसीमा को लेकर बनी हुई है।

उनके शब्दों में, 'उद्योग जगत के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज़ समय की निश्चितता होती है। यदि किसी परियोजना की मंजूरी में एक वर्ष लगेगा, तो निवेशक उसके अनुसार योजना बना सकते हैं। लेकिन मंजूरी की समयसीमा स्पष्ट न होने पर निवेश निर्णय प्रभावित होते हैं।' गौरतलब है कि वैश्विक सप्लाई चेन 'जस्ट-इन-टाइम' मॉडल पर निर्भर है, इसलिए सीमा शुल्क प्रक्रियाओं में देरी उत्पादन को सीधे नुकसान पहुंचा सकती है।

इनोवेशन और भारत-EU FTA: गेम-चेंजर की संभावना

सुखिया ने कहा कि भारत-स्वीडन सहयोग का सबसे बड़ा स्तंभ नवाचार है। स्वीडन दुनिया के सर्वाधिक नवाचारी देशों में गिना जाता है, जबकि भारत के पास विशाल प्रतिभा और कुशल मानव संसाधन का अतुलनीय आधार है। उनके अनुसार, स्वीडन की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की प्रतिभा मिलकर नए उत्पाद, नई सेवाएं और नई कंपनियां विकसित कर सकती हैं, जिससे बड़े पैमाने पर रोज़गार सृजित होगा।

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर उन्होंने इसे वैश्विक स्तर पर 'गेम-चेंजर' करार दिया। उनके अनुसार यह समझौता दुनिया की लगभग एक चौथाई अर्थव्यवस्था और करीब दो अरब लोगों को जोड़ने वाला मंच बन सकता है। FTA लागू होने के बाद कई यूरोपीय कंपनियां भारत में नए अवसर तलाशेंगी और भारतीय कंपनियों को यूरोप के विशाल बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी — जिससे व्यापार, निवेश और रोज़गार सृजन को बड़ा बल मिलेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह समझौता वर्षों से वार्ता के दौर में है और बौद्धिक संपदा व श्रम मानकों पर गतिरोध अभी भी बना हुआ है। रक्षा कॉरिडोर की संभावनाएं वास्तविक हैं, पर तब तक सीमित रहेंगी जब तक भारत का सिंगल-विंडो क्लियरेंस सिस्टम कागज़ों से आगे नहीं बढ़ता।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वीडन-इंडिया बिजनेस काउंसिल (SIBC) क्या है और इसकी भूमिका क्या है?
SIBC एक द्विपक्षीय व्यापार संस्था है जो भारत और स्वीडन के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देती है। यह दोनों देशों की कंपनियों को बाजार समझने और साझेदारियां बनाने में मदद करती है।
भारत-स्वीडन रक्षा सहयोग में क्या नई संभावनाएं हैं?
SIBC सीईओ रॉबिन सुखिया के अनुसार, नाटो देशों में रक्षा खरीद तेज़ी से बढ़ रही है और उत्तर प्रदेश व तमिलनाडु के रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर संयुक्त उत्पादन के नए केंद्र बन रहे हैं। भारतीय कंपनियां अब स्वीडन और यूरोपीय बाजारों में सक्रिय रूप से प्रवेश कर रही हैं।
भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता (FTA) कितना महत्वपूर्ण है?
सुखिया ने इसे 'गेम-चेंजर' बताया है क्योंकि यह दुनिया की लगभग एक चौथाई अर्थव्यवस्था और करीब दो अरब लोगों को एक मंच पर जोड़ेगा। FTA लागू होने से यूरोपीय कंपनियों को भारत में और भारतीय कंपनियों को यूरोप के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी।
भारत में विदेशी निवेश की सबसे बड़ी बाधा क्या है?
सुखिया के अनुसार मुख्य बाधा परियोजना अनुमोदनों की स्पष्ट समयसीमा का अभाव है। उनका कहना है कि यदि मंजूरी की समयसीमा तय नहीं होती, तो निवेश निर्णय प्रभावित होते हैं और 'जस्ट-इन-टाइम' सप्लाई चेन को नुकसान पहुंचता है।
भारत-स्वीडन हरित ऊर्जा सहयोग किन क्षेत्रों पर केंद्रित है?
दोनों देशों के बीच ऊर्जा दक्षता, कार्बन कटौती, हरित प्रौद्योगिकी और सतत औद्योगिक विकास से जुड़े कार्यक्रम पहले से चल रहे हैं। इंटरनेशनल सोलर अलायंस के तहत भी दोनों देश स्वच्छ ऊर्जा सहयोग में भागीदार हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले