22 अक्टूबर 2026
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भारत-स्वीडन व्यापार 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य, एआई और टेक कॉरिडोर होंगे साझेदारी के मुख्य स्तंभ

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भारत-स्वीडन व्यापार 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य, एआई और टेक कॉरिडोर होंगे साझेदारी के मुख्य स्तंभ

सारांश

भारत और स्वीडन ने 2030 तक व्यापार-निवेश दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। एआई, 6जी और डिजिटल इनोवेशन के लिए प्रस्तावित टेक्नोलॉजी कॉरिडोर इस साझेदारी की रीढ़ बनेगा। भारत में स्वीडिश कंपनियों की संख्या एक वर्ष में 275 से 300 हुई, और 2027 में नई दिल्ली में शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है।

मुख्य बातें

भारत और स्वीडन ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार और निवेश दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है।
मई 2026 में PM मोदी की स्वीडन यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की थी।
प्रस्तावित स्वीडन-इंडिया टेक्नोलॉजी एवं एआई कॉरिडोर एआई, डिजिटल इनोवेशन और 6जी पर सहयोग को बढ़ावा देगा।
भारत में काम कर रही स्वीडिश कंपनियाँ एक वर्ष में 275 से बढ़कर 300 हो गई हैं।
2027 में भारत में द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन प्रस्तावित; 2047 तक के संबंधों का दीर्घकालिक रोडमैप तैयार होगा।

भारत और स्वीडन ने अपनी नई रणनीतिक साझेदारी के तहत वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। स्वीडन में भारत के राजदूत अनुराग भूषण ने 22 अक्टूबर 2026 को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), उभरती प्रौद्योगिकियाँ और नवाचार इस आर्थिक विस्तार के केंद्रीय चालक बनेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देश पारंपरिक व्यापारिक संबंधों से आगे बढ़कर अगली पीढ़ी की आर्थिक साझेदारी की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

रणनीतिक साझेदारी की पृष्ठभूमि

मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वीडन यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को औपचारिक रूप से रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया था। इस शिखर सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियाँ और जनसंपर्क — इन चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित एक रोडमैप अपनाया गया था। राजदूत भूषण के अनुसार, तब से दोनों सरकारें एक पाँच वर्षीय कार्ययोजना के ज़रिये राजनीतिक प्रतिबद्धताओं को ठोस कारोबारी परिणामों में बदलने पर सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।

स्वीडन-इंडिया टेक्नोलॉजी एवं एआई कॉरिडोर

दोनों देशों के बीच सबसे महत्वाकांक्षी प्रस्ताव है स्वीडन-इंडिया टेक्नोलॉजी एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉरिडोर, जो एआई, डिजिटल इनोवेशन और 6जी जैसी अत्याधुनिक तकनीकों में संयुक्त शोध, स्टार्टअप साझेदारी और सीमा-पार निवेश को बढ़ावा देगा। भूषण ने कहा, 'स्वीडन तकनीक और एआई के क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी है, जबकि भारत के पास विशाल प्रतिभा, बड़ा बाज़ार और तेज़ी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था है।' उन्होंने विशेष रूप से गोथेनबर्ग का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शहर स्वीडन के प्रौद्योगिकी और एआई उद्योग का केंद्र बन चुका है और दोनों देशों की कंपनियों, स्टार्टअप्स तथा अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग का महत्वपूर्ण हब बन सकता है।

बढ़ती कारोबारी उपस्थिति और 'मेक इन इंडिया, मेक विद स्वीडन'

भारत में काम कर रही स्वीडिश कंपनियों की संख्या एक वर्ष में लगभग 275 से बढ़कर 300 हो गई है, जो बढ़ते निवेश भरोसे का संकेत है। भूषण ने बताया कि दोनों देश 'मेक इन इंडिया, मेक विद स्वीडन' मॉडल को आगे बढ़ा रहे हैं, जिसमें स्वीडन की तकनीकी दक्षता और नवाचार को भारत की विनिर्माण शक्ति तथा विशाल घरेलू बाज़ार के साथ जोड़ा जाएगा। उन्होंने जोड़ा कि स्वीडिश कंपनियों के लिए भारत विस्तार, परीक्षण और नई तकनीकों के व्यावसायीकरण का आकर्षक गंतव्य बनता जा रहा है, क्योंकि उनका अपना घरेलू बाज़ार अपेक्षाकृत सीमित है।

आगे की योजना और 2027 का शिखर सम्मेलन

राजदूत भूषण ने बताया कि 2027 में भारत में एक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है, जो व्यापार जगत, निवेशकों और नीति-निर्माताओं को एक मंच पर लाएगा। इसके साथ ही 2047 तक दोनों देशों के संबंधों को और मज़बूत बनाने के लिए एक दीर्घकालिक रोडमैप तैयार किया जाएगा। इंडिया-स्वीडन इनोवेशन डे जैसी पहलों को भी अहम बताते हुए भूषण ने कहा कि ऐसे मंच रणनीतिक साझेदारी को वास्तविक परिणामों में बदलने का काम करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक स्तर पर अपनी तकनीक-केंद्रित कूटनीति को नई दिशा देने की कोशिश कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

6जी और स्टार्टअप सहयोग का समन्वय ठीक उस दिशा में है जहाँ भारत की तकनीकी कूटनीति जाना चाहती है। लेकिन असली कसौटी यह है कि प्रस्तावित टेक्नोलॉजी कॉरिडोर केवल घोषणाओं तक सीमित न रहे — स्वीडिश कंपनियों की संख्या एक वर्ष में महज़ 25 बढ़ी है, जो उत्साहजनक तो है लेकिन 'दोगुना व्यापार' के लक्ष्य के सापेक्ष अपर्याप्त भी। 2027 के शिखर सम्मेलन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पाँच वर्षीय कार्ययोजना में मापनीय मील के पत्थर शामिल हैं या नहीं — अन्यथा यह भी उन कूटनीतिक रोडमैपों की श्रेणी में जा सकती है जो शुभारंभ के बाद धूल खाते हैं।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-स्वीडन 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य क्या है?
दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने मई 2026 में हुई शिखर वार्ता में 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार और निवेश दोगुना करने का संकल्प लिया है। यह लक्ष्य आर्थिक सहयोग, एआई, सुरक्षा और जनसंपर्क के चार स्तंभों पर आधारित रणनीतिक साझेदारी के तहत निर्धारित किया गया है।
स्वीडन-इंडिया टेक्नोलॉजी एवं एआई कॉरिडोर क्या है?
यह एक प्रस्तावित सहयोग ढाँचा है जो एआई, डिजिटल इनोवेशन और 6जी जैसी तकनीकों में संयुक्त शोध, स्टार्टअप साझेदारी और सीमा-पार निवेश को बढ़ावा देगा। राजदूत अनुराग भूषण के अनुसार गोथेनबर्ग इस कॉरिडोर का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
'मेक इन इंडिया, मेक विद स्वीडन' मॉडल कैसे काम करेगा?
इस मॉडल में स्वीडन की तकनीकी दक्षता और नवाचार को भारत की विनिर्माण क्षमता और विशाल घरेलू बाज़ार के साथ जोड़ा जाएगा। स्वीडिश कंपनियाँ भारत को नई तकनीकों के परीक्षण और व्यावसायीकरण के लिए आदर्श गंतव्य मान रही हैं, क्योंकि उनका अपना बाज़ार अपेक्षाकृत सीमित है।
भारत में कितनी स्वीडिश कंपनियाँ काम कर रही हैं?
राजदूत भूषण के अनुसार भारत में कार्यरत स्वीडिश कंपनियों की संख्या एक वर्ष में लगभग 275 से बढ़कर लगभग 300 हो गई है। यह वृद्धि दोनों देशों के बीच बढ़ते निवेश भरोसे को दर्शाती है।
2027 का भारत-स्वीडन शिखर सम्मेलन कब और कहाँ होगा?
2027 में भारत में एक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है, जो व्यापार जगत, निवेशकों और नीति-निर्माताओं को एक मंच पर लाएगा। इसमें 2047 तक के भारत-स्वीडन संबंधों का दीर्घकालिक रोडमैप भी तैयार किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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