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भारत-स्वीडन रणनीतिक साझेदारी: 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य, राजदूत अनुराग भूषण बोले — जमीन पर उतर रहा है एक्शन प्लान

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भारत-स्वीडन रणनीतिक साझेदारी: 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य, राजदूत अनुराग भूषण बोले — जमीन पर उतर रहा है एक्शन प्लान

सारांश

मोदी की गोटेनबर्ग यात्रा सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं थी — वह एक ठोस एक्शन प्लान की नींव थी। 2030 तक व्यापार दोगुना करने के लक्ष्य के साथ, रक्षा, AI और कनेक्टिविटी के चार स्तंभों पर भारत-स्वीडन साझेदारी अब कागज से जमीन पर उतर रही है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री मोदी की स्वीडन के गोटेनबर्ग यात्रा के बाद भारत-स्वीडन को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया।
दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को दोगुना करना है।
साझेदारी के चार स्तंभ: रणनीतिक सहयोग, आर्थिक साझेदारी, उभरती तकनीकें और लोगों के बीच संपर्क ।
स्वीडन-भारत तकनीकी सहयोग (SITSC) के अंतर्गत AI और IT क्षेत्र में सहयोग प्रमुख प्राथमिकता।
हरियाणा, आंध्र प्रदेश, गोवा के अलावा CII के प्रतिनिधिमंडल सहित कई उच्चस्तरीय दौरे यात्रा के बाद हो चुके हैं।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने पाँच वर्षीय एक्शन प्लान अपनाया है जो लक्ष्यों के क्रियान्वयन का रोडमैप देता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वीडन के गोटेनबर्ग यात्रा के बाद भारत-स्वीडन रणनीतिक साझेदारी को अब ठोस जमीनी स्वरूप देने का काम पूरी गति से चल रहा है। स्वीडन में भारत के राजदूत अनुराग भूषण ने बताया कि दोनों देशों के बीच 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को दोगुना करने का स्पष्ट लक्ष्य तय किया गया है और दोनों सरकारें उसे केवल कागजी संकल्प नहीं रहने देना चाहतीं। उन्होंने इस यात्रा को 'ऐतिहासिक' करार देते हुए कहा कि इससे द्विपक्षीय संबंधों को एक नया और टिकाऊ ढाँचा मिला है।

रणनीतिक साझेदारी के चार स्तंभ

राजदूत भूषण ने बताया कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा जारी संयुक्त बयान में सहयोग के चार प्रमुख क्षेत्र परिभाषित किए गए हैं। पहला — रणनीतिक सहयोग, जिसमें स्थिरता, सुरक्षा, रक्षा और राजनीतिक संवाद शामिल हैं। दूसरा — आर्थिक साझेदारी, जिसे नए स्तर पर ले जाने पर सहमति बनी है। तीसरा — नई और उभरती तकनीकें तथा भरोसेमंद कनेक्टिविटी। चौथा — लोगों के बीच आपसी संपर्क। राजदूत के अनुसार, ये चार स्तंभ ही दोनों देशों के एक्शन प्लान की रीढ़ हैं।

तकनीक और AI: साझेदारी का अहम केंद्र

राजदूत भूषण ने तकनीक को इस साझेदारी का सबसे गतिशील आयाम बताया। उन्होंने कहा कि आईटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब भू-राजनीति का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। स्वीडन — जिसकी आबादी मात्र एक करोड़ है — AI क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति है और वहाँ की कंपनियाँ भारत को भविष्य के विस्तार के लिए एक बड़े बाज़ार के रूप में देख रही हैं। दोनों देशों ने नई पीढ़ी के 'यूनिकॉर्न' स्टार्टअप तैयार किए हैं, जो इस सहयोग को और अधिक स्वाभाविक बनाता है। उन्होंने कहा कि स्वीडन-भारत तकनीकी सहयोग (SITSC) के ढाँचे के अंतर्गत इस दिशा में बड़े कदम उठाए जाने की उम्मीद है।

यात्रा के बाद की प्रगति

राजदूत भूषण ने बताया कि मोदी की गोटेनबर्ग यात्रा के बाद से कई उच्चस्तरीय दौरे हो चुके हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री के अलावा रक्षा उत्पादन सचिव और संचार सचिव ने भी स्वीडन का दौरा किया है। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) सहित कई संगठनों के व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल स्वीडन पहुँच चुके हैं। राज्य स्तर पर, आंध्र प्रदेश और गोवा सक्रिय कदम उठा चुके हैं, जबकि गुजरात की भागीदारी भी जल्द होने वाली है।

2030 का व्यापार लक्ष्य और एक्शन प्लान

दोनों प्रधानमंत्रियों ने अगले पाँच वर्षों के लिए एक विस्तृत एक्शन प्लान अपनाया है जो यह रोडमैप देता है कि संयुक्त बयान में तय उद्देश्यों को व्यावहारिक रूप में कैसे लागू किया जाएगा। राजदूत भूषण ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस बार का दृष्टिकोण परिणाम-केंद्रित है — घोषणाओं को धरातल पर उतारना ही असली कसौटी है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने यूरोपीय साझेदारों के साथ रणनीतिक गहराई बढ़ाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। गौरतलब है कि स्वीडन यूरोपीय संघ का हिस्सा है, जिससे यह साझेदारी भारत-EU संबंधों को भी नई ऊर्जा दे सकती है। आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में और अधिक ठोस समझौतों की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह है कि 2030 का व्यापार-दोगुनाकरण लक्ष्य मापनीय मील के पत्थरों से जुड़ा है या नहीं। स्वीडन यूरोपीय संघ का सदस्य है, इसलिए यह साझेदारी भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते की वार्ताओं के साथ रणनीतिक रूप से जुड़ी है — यह पहलू मुख्यधारा की कवरेज में प्रायः अनदेखा रह जाता है। AI और SITSC को केंद्र में रखना सराहनीय है, लेकिन बिना स्पष्ट डेटा-साझाकरण और बौद्धिक संपदा ढाँचे के, तकनीकी सहयोग सेमिनारों तक सिमट जाने का जोखिम है। राज्य-स्तरीय भागीदारी — हरियाणा, आंध्र प्रदेश, गोवा, गुजरात — एक सकारात्मक संकेत है, पर यही वह स्तर है जहाँ पिछले द्विपक्षीय समझौते अक्सर गति खो देते हैं।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-स्वीडन रणनीतिक साझेदारी क्या है और यह कब बनी?
प्रधानमंत्री मोदी की स्वीडन के गोटेनबर्ग यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को औपचारिक रूप से रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया। इस साझेदारी के तहत रणनीतिक सहयोग, आर्थिक संबंध, तकनीक और लोगों के बीच संपर्क — ये चार क्षेत्र प्राथमिकता में हैं।
2030 तक भारत-स्वीडन व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य कैसे हासिल होगा?
दोनों प्रधानमंत्रियों ने एक पाँच वर्षीय एक्शन प्लान अपनाया है जो व्यापार और निवेश दोगुना करने का रोडमैप देता है। CII सहित व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के दौरे और राज्य-स्तरीय जुड़ाव इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
SITSC क्या है और भारत-स्वीडन तकनीकी सहयोग में इसकी भूमिका क्या है?
SITSC यानी स्वीडन-भारत तकनीकी सहयोग (Sweden-India Technology and Science Council) दोनों देशों के बीच IT, AI और उभरती तकनीकों में सहयोग का प्रमुख मंच है। राजदूत भूषण के अनुसार, इस ढाँचे के अंतर्गत आने वाले समय में बड़े कदम उठाए जाने की उम्मीद है।
भारत के कौन-से राज्य स्वीडन के साथ सक्रिय रूप से जुड़ रहे हैं?
राजदूत भूषण ने बताया कि आंध्र प्रदेश और गोवा पहले ही कदम उठा चुके हैं, जबकि गुजरात की भागीदारी जल्द होने वाली है। हरियाणा के मुख्यमंत्री भी स्वीडन का दौरा कर चुके हैं।
स्वीडन भारत के लिए तकनीक और AI के क्षेत्र में क्यों महत्वपूर्ण साझेदार है?
एक करोड़ की आबादी के बावजूद स्वीडन AI और IT क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख शक्ति है और उसने कई नई पीढ़ी के यूनिकॉर्न स्टार्टअप दिए हैं। राजदूत भूषण के अनुसार, स्वीडिश कंपनियाँ भारत को भविष्य के विकास के लिए एक बड़े बाज़ार के रूप में देखती हैं, जो इस साझेदारी को स्वाभाविक रूप से पूरक बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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