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भारत-स्वीडन रणनीतिक साझेदारी घोषित, पीएम मोदी की गुटेनबर्ग यात्रा में 5 वर्षों में व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

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भारत-स्वीडन रणनीतिक साझेदारी घोषित, पीएम मोदी की गुटेनबर्ग यात्रा में 5 वर्षों में व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

सारांश

भारत और स्वीडन ने दशकों की मित्रता को औपचारिक 'रणनीतिक साझेदारी' में बदल दिया — सुरक्षा, एआई, अंतरिक्ष और व्यापार के चार स्तंभों पर। पाँच वर्षों में व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य और 2027 में भारत में शिखर सम्मेलन — यह यूरोप में भारत की कूटनीतिक पकड़ का विस्तार है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 मई 2025 को गुटेनबर्ग, स्वीडन का आधिकारिक दौरा किया और भारत-स्वीडन संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक उन्नत किया।
साझेदारी चार स्तंभों पर आधारित है: रणनीतिक संवाद, आर्थिक साझेदारी, उभरती प्रौद्योगिकियाँ और 'कल को मिलकर संवारना'।
पाँच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश दोगुना करने का साझा लक्ष्य घोषित; 'उन्नत संयुक्त कार्य योजना 2026–2030' को मंजूरी।
'स्वीडन-भारत टेक्नोलॉजी और एआई कॉरिडोर' (SITAC) और 'भारत-स्वीडन संयुक्त विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र' की स्थापना पर सहमति।
इसरो और स्वीडिश इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस फिजिक्स के बीच 'भारतीय शुक्र ऑर्बिटर मिशन' पर सहयोग का स्वागत।
22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की संयुक्त निंदा; स्वीडन ने UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन को दोहराया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 18 मई 2025 को गुटेनबर्ग, स्वीडन की आधिकारिक यात्रा के बाद भारत और स्वीडन ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को औपचारिक रूप से 'रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक उन्नत किया। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने रणनीतिक हितों की साझा समझ और दशकों पुरानी मित्रता को इस नई साझेदारी की नींव बताया। यह भारत के लिए यूरोप में एक और महत्वपूर्ण कूटनीतिक मील का पत्थर है।

रणनीतिक साझेदारी के चार स्तंभ

विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, यह साझेदारी चार प्रमुख स्तंभों पर टिकी है। पहला — स्थिरता और सुरक्षा के लिए रणनीतिक संवाद, जिसमें दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच नियमित संपर्क शामिल है। दूसरा — आर्थिक साझेदारी, जिसके तहत पाँच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को दोगुना करने का साझा उद्देश्य तय किया गया है। तीसरा — उभरती प्रौद्योगिकियाँ और विश्वसनीय कनेक्टिविटी, और चौथा — 'कल को मिलकर संवारना' जिसमें लोग, ग्रह और लचीलापन शामिल है।

दोनों देशों ने इस साझेदारी के क्रियान्वयन के लिए 'उन्नत संयुक्त कार्य योजना 2026–2030' को भी मंजूरी दी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

प्रौद्योगिकी और एआई सहयोग

दोनों प्रधानमंत्रियों ने 'स्वीडन-भारत टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉरिडोर' (SITAC) के माध्यम से डिजिटलीकरण और एआई क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई। इसके अतिरिक्त, एक उन्नत 'ज्वाइंट इनोवेशन पार्टनरशिप 2.0' और एक 'भारत-स्वीडन संयुक्त विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र' की स्थापना की भी घोषणा की गई। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट की सफलता पर भारत को बधाई दी।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीडन की उप-प्रधानमंत्री एब्बा बुश की भागीदारी और स्वीडिश एआई इकोसिस्टम के बड़े प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति की सराहना की। गौरतलब है कि यह वह दौर है जब वैश्विक स्तर पर एआई प्रशासन और तकनीकी संप्रभुता को लेकर बहस तेज़ हो रही है।

अंतरिक्ष, खनिज और उद्योग परिवर्तन

अंतरिक्ष सहयोग के क्षेत्र में दोनों नेताओं ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और स्वीडिश इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस फिजिक्स के बीच 'भारतीय शुक्र ऑर्बिटर मिशन' पर जारी सहयोग का स्वागत किया। स्वीडन के 'एसरेंज स्पेस सेंटर' की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।

खनन और खनिज प्रसंस्करण के क्षेत्र में दोनों देशों ने कम-ग्रेड और जटिल महत्वपूर्ण खनिज भंडारों के कुशल दोहन के लिए तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने पर सहमति जताई। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, रिफाइनिंग और डाउनस्ट्रीम प्रसंस्करण क्षमताओं के सह-विकास से आपूर्ति श्रृंखलाओं के मजबूत होने की उम्मीद है।

दोनों नेताओं ने 'लीडरशिप ग्रुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांजिशन' (LeadIT) के विस्तार का स्वागत किया और 'COP-31' में LeadIT 3.0 के नए चार-वर्षीय चरण की घोषणा का आह्वान किया।

आतंकवाद पर साझा रुख और पहलगाम हमले की निंदा

दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का विशेष रूप से उल्लेख किया और आतंकी बुनियादी ढाँचे तथा सुरक्षित पनाहगाहों को नष्ट करने का आह्वान किया। दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र और एफएटीएफ (FATF) जैसे मंचों पर आतंकवाद के वित्तपोषण को बाधित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए स्वीडन के समर्थन को दोहराया — यह कूटनीतिक रूप से भारत के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है।

आगे की राह

दोनों देशों ने 2027 में भारत में 'भारत-स्वीडन: एक साथ अधिक मजबूत — टुवर्ड्स 2047' शिखर सम्मेलन आयोजित करने पर सहमति जताई। स्वीडन और भारत के बीच सीधी और नियमित हवाई सेवाओं की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन को भारत आने का आमंत्रण दिया, जो इस साझेदारी को संस्थागत रूप देने की दिशा में अगला कदम होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है — 'पाँच वर्षों में व्यापार दोगुना' जैसे लक्ष्य भारत की कई द्विपक्षीय घोषणाओं में पहले भी आ चुके हैं, जिनकी प्रगति असमान रही है। SITAC एआई कॉरिडोर और संयुक्त विज्ञान केंद्र जैसी पहलें तकनीकी संप्रभुता की दिशा में सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन इनके लिए ठोस वित्तपोषण और समयसीमा का अभाव अभी स्पष्ट है। पहलगाम हमले की संयुक्त निंदा और UNSC स्थायी सदस्यता समर्थन का दोहराव — ये दोनों भारत के लिए कूटनीतिक लाभ हैं, पर इनका व्यावहारिक प्रभाव तब दिखेगा जब स्वीडन इसे यूरोपीय संघ के मंचों पर सक्रिय रूप से आगे बढ़ाए।
RashtraPress
16 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-स्वीडन रणनीतिक साझेदारी क्या है और इसकी घोषणा कब हुई?
यह 18 मई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गुटेनबर्ग यात्रा के दौरान घोषित द्विपक्षीय उन्नयन है, जिसमें दोनों देशों ने अपने संबंधों को औपचारिक रूप से 'रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा दिया। यह साझेदारी सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी और सतत विकास के चार स्तंभों पर आधारित है।
भारत-स्वीडन व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य कब तक है?
दोनों देशों ने पाँच वर्षों के भीतर द्विपक्षीय व्यापार और निवेश दोगुना करने का साझा उद्देश्य घोषित किया है। इसमें 'मेक इन इंडिया' और 'मेड विद स्वीडन' पहलों के माध्यम से सहयोग शामिल है।
SITAC क्या है और इसका भारत के लिए क्या महत्व है?
'स्वीडन-भारत टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉरिडोर' (SITAC) एक नई द्विपक्षीय पहल है, जिसके तहत दोनों देश डिजिटलीकरण और एआई क्षेत्र में सहयोग को संस्थागत रूप देंगे। इसके साथ ही एक 'भारत-स्वीडन संयुक्त विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र' और 'ज्वाइंट इनोवेशन पार्टनरशिप 2.0' की भी स्थापना की जाएगी।
पहलगाम आतंकी हमले का इस संयुक्त बयान में क्या उल्लेख है?
दोनों प्रधानमंत्रियों ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की और आतंकी बुनियादी ढाँचे को नष्ट करने का आह्वान किया। दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र और FATF जैसे मंचों पर आतंकवाद के वित्तपोषण को बाधित करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
भारत-स्वीडन अगला शिखर सम्मेलन कब और कहाँ होगा?
दोनों देशों ने 2027 में भारत में 'भारत-स्वीडन: एक साथ अधिक मजबूत — टुवर्ड्स 2047' शिखर सम्मेलन आयोजित करने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन को भारत आने का आमंत्रण भी दिया।
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