भारत-स्वीडन रणनीतिक साझेदारी घोषित, पीएम मोदी की गुटेनबर्ग यात्रा में 5 वर्षों में व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 18 मई 2025 को गुटेनबर्ग, स्वीडन की आधिकारिक यात्रा के बाद भारत और स्वीडन ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को औपचारिक रूप से 'रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक उन्नत किया। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने रणनीतिक हितों की साझा समझ और दशकों पुरानी मित्रता को इस नई साझेदारी की नींव बताया। यह भारत के लिए यूरोप में एक और महत्वपूर्ण कूटनीतिक मील का पत्थर है।
रणनीतिक साझेदारी के चार स्तंभ
विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, यह साझेदारी चार प्रमुख स्तंभों पर टिकी है। पहला — स्थिरता और सुरक्षा के लिए रणनीतिक संवाद, जिसमें दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच नियमित संपर्क शामिल है। दूसरा — आर्थिक साझेदारी, जिसके तहत पाँच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को दोगुना करने का साझा उद्देश्य तय किया गया है। तीसरा — उभरती प्रौद्योगिकियाँ और विश्वसनीय कनेक्टिविटी, और चौथा — 'कल को मिलकर संवारना' जिसमें लोग, ग्रह और लचीलापन शामिल है।
दोनों देशों ने इस साझेदारी के क्रियान्वयन के लिए 'उन्नत संयुक्त कार्य योजना 2026–2030' को भी मंजूरी दी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
प्रौद्योगिकी और एआई सहयोग
दोनों प्रधानमंत्रियों ने 'स्वीडन-भारत टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉरिडोर' (SITAC) के माध्यम से डिजिटलीकरण और एआई क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई। इसके अतिरिक्त, एक उन्नत 'ज्वाइंट इनोवेशन पार्टनरशिप 2.0' और एक 'भारत-स्वीडन संयुक्त विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र' की स्थापना की भी घोषणा की गई। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट की सफलता पर भारत को बधाई दी।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीडन की उप-प्रधानमंत्री एब्बा बुश की भागीदारी और स्वीडिश एआई इकोसिस्टम के बड़े प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति की सराहना की। गौरतलब है कि यह वह दौर है जब वैश्विक स्तर पर एआई प्रशासन और तकनीकी संप्रभुता को लेकर बहस तेज़ हो रही है।
अंतरिक्ष, खनिज और उद्योग परिवर्तन
अंतरिक्ष सहयोग के क्षेत्र में दोनों नेताओं ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और स्वीडिश इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस फिजिक्स के बीच 'भारतीय शुक्र ऑर्बिटर मिशन' पर जारी सहयोग का स्वागत किया। स्वीडन के 'एसरेंज स्पेस सेंटर' की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
खनन और खनिज प्रसंस्करण के क्षेत्र में दोनों देशों ने कम-ग्रेड और जटिल महत्वपूर्ण खनिज भंडारों के कुशल दोहन के लिए तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने पर सहमति जताई। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, रिफाइनिंग और डाउनस्ट्रीम प्रसंस्करण क्षमताओं के सह-विकास से आपूर्ति श्रृंखलाओं के मजबूत होने की उम्मीद है।
दोनों नेताओं ने 'लीडरशिप ग्रुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांजिशन' (LeadIT) के विस्तार का स्वागत किया और 'COP-31' में LeadIT 3.0 के नए चार-वर्षीय चरण की घोषणा का आह्वान किया।
आतंकवाद पर साझा रुख और पहलगाम हमले की निंदा
दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का विशेष रूप से उल्लेख किया और आतंकी बुनियादी ढाँचे तथा सुरक्षित पनाहगाहों को नष्ट करने का आह्वान किया। दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र और एफएटीएफ (FATF) जैसे मंचों पर आतंकवाद के वित्तपोषण को बाधित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए स्वीडन के समर्थन को दोहराया — यह कूटनीतिक रूप से भारत के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है।
आगे की राह
दोनों देशों ने 2027 में भारत में 'भारत-स्वीडन: एक साथ अधिक मजबूत — टुवर्ड्स 2047' शिखर सम्मेलन आयोजित करने पर सहमति जताई। स्वीडन और भारत के बीच सीधी और नियमित हवाई सेवाओं की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन को भारत आने का आमंत्रण दिया, जो इस साझेदारी को संस्थागत रूप देने की दिशा में अगला कदम होगा।