भारत-ईयू एफटीए भविष्य के व्यापार की नींव: स्वीडिश उद्यम प्रमुख जैके, मोदी ने गोथेनबर्ग में दिया बड़ा संदेश
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 मई को अपने पाँच देशों के दौरे के तीसरे चरण में स्वीडन की यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की। इस अवसर पर कॉन्फेडेरेशन ऑफ स्वीडिश एंटरप्राइज के महानिदेशक यान-ओलोफ जैके ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दुनिया को यह स्पष्ट संकेत देता है कि व्यापार अतीत की नहीं, बल्कि भविष्य की धुरी है। उनके अनुसार, यह समझौता दोनों पक्षों के लिए एक मजबूत साझेदारी का आधार बनेगा, हालाँकि इसके पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए अभी कई महत्वपूर्ण कदम उठाने शेष हैं।
जैके का विशेष बयान: प्रक्रियाएँ सरल करना होगी
एक विशेष साक्षात्कार में जैके ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए को व्यावहारिक धरातल पर सफल बनाने के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुगम करना और सीमा शुल्क व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना आवश्यक होगा। उन्होंने इसे एक 'शानदार शुरुआत' बताते हुए जोर दिया कि दोनों पक्षों को मिलकर और अधिक ठोस प्रयास करने होंगे।
जैके ने यह भी रेखांकित किया कि स्वीडन भले ही क्षेत्रफल में छोटा देश हो, लेकिन नवाचार और तकनीकी उन्नति में यह अग्रणी है। दूसरी ओर, भारत के पास विशाल युवा जनशक्ति और तेज़ी से विस्तारित होता बाज़ार है — यह संयोजन दोनों देशों के बीच साझेदारी को असाधारण रूप से संभावनाशील बनाता है।
वॉलेनबर्ग की रिपोर्ट और एफटीए के अवसर
यात्रा के दौरान कॉन्फेडेरेशन ऑफ स्वीडिश एंटरप्राइज के चेयरमैन जैकब वॉलेनबर्ग ने प्रधानमंत्री मोदी को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी, जिसमें भारत-ईयू एफटीए से उभरने वाले संभावित अवसरों और आर्थिक लाभों का विश्लेषण किया गया है। जैके ने इस रिपोर्ट को दोनों पक्षों के बीच संवाद की एक ठोस शुरुआत बताया।
मोदी का गोथेनबर्ग में यूरोपीय उद्योग जगत को संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने गोथेनबर्ग में वोल्वो ग्रुप द्वारा आयोजित 'यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री' को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोप व भारत की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत आज दुनिया के सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में से एक है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, उन्होंने कहा कि भारत और यूरोप को लचीली व विविध आपूर्ति श्रृंखलाएँ विकसित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने भारत-ईयू एफटीए वार्ताओं के सफल समापन को एक 'परिवर्तनकारी आर्थिक साझेदारी' की संज्ञा दी।
निवेश के क्षेत्र और भारत का विकास एजेंडा
प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय उद्योग जगत के नेताओं को 'मेक इन इंडिया', राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन और स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा, सेमीकंडक्टर तथा उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने दूरसंचार, डिजिटल बुनियादी ढाँचे, एआई, इलेक्ट्रॉनिक्स, हरित परिवर्तन, शहरी गतिशीलता और स्वास्थ्य सेवा को भी प्रमुख अवसर क्षेत्र बताया।
उन्होंने भारत के सुधारों, मजबूत घरेलू माँग, डिजिटल सार्वजनिक ढाँचे और आधुनिक बुनियादी ढाँचे में तेज़ विस्तार को देश की आर्थिक प्रगति का आधार बताया। प्रधानमंत्री ने भारत-यूरोप के बीच प्रतिभा की गतिशीलता, शिक्षा और कौशल साझेदारी के महत्व को भी रेखांकित किया।
साझा मूल्य और आगे की राह
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया और प्रधानमंत्री क्रिस्टरसन के साथ मुलाकात की और चुनिंदा स्वीडिश कंपनियों के प्रमुखों से भी विचार-विमर्श किया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, मोदी ने कहा कि भारत और स्वीडन लोकतंत्र, पारदर्शिता, नवाचार और सतत विकास जैसे साझा मूल्यों से आपस में जुड़े हैं।
दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच हुई चर्चाओं में लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं, ग्रीन ट्रांजिशन, सस्टेनेबल मोबिलिटी, जीवन विज्ञान और डिजिटल प्रौद्योगिकी में सहयोग को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। मोदी ने भारत-यूरोप सीईओ गोलमेज सम्मेलन को वार्षिक आधार पर आयोजित करने और ईआरटी में एक 'इंडिया डेस्क' स्थापित करने का सुझाव भी दिया — जो संस्थागत सहयोग की दिशा में एक ठोस कदम होगा।