भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता जल्द लागू होने की संभावना: पीयूष गोयल
सारांश
Key Takeaways
- भारत-ब्रिटेन एफटीए की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।
- समझौता जल्द ही लागू होने की संभावना है।
- ईएफटीए देशों ने भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश करने का वादा किया है।
- समझौता कानूनी रूप से बाध्यकारी निवेश प्रतिबद्धता भी शामिल करता है।
नई दिल्ली, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को जानकारी दी कि भारत और ब्रिटेन के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) जल्द ही प्रभावी हो सकता है। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन में इस समझौते की मंजूरी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।
राष्ट्रीय राजधानी में एसोचैम द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बोलते हुए मंत्री गोयल ने कहा कि यह व्यापार समझौता ब्रिटेन की संसद द्वारा मंजूर होने वाले सबसे तेज व्यापार समझौतों में से एक बन सकता है।
उन्होंने बताया कि इस समझौते पर हस्ताक्षर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिटेन यात्रा के दौरान २४ जुलाई को चेकर्स में किए गए थे। गोयल ने विश्वास जताया कि यह समझौता जल्द ही लागू होने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि इस समझौते की प्रगति दोनों देशों के बीच मजबूत सहयोग और लंदन में भारतीय राजनयिक टीम के प्रयासों को दर्शाती है।
मंत्री ने अपने संबोधन में भारत-ईएफटीए व्यापार समझौते के महत्व पर भी बल दिया और इसे यूरोप के साथ भारत के आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।
उन्होंने कहा कि इस समझौते के माध्यम से यूरोपीय क्षेत्र के साथ गहरे आर्थिक संबंधों की शुरुआत हुई और यह अन्य व्यापार समझौतों के लिए भी रास्ता प्रशस्त करेगा।
गोयल ने कहा कि ईएफटीए समझौते के बाद भारत ने ब्रिटेन के साथ भी व्यापार समझौता किया और बाद में २७ देशों वाले यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ भी समझौते पर सहमति बनी।
उन्होंने बताया कि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत-ईयू समझौते को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा था।
मंत्री ने ईएफटीए समझौते के तहत मिलने वाले निवेश पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ईएफटीए के चार देशों (स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, लिकटेंस्टाइन और आइसलैंड) ने इस समझौते के तहत भारत में १०० अरब डॉलर निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है।
गोयल ने बताया कि इस निवेश से भारत की अर्थव्यवस्था में लगभग १० लाख नए रोजगार सृजित होने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि यह समझौता विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें मुक्त व्यापार समझौते के साथ कानूनी रूप से बाध्यकारी निवेश प्रतिबद्धता भी शामिल है, जो वैश्विक व्यापार समझौतों में शायद ही कहीं देखने को मिले।