भारत ने आईईए के आपात तेल भंडार जारी करने के निर्णय का किया स्वागत
सारांश
Key Takeaways
- भारत ने आईईए के आपात तेल भंडार जारी करने का स्वागत किया।
- यह निर्णय ईरान युद्ध के कारण आपूर्ति बाधाओं के बीच आया है।
- आईईए के पास 1.2 अरब बैरल से अधिक का आपातकालीन तेल भंडार है।
- यह कदम वैश्विक ऊर्जा स्थिरता में योगदान देगा।
- पश्चिम एशिया में संघर्ष ने ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है।
नई दिल्ली, 11 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत ने बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) द्वारा वैश्विक तेल कीमतों को नियंत्रित करने के लिए जारी किए गए आपातकालीन तेल भंडार के निर्णय का स्वागत किया है। यह कदम ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न आपूर्ति बाधाओं को देखते हुए उठाया गया है।
सरकार वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति पर विशेष ध्यान दे रही है, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों पर।
एक अधिकारी ने कहा कि भारत, आईईए के प्रयासों के अनुरूप वैश्विक बाजार की स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यकतानुसार उचित कदम उठाने के लिए तैयार है। भारत आईईए का सहयोगी सदस्य है और अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा सहयोग में सक्रिय रूप से भाग लेता है।
पश्चिम एशिया के संकट के बीच, आईईए के सदस्य देशों ने तेल बाजार में आई बाधाओं को दूर करने के लिए 32 सदस्य देशों के आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने पर सहमति जताई।
इन आपातकालीन भंडारों को प्रत्येक सदस्य देश की राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार समय-सीमा के भीतर बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। कुछ देश अतिरिक्त आपात कदम भी उठाएंगे।
आईईए के पास कुल मिलाकर 1.2 अरब बैरल से अधिक का आपातकालीन तेल भंडार है, जबकि उद्योगों के पास सरकार की बाध्यता के तहत करीब 60 करोड़ बैरल अतिरिक्त भंडार मौजूद है।
यह समन्वित रूप से तेल भंडार जारी करने का आईईए के इतिहास में छठा अवसर है। इससे पहले 1991, 2005, 2011 और 2022 में ऐसा कदम उठाया गया था। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की स्थापना 1974 में हुई थी।
आईईए के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण बाजार की स्थिति का आकलन करने और आपूर्ति बाधाओं से निपटने के विकल्पों पर विचार करने के लिए आईईए के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने सदस्य देशों की एक विशेष बैठक बुलाई थी, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया।
28 फरवरी से शुरू हुए पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। वर्तमान में कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों का निर्यात संघर्ष से पहले के स्तर के 10 प्रतिशत से भी कम रह गया है।
इसके चलते क्षेत्र के कई ऑपरेटरों को उत्पादन कम करना या बंद करना पड़ रहा है।
साल 2025 में प्रतिदिन औसतन करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल और तेल उत्पाद होरमुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरते थे, जो दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत है।
आईईए के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य को दरकिनार कर तेल आपूर्ति के वैकल्पिक रास्ते बेहद सीमित हैं।