क्या इंदौर में दूषित पानी की घटना पर हाई कोर्ट ने अधिकारियों को नोटिस भेजा?
सारांश
Key Takeaways
- इंदौर में दूषित पानी पीने से गंभीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हुआ है।
- हाई कोर्ट ने अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
- स्थानीय लोग और राजनीतिक दल प्रशासन के आंकड़ों पर सवाल उठा रहे हैं।
- सरकार ने सख्त कार्रवाई की है और जांच समिति का गठन किया है।
- अगली सुनवाई में प्रशासन को विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी।
इंदौर, २ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के औद्योगिक शहर इंदौर में दूषित जल के सेवन से हुई मौत और कई लोगों के बीमार पड़ने के मामले में तीन जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं। इस सिलसिले में सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने दो अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
उच्च न्यायालय में दायर की गई जनहित याचिकाओं के बाद सरकार की ओर से स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई। इस पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने नगर निगम आयुक्त और अतिरिक्त आयुक्त को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही, इस मामले की अगली सुनवाई ६ जनवरी को निर्धारित की गई है।
दरअसल, हाल ही में भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हुई है, जबकि प्रशासन केवल चार लोगों की मौत को ही मान्यता दे रहा है। वहीं, स्थानीय लोग और राजनीतिक दल मृतकों की संख्या १४ से अधिक बताने का दावा कर रहे हैं। सरकार द्वारा पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई कि प्रशासन अभी भी केवल चार लोगों की मौत की पुष्टि कर रहा है।
इस मामले की अगली सुनवाई ६ जनवरी को होगी, जिसमें प्रशासन को दूषित पानी पीने से हुई मौतों का सही आंकड़ा प्रस्तुत करना होगा। साथ ही, कितने लोग बीमार हैं और आईसीयू में भर्ती हैं, इस संबंध में भी जानकारी देनी होगी। भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों को लेकर सरकार ने सख्त कार्रवाई की है और तीन अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। इसके अलावा, एक जांच समिति भी गठित की गई है। दूसरी ओर, विपक्षी दल सरकार और नगर निगम पर दबाव बनाने में जुटे हुए हैं।