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इंदौर: बिजली बिल के नाम पर ₹1.45 लाख की ऑनलाइन ठगी, क्राइम ब्रांच ने 24 घंटे में रकम वापस दिलाई

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इंदौर: बिजली बिल के नाम पर ₹1.45 लाख की ऑनलाइन ठगी, क्राइम ब्रांच ने 24 घंटे में रकम वापस दिलाई

सारांश

इंदौर में बिजली कनेक्शन काटने की धमकी देकर व्हाट्सएप लिंक से कपड़ा व्यापारी के क्रेडिट कार्ड से ₹1.45 लाख उड़ाए गए — लेकिन क्राइम ब्रांच ने 24 घंटे के भीतर पूरी रकम वापस दिला दी। यह मामला साइबर ठगी में तत्काल शिकायत की ताकत दिखाता है।

मुख्य बातें

इंदौर के कपड़ा व्यापारी विशाल से व्हाट्सएप पर बिजली विभाग का अधिकारी बनकर ₹1,45,000 की ऑनलाइन ठगी की गई।
ठग ने फर्जी लिंक भेजकर क्रेडिट कार्ड से राशि ट्रांसफर कराई; रात साढ़े नौ बजे कनेक्शन काटने की धमकी देकर घबराहट पैदा की।
क्राइम ब्रांच इंदौर ने 24 घंटे के भीतर संपूर्ण रकम नाब्रोकर मर्चेंट के माध्यम से संदिग्ध खातों में जाने से पहले ही रिफंड कराई।
पुलिस ने गूगल पर दिए नंबरों पर विश्वास न करने और OTP, पिन, बैंकिंग जानकारी किसी से भी साझा न करने की हिदायत दी।
किसी भी सरकारी या बैंक संबंधी कार्य के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित कार्यालय से संपर्क करने की सलाह दी गई।

इंदौर में एक कपड़ा व्यापारी को बिजली विभाग का अधिकारी बनकर व्हाट्सएप पर संपर्क करने वाले एक अज्ञात ठग ने ₹1,45,000 की ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार बना लिया। इंदौर क्राइम ब्रांच की त्वरित कार्रवाई के चलते यह संपूर्ण राशि 24 घंटे के भीतर व्यापारी को वापस दिला दी गई — इससे पहले कि रकम संदिग्ध खातों में स्थानांतरित हो पाती।

कैसे हुई ठगी

पुलिस के अनुसार, कपड़ा व्यापारी विशाल के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप संदेश आया, जिसमें भेजने वाले ने खुद को बिजली विभाग का अधिकारी बताया। संदिग्ध ने दावा किया कि बिजली बिल का भुगतान नहीं होने के कारण रात साढ़े नौ बजे उनका कनेक्शन काट दिया जाएगा। इसके बाद उसने एक लिंक भेजी और कहा कि इस पर क्लिक करके बिल का भुगतान किया जा सकता है।

व्यापारी विशाल ने उस लिंक पर क्लिक किया और कुछ ही देर में उनके क्रेडिट कार्ड से ₹1,45,000 की राशि अनधिकृत रूप से ट्रांसफर हो गई। ठगी का एहसास होते ही उन्होंने तत्काल इंदौर क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई।

क्राइम ब्रांच की त्वरित कार्रवाई

क्राइम ब्रांच इंदौर ने मामला सामने आते ही जाँच शुरू की। पुलिस की सतर्कता और त्वरित प्रक्रिया के चलते यह पता लगाया गया कि ठगी की रकम नाब्रोकर मर्चेंट के माध्यम से संदिग्ध खातों में जाने वाली थी। पुलिस ने समय रहते हस्तक्षेप किया और धनराशि के संदिग्ध खातों में जमा होने से पहले ही सफलतापूर्वक रिफंड करा दी।

यह कार्रवाई इस बात का उदाहरण है कि साइबर ठगी के मामलों में शीघ्र शिकायत और पुलिस की सक्रियता मिलकर किस तरह नुकसान को रोक सकती है।

पुलिस की जनता से अपील

इंदौर पुलिस ने इस घटना के बाद आम नागरिकों को सतर्क रहने की हिदायत जारी की है। पुलिस ने कहा है कि गूगल पर दिए गए नंबरों पर भरोसा न करें और यदि कोई अनजान व्यक्ति खुद को किसी सरकारी विभाग या संस्थान का अधिकारी बताए, तो बिना पुष्टि किए विश्वास न करें।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि अपनी बैंकिंग जानकारी, OTP, पिन या कोई भी व्यक्तिगत विवरण किसी भी अजनबी के साथ साझा न करें — चाहे वह खुद को अधिकृत अधिकारी ही क्यों न बताए। बैंक संबंधी कार्य, पेंशन या सरकारी योजनाओं से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित कार्यालय से ही संपर्क करें।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि बिजली बिल और सरकारी सेवाओं के नाम पर होने वाली साइबर ठगी के मामले पूरे देश में तेज़ी से बढ़ रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में डिजिटल लेनदेन की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे साइबर अपराधियों को नए अवसर मिल रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में पीड़ित जितनी जल्दी शिकायत दर्ज करे, रकम वापस मिलने की संभावना उतनी ही अधिक होती है। इंदौर पुलिस का यह मामला साइबर ठगी से निपटने में त्वरित प्रतिक्रिया की अहमियत को रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह एक-एक सफलता की कहानी उस बड़े संकट को नहीं छिपा सकती जो डिजिटल लेनदेन की बढ़ती रफ़्तार के साथ और गहरा होता जा रहा है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंदौर में कपड़ा व्यापारी के साथ किस तरह की ऑनलाइन ठगी हुई?
कपड़ा व्यापारी विशाल को व्हाट्सएप पर एक अज्ञात व्यक्ति ने बिजली विभाग का अधिकारी बताकर संपर्क किया और बिजली कनेक्शन काटने की धमकी देकर एक फर्जी लिंक भेजा। लिंक पर क्लिक करते ही उनके क्रेडिट कार्ड से ₹1,45,000 अनधिकृत रूप से ट्रांसफर हो गए।
इंदौर पुलिस ने ठगी की रकम कैसे वापस दिलाई?
क्राइम ब्रांच इंदौर ने तत्काल जाँच कर पता लगाया कि रकम नाब्रोकर मर्चेंट के माध्यम से संदिग्ध खातों में जाने वाली थी। पुलिस ने 24 घंटे के भीतर हस्तक्षेप कर रकम के खातों में पहुँचने से पहले ही सफलतापूर्वक रिफंड करा दी।
साइबर ठगी से बचने के लिए पुलिस ने क्या सलाह दी है?
इंदौर पुलिस ने कहा है कि गूगल पर दिए गए नंबरों पर विश्वास न करें, अनजान व्यक्ति के कॉल पर बिना पुष्टि किए कोई जानकारी न दें और OTP, पिन या बैंकिंग विवरण किसी से भी साझा न करें। किसी भी सरकारी योजना या बैंक संबंधी कार्य के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित कार्यालय से संपर्क करें।
बिजली बिल के नाम पर होने वाली ऑनलाइन ठगी को कैसे पहचानें?
बिजली विभाग कभी भी व्हाट्सएप पर लिंक भेजकर तत्काल भुगतान की माँग नहीं करता। यदि कोई व्यक्ति फोन या मैसेज पर खुद को बिजली विभाग का अधिकारी बताकर धमकी दे और लिंक भेजे, तो तुरंत संबंधित बिजली कार्यालय के आधिकारिक नंबर पर सत्यापन करें और शिकायत दर्ज कराएँ।
साइबर ठगी होने पर क्या करें और कहाँ शिकायत करें?
साइबर ठगी होने पर तुरंत नज़दीकी पुलिस थाने या साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करें। जितनी जल्दी शिकायत होगी, रकम वापस मिलने की संभावना उतनी अधिक होगी — जैसा कि इंदौर के इस मामले में 24 घंटे में रिफंड से साबित हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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