इंदौर में साइबर फ्रॉड: क्राइम ब्रांच ने ₹6.79 करोड़ वापस दिलाए, 450 फर्जी अकाउंट ब्लॉक
सारांश
मुख्य बातें
इंदौर में साइबर धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं ने मध्य प्रदेश पुलिस की चिंता गहरी कर दी है। इंदौर क्राइम ब्रांच ने इस वर्ष अब तक पीड़ितों को ₹6 करोड़ 79 लाख 63 हजार 17 रुपये वापस दिलाए हैं और 350 से अधिक हैक्ड सोशल मीडिया अकाउंट्स को रिकवर कराया है। पुलिस अब व्यापक जागरूकता अभियान के जरिए नागरिकों को साइबर ठगी के नए-नए तरीकों से आगाह कर रही है।
मुख्य आँकड़े और उपलब्धियाँ
इंदौर क्राइम ब्रांच के अनुसार, साल 2026 में अब तक नाम और फोटो का दुरुपयोग कर बनाए गए 450 से अधिक फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक कराए जा चुके हैं। इसके साथ ही 350 से ज्यादा वैध अकाउंट्स को ठगों के कब्जे से मुक्त करा कर पीड़ितों को सौंपा गया है। ये आँकड़े बताते हैं कि इंदौर जैसे व्यापारिक और तकनीकी रूप से सक्रिय शहर में साइबर अपराधियों की सक्रियता किस स्तर पर है।
साइबर फ्रॉड के प्रमुख तरीके
पुलिस ने जागरूकता अभियान में साइबर ठगी के कई प्रचलित तरीकों की पहचान की है। एपीके फ्रॉड में फर्जी ऐप के जरिए मोबाइल का रिमोट एक्सेस लेकर बैंक खाते से राशि निकाल ली जाती है। इन्वेस्टमेंट एवं टास्क फ्रॉड में ऑनलाइन ट्रेडिंग, गेमिंग और 'वर्क फ्रॉम होम' का लालच देकर ठगी की जाती है।
डिजिटल अरेस्ट के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं, जिनमें ठग फर्जी पुलिस, सीबीआई या कस्टम अधिकारी बनकर पीड़ित को डराते हैं और रकम ऐंठ लेते हैं। इसके अलावा एआई डीपफेक एवं वॉइस क्लोनिंग तकनीक से किसी परिचित की आवाज या चेहरे की नकल कर 'आपातकालीन स्थिति' का बहाना बनाकर पैसे माँगे जाते हैं।
फर्जी लोन ऐप के जरिए तत्काल कर्ज देने का झाँसा देकर मनमाना ब्याज वसूला जाता है और व्यक्तिगत फोटो से ब्लैकमेल भी किया जाता है। बैंकिंग एवं केवाईसी फ्रॉड में ठग बैंक अधिकारी बनकर केवाईसी, पैन या क्रेडिट कार्ड अपडेट के नाम पर जानकारी हासिल कर लेते हैं।
बिजली बिल फ्रॉड — सबसे आसान तरीका
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधियों के लिए सबसे सरल और प्रचलित तरीका बिजली बिल फ्रॉड है। इसमें बिजली कनेक्शन काटने का फर्जी एसएमएस भेजा जाता है, उसके बाद पीड़ित से रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवाया जाता है और बैंक में जमा राशि हड़प ली जाती है। यह तरीका इसलिए घातक है क्योंकि डर और जल्दबाजी में लोग बिना सोचे लिंक पर क्लिक कर देते हैं।
पुलिस की सलाह — जितनी जल्दी, उतना बेहतर
इंदौर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर धोखाधड़ी की सूचना जितनी जल्दी दी जाए, ठगी की राशि को संबंधित बैंक खाते में होल्ड कराने और वापस पाने की संभावना उतनी अधिक रहती है। पुलिस ने जागरूकता के लिए पोस्टर भी जारी किए हैं और सार्वजनिक स्थानों पर अभियान चलाया जा रहा है। नागरिकों को किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या ऐप से तुरंत सतर्क होने और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है। डिजिटल अपराध के इस बदलते स्वरूप के खिलाफ जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।