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इंदौर में साइबर फ्रॉड: क्राइम ब्रांच ने ₹6.79 करोड़ वापस दिलाए, 450 फर्जी अकाउंट ब्लॉक

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इंदौर में साइबर फ्रॉड: क्राइम ब्रांच ने ₹6.79 करोड़ वापस दिलाए, 450 फर्जी अकाउंट ब्लॉक

सारांश

इंदौर क्राइम ब्रांच ने इस साल ₹6.79 करोड़ की ठगी की राशि वापस दिलाई और 450 से ज्यादा फर्जी अकाउंट ब्लॉक कराए। डिजिटल अरेस्ट, डीपफेक और बिजली बिल जैसे नए तरीके अपनाकर साइबर अपराधी इंदौर में सक्रिय हैं — पुलिस अब जागरूकता अभियान के जरिए नागरिकों को आगाह कर रही है।

मुख्य बातें

इंदौर क्राइम ब्रांच ने इस वर्ष साइबर पीड़ितों को ₹6 करोड़ 79 लाख 63 हजार 17 रुपये वापस दिलाए।
350 से अधिक हैक्ड सोशल मीडिया अकाउंट रिकवर और 450 से अधिक फर्जी अकाउंट ब्लॉक कराए गए।
डिजिटल अरेस्ट , एआई डीपफेक , वॉइस क्लोनिंग और फर्जी बिजली बिल एसएमएस साइबर ठगी के नए प्रमुख तरीके हैं।
फर्जी लोन ऐप के जरिए ब्लैकमेल और मनमाना ब्याज वसूलना भी सामने आया है।
पुलिस ने सलाह दी है कि फ्रॉड की सूचना जितनी जल्दी दें, राशि वापसी की संभावना उतनी अधिक; शिकायत के लिए हेल्पलाइन 1930 उपलब्ध।

इंदौर में साइबर धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं ने मध्य प्रदेश पुलिस की चिंता गहरी कर दी है। इंदौर क्राइम ब्रांच ने इस वर्ष अब तक पीड़ितों को ₹6 करोड़ 79 लाख 63 हजार 17 रुपये वापस दिलाए हैं और 350 से अधिक हैक्ड सोशल मीडिया अकाउंट्स को रिकवर कराया है। पुलिस अब व्यापक जागरूकता अभियान के जरिए नागरिकों को साइबर ठगी के नए-नए तरीकों से आगाह कर रही है।

मुख्य आँकड़े और उपलब्धियाँ

इंदौर क्राइम ब्रांच के अनुसार, साल 2026 में अब तक नाम और फोटो का दुरुपयोग कर बनाए गए 450 से अधिक फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक कराए जा चुके हैं। इसके साथ ही 350 से ज्यादा वैध अकाउंट्स को ठगों के कब्जे से मुक्त करा कर पीड़ितों को सौंपा गया है। ये आँकड़े बताते हैं कि इंदौर जैसे व्यापारिक और तकनीकी रूप से सक्रिय शहर में साइबर अपराधियों की सक्रियता किस स्तर पर है।

साइबर फ्रॉड के प्रमुख तरीके

पुलिस ने जागरूकता अभियान में साइबर ठगी के कई प्रचलित तरीकों की पहचान की है। एपीके फ्रॉड में फर्जी ऐप के जरिए मोबाइल का रिमोट एक्सेस लेकर बैंक खाते से राशि निकाल ली जाती है। इन्वेस्टमेंट एवं टास्क फ्रॉड में ऑनलाइन ट्रेडिंग, गेमिंग और 'वर्क फ्रॉम होम' का लालच देकर ठगी की जाती है।

डिजिटल अरेस्ट के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं, जिनमें ठग फर्जी पुलिस, सीबीआई या कस्टम अधिकारी बनकर पीड़ित को डराते हैं और रकम ऐंठ लेते हैं। इसके अलावा एआई डीपफेक एवं वॉइस क्लोनिंग तकनीक से किसी परिचित की आवाज या चेहरे की नकल कर 'आपातकालीन स्थिति' का बहाना बनाकर पैसे माँगे जाते हैं।

फर्जी लोन ऐप के जरिए तत्काल कर्ज देने का झाँसा देकर मनमाना ब्याज वसूला जाता है और व्यक्तिगत फोटो से ब्लैकमेल भी किया जाता है। बैंकिंग एवं केवाईसी फ्रॉड में ठग बैंक अधिकारी बनकर केवाईसी, पैन या क्रेडिट कार्ड अपडेट के नाम पर जानकारी हासिल कर लेते हैं।

बिजली बिल फ्रॉड — सबसे आसान तरीका

पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधियों के लिए सबसे सरल और प्रचलित तरीका बिजली बिल फ्रॉड है। इसमें बिजली कनेक्शन काटने का फर्जी एसएमएस भेजा जाता है, उसके बाद पीड़ित से रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवाया जाता है और बैंक में जमा राशि हड़प ली जाती है। यह तरीका इसलिए घातक है क्योंकि डर और जल्दबाजी में लोग बिना सोचे लिंक पर क्लिक कर देते हैं।

पुलिस की सलाह — जितनी जल्दी, उतना बेहतर

इंदौर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर धोखाधड़ी की सूचना जितनी जल्दी दी जाए, ठगी की राशि को संबंधित बैंक खाते में होल्ड कराने और वापस पाने की संभावना उतनी अधिक रहती है। पुलिस ने जागरूकता के लिए पोस्टर भी जारी किए हैं और सार्वजनिक स्थानों पर अभियान चलाया जा रहा है। नागरिकों को किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या ऐप से तुरंत सतर्क होने और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है। डिजिटल अपराध के इस बदलते स्वरूप के खिलाफ जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जितनी राशि वापस हो रही है, उससे कहीं ज्यादा अभी भी ठगों की जेब में जा रही है। डिजिटल अरेस्ट और डीपफेक जैसे तरीके बता रहे हैं कि साइबर अपराधी तकनीक में पुलिस से आगे हैं। जागरूकता पोस्टर और अभियान ज़रूरी हैं, पर पर्याप्त नहीं — जब तक साइबर ठगी की एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया सरल और तेज नहीं होती, तब तक बड़ी संख्या में पीड़ित चुप रहना ही पसंद करेंगे।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंदौर क्राइम ब्रांच ने साइबर फ्रॉड में कितनी राशि वापस दिलाई है?
इंदौर क्राइम ब्रांच ने इस वर्ष साइबर पीड़ितों को कुल ₹6 करोड़ 79 लाख 63 हजार 17 रुपये वापस दिलाए हैं। इसके साथ 350 से अधिक हैक्ड सोशल मीडिया अकाउंट भी रिकवर कराए गए हैं।
डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड क्या होता है?
डिजिटल अरेस्ट में ठग फर्जी पुलिस, सीबीआई या कस्टम अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर पीड़ित को डराते हैं और कहते हैं कि उन्हें 'डिजिटल हिरासत' में लिया जा रहा है। डर में पीड़ित मोटी रकम ट्रांसफर कर देता है।
साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत क्या करें?
पुलिस की सलाह है कि साइबर ठगी की सूचना तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, ठगी की राशि संबंधित बैंक खाते में होल्ड कराने और वापस पाने की संभावना उतनी अधिक रहती है।
बिजली बिल फ्रॉड से कैसे बचें?
बिजली कनेक्शन काटने का कोई भी एसएमएस आए तो घबराएँ नहीं और उसमें दिए लिंक पर क्लिक न करें। ऐसे किसी भी एसएमएस की जाँच सीधे बिजली वितरण कंपनी के आधिकारिक नंबर पर करें और कभी भी अनजान ऐप डाउनलोड न करें।
एआई डीपफेक और वॉइस क्लोनिंग फ्रॉड क्या है?
इस तरीके में साइबर अपराधी एआई तकनीक से किसी परिचित या रिश्तेदार की आवाज या चेहरे की नकल तैयार करते हैं और आपातकाल का बहाना बनाकर पैसे माँगते हैं। ऐसी किसी भी कॉल या वीडियो पर तुरंत भरोसा न करें — पहले उस व्यक्ति से सीधे संपर्क करें।
राष्ट्र प्रेस
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