जंतर-मंतर पुलिस कार्रवाई: सुप्रीम कोर्ट ने हाईपावर कमेटी को 1 माह में रिपोर्ट देने का आदेश दिया
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 5 नवंबर 2026 को जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की जाँच कर रही हाईपावर कमेटी को सख्त निर्देश दिए कि वह 1 महीने के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट दाखिल करे। अदालत ने स्पष्ट कहा कि रिपोर्ट के लिए अनिश्चितकाल तक प्रतीक्षा संभव नहीं है।
कोर्ट की मुख्य टिप्पणियाँ
सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी की 31 अक्टूबर को पेश की गई रिपोर्ट को केवल 'प्रगति-विवरण' बताते हुए नाकाफी ठहराया। अदालत ने कहा कि इस रिपोर्ट में आरोपों पर कोई ठोस निष्कर्ष नहीं है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि कमेटी अब तक प्राप्त सभी दस्तावेजों, वीडियो और अन्य साक्ष्यों की विस्तृत जाँच करे और संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब करे।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि कमेटी अपनी जाँच को केवल पीड़ितों की प्रत्यक्ष शिकायतों तक सीमित न रखे, बल्कि वकीलों और अन्य माध्यमों से पेश किए गए साक्ष्यों पर भी उचित विचार करे।
कमेटी की स्थिति और शिकायतों की कमी
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने बताया कि कमेटी का पोर्टल लगभग तीन सप्ताह पहले ही शुरू हुआ है और अभी तक केवल कुछ ही शिकायतें ऑनलाइन दर्ज हुई हैं। ईमेल, डाक या प्रत्यक्ष रूप से अब तक कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई।
सीजेआई ने कहा, 'हमारी पहली चिंता यह है कि शिकायतकर्ता अपनी बात कमेटी के सामने रख सकें।' उन्होंने बताया कि शिकायत के लिए एक पोर्टल और ईमेल दोनों उपलब्ध कराए गए हैं।
गौरतलब है कि कमेटी ने 26 अक्टूबर को एक बैठक की थी, जिसका मीडिया के ज़रिए प्रचार किया गया था और प्रदर्शनकारियों को नोटिस भी भेजे गए थे। बावजूद इसके, 29 अक्टूबर को केवल एक शिकायतकर्ता उपस्थित हुआ और उसने हलफनामा दाखिल किया।
हाईपावर कमेटी का गठन और जाँच का दायरा
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस और प्रदर्शनकारियों द्वारा एक-दूसरे पर लगाए गए आरोपों की जाँच के लिए सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय हाईपावर कमेटी का गठन किया था। कमेटी को विशेष रूप से निम्न बिंदुओं की जाँच सौंपी गई थी — पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप, महिला प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाकर हिंसा के आरोप, दोनों पक्षों द्वारा की गई अत्यधिक हिंसा, और संपत्ति को हुए नुकसान।
कमेटी ने गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय में सीलबंद लिफाफे में अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश की। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि अगस्त में कमेटी के गठन के बावजूद जाँच में प्रगति का अभाव चिंताजनक है।
केंद्र सरकार और अगली सुनवाई
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार की ओर से याचिकाओं पर जवाब तैयार कर लिया गया है और उसे शीघ्र दाखिल किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि जब कमेटी उन विशेष मुद्दों पर निष्कर्ष पर पहुँचेगी जो उसे सौंपे गए हैं, तब उन्हें साझा किया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है।