18 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जंतर-मंतर प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों पर दंडात्मक कार्रवाई रोकी, हाईपावर कमेटी गठन का ऐलान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जंतर-मंतर प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों पर दंडात्मक कार्रवाई रोकी, हाईपावर कमेटी गठन का ऐलान

सारांश

जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने शांतिपूर्ण छात्रों को राहत देते हुए दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने हाईपावर कमेटी के गठन का ऐलान किया, जिसमें सीबीआई के पूर्व महानिदेशक और एक राज्य के पूर्व डीजीपी शामिल होंगे। बुधवार को आधिकारिक घोषणा होगी।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 18 अगस्त को आदेश दिया कि जंतर-मंतर पर 20 जुलाई के प्रदर्शन में शामिल शांतिपूर्ण छात्रों के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई न हो।
हत्या, बलात्कार और पॉक्सो जैसे गंभीर अपराधों के रिकॉर्ड वाले 2,873 व्यक्तियों की जाँच जारी रहेगी।
झड़प में 200 से अधिक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए — सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुसार।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाईपावर कमेटी के गठन का निर्णय लिया, जिसमें सीबीआई के पूर्व महानिदेशक और एक राज्य के पूर्व डीजीपी शामिल होंगे।
कमेटी के सदस्यों के नाम बुधवार को सार्वजनिक किए जाएंगे; दोनों पक्षों को नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश।
याचिकाकर्ता वृंदा ग्रोवर ने पैलेट गन से घायलों और पूर्व सैनिक की पत्नी सुदेश के साथ कथित प्रताड़ना का मुद्दा उठाया।

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार, 18 अगस्त को जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि हत्या, बलात्कार और पॉक्सो जैसे गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों को छोड़कर शेष प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी घोषणा की कि पूरे मामले की जाँच के लिए एक हाईपावर कमेटी का गठन किया जाएगा, जिसकी औपचारिक घोषणा बुधवार को होगी।

मुख्य न्यायिक निर्देश

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, 'जिन प्रदर्शनकारियों के आपराधिक रिकॉर्ड में हत्या, रेप, पॉक्सो जैसे गंभीर अपराध के मुकदमे हैं, उन्हें छोड़कर बाकी के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।' सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार की ओर से इस निर्देश से सहमति जताई। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि छात्र शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रख रहे थे और उनका उद्देश्य कानूनी व संवैधानिक दायरे में अपने मुद्दे उठाना था।

हाईपावर कमेटी का गठन

सर्वोच्च न्यायालय ने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच के लिए एक हाईपावर कमेटी बनाने का निर्णय लिया। यह कमेटी पूर्व न्यायाधीशों और डीजीपी स्तर के सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों की देखरेख में काम करेगी। मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि कमेटी में सीबीआई के एक पूर्व महानिदेशक और एक राज्य के पूर्व डीजीपी को शामिल करने पर सहमति बनी है, जिनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है। सदस्यों के नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं ताकि संबंधित अधिकारियों को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।

कमेटी की कार्यप्रणाली

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कमेटी केवल एक गोपनीय रिपोर्ट सौंपकर अपना काम समाप्त नहीं करेगी। जैसे-जैसे नए तथ्य और मामले सामने आएंगे, कमेटी समय-समय पर रिपोर्ट देगी ताकि न्यायालय आगे के निर्देश जारी कर सके। दोनों पक्षों को एक-एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है, जो सभी साक्ष्य और सामग्री कोर्ट तक पहुँचाएंगे।

दोनों पक्षों के तर्क

याचिकाकर्ताओं की वकील वृंदा ग्रोवर ने पैलेट गन से घायल हुए प्रदर्शनकारियों का मुद्दा उठाया। एक याचिकाकर्ता ने पूर्व सैनिक की पत्नी सुदेश के साथ कथित तौर पर हुई प्रताड़ना का विषय भी कोर्ट के समक्ष रखा। वहीं घायल पुलिसकर्मियों की वकील ने बताया कि पुलिस पर पथराव किया गया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि पुलिस ने अब तक 2,873 ऐसे लोगों की पहचान की है जिनके आपराधिक रिकॉर्ड हैं और इस झड़प में 200 से अधिक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

प्रदर्शन स्थल और आगे की राह

सुनवाई के दौरान एक वकील ने सरकार के उस प्रस्ताव का उल्लेख किया जिसमें जंतर-मंतर से प्रदर्शन स्थल को स्थानांतरित करने की बात है। मुख्य न्यायाधीश ने इसे प्रशासनिक विषय बताते हुए कहा कि विशेषज्ञ इसकी व्यावहारिकता का आकलन कर सकते हैं। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सुनवाई के दौरान कहा कि दोनों पक्षों ने अपने तर्क स्पष्ट रूप से रख दिए हैं और अब आगे की कार्यवाही तय की जाए। कोर्ट बुधवार को हाईपावर कमेटी के सदस्यों की आधिकारिक घोषणा करेगा, जिसके बाद जाँच की दिशा और दायरा स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुई हिंसा की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी — और हाईपावर कमेटी क्या वह जवाब दे पाएगी जो राज्य की जाँच एजेंसियाँ नहीं दे सकीं। 2,873 आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों की पहचान का आँकड़ा और 200 से अधिक घायल पुलिसकर्मी — दोनों तथ्य एक-साथ यह दर्शाते हैं कि यह प्रदर्शन कितनी जल्दी जटिल हो गया था। कमेटी की संरचना स्वतंत्र दिखती है, परंतु उसकी रिपोर्टों की समयसीमा और बाध्यकारी शक्ति अभी अस्पष्ट है। पैलेट गन के इस्तेमाल और सुदेश जैसे मामलों पर जब तक जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक यह कमेटी भी महज एक प्रक्रिया बनकर रह सकती है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में क्या आदेश दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 18 अगस्त को निर्देश दिया कि हत्या, बलात्कार और पॉक्सो जैसे गंभीर अपराधों के रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों को छोड़कर शेष प्रदर्शनकारियों — विशेषकर छात्रों — के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई उचित नहीं है।
हाईपावर कमेटी क्या है और इसमें कौन शामिल होगा?
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित यह स्वतंत्र जाँच समिति पूर्व न्यायाधीशों और डीजीपी स्तर के सेवानिवृत्त अधिकारियों की देखरेख में काम करेगी। इसमें सीबीआई के एक पूर्व महानिदेशक और एक राज्य के पूर्व डीजीपी को शामिल करने पर सहमति बनी है। सदस्यों के नाम बुधवार को आधिकारिक रूप से घोषित किए जाएंगे।
20 जुलाई के जंतर-मंतर प्रदर्शन में कितने लोग घायल हुए थे?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि झड़प में 200 से अधिक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसके अलावा याचिकाकर्ताओं की वकील वृंदा ग्रोवर ने पैलेट गन से घायल प्रदर्शनकारियों का भी मुद्दा उठाया।
आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों की पहचान का क्या मतलब है?
सॉलिसिटर जनरल के अनुसार पुलिस ने प्रदर्शनकारियों में से 2,873 ऐसे व्यक्तियों की पहचान की है जिनके पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत केवल इन्हीं लोगों — विशेषकर गंभीर अपराधों में संलिप्त — की जाँच जारी रह सकती है, शेष प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई रोकी गई है।
जंतर-मंतर से प्रदर्शन स्थल बदलने का प्रस्ताव क्या है?
सुनवाई के दौरान एक याचिका में और सरकारी प्रस्ताव में जंतर-मंतर की जगह किसी अन्य स्थान को धरना-प्रदर्शन के लिए निर्धारित करने की माँग उठाई गई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इसे प्रशासनिक विषय बताया और कहा कि विशेषज्ञ इसकी व्यावहारिकता का मूल्यांकन कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले