बजट 2027-28: एसोचैम ने LTCG घटाकर 10% और STT क्रेडिट देने की सिफारिश की
सारांश
मुख्य बातें
उद्योग संगठन एसोचैम (ASSOCHAM) ने 5 नवंबर 2026 को केंद्रीय बजट 2027-28 के लिए सरकार को सौंपे अपने प्री-बजट ज्ञापन में दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (LTCG) और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को तर्कसंगत बनाने समेत व्यापक कर सुधारों की माँग की है। संगठन का तर्क है कि एक स्थिर, पूर्वानुमेय और निवेशकों के अनुकूल कर ढाँचा भारत को वैश्विक निवेश और विनिर्माण केंद्र के रूप में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
LTCG और STT पर मुख्य सिफारिशें
एसोचैम ने सुझाव दिया है कि एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष से कम अवधि तक रखी गई प्रतिभूतियों पर LTCG दर घटाकर 10 प्रतिशत की जाए। वहीं दो वर्ष से अधिक अवधि तक निवेश बनाए रखने वाले निवेशकों के लिए शून्य या लगभग 5 प्रतिशत की रियायती दर लागू करने पर विचार किया जाए।
वैकल्पिक प्रस्ताव के रूप में उद्योग संगठन ने माँग की है कि दीर्घकालिक निवेशकों को उनकी LTCG कर देनदारी के विरुद्ध STT का क्रेडिट दिया जाए। एसोचैम का मानना है कि LTCG और STT के संयुक्त बोझ में कमी से दीर्घकालिक पूँजी बाज़ार भागीदारी को प्रोत्साहन मिलेगा और निवेशकों का भरोसा मज़बूत होगा।
प्रत्यक्ष कर सुधार: विनिर्माण और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज़ोर
प्रत्यक्ष कर सुधारों के तहत एसोचैम ने नए विनिर्माण उद्यमों — विशेष रूप से रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में कार्यरत कंपनियों — के लिए रियायती कर व्यवस्था बहाल करने की सिफारिश की है। संगठन ने आयकर अधिनियम, 1961 की पूर्ववर्ती धारा 115बीएबी जैसी व्यवस्था को उचित पात्रता शर्तों और लंबी अवधि के साथ फिर से लागू करने का सुझाव दिया है, ताकि निवेश, रोज़गार सृजन और निर्यात प्रतिस्पर्धा को बल मिले।
डिजिटल बुनियादी ढाँचे के संदर्भ में एसोचैम ने डेटा सेंटर भवनों, फाइबर-ऑप्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कूलिंग सिस्टम और ऊर्जा-कुशल 5G नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अलग परिसंपत्ति वर्गीकरण और तीव्र मूल्यह्रास लाभ देने की माँग की है। साथ ही विदेशी कंपनियों के लिए कर नियमों में स्पष्टता लाने का आग्रह किया गया है, विशेष रूप से उन कंपनियों के लिए जो भारतीय पुनर्विक्रेता संस्थाओं के ज़रिए डिजिटल कंटेंट और क्लाउड सेवाएँ देती हैं।
MAT सुधार और कर विवाद समाधान
एसोचैम ने न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) व्यवस्था में सुधार का प्रस्ताव रखा है — विशेष रूप से उन कंपनियों के लिए जिन्होंने 31 मार्च 2026 से पहले रियायती कर व्यवस्था अपनाई थी, तथा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों (IFSC) में कार्यरत विदेशी कंपनियों की इकाइयों के लिए।
कर विवाद कम करने के लिए उद्योग निकाय ने दंड आदेशों के लिए अलग कार्यवाही, प्रत्येक मुद्दे पर स्पष्ट आरोप-विवरण, दंड राहत प्रावधानों का विस्तार और आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) में मामले लंबित रहने तक दंड वसूली पर रोक जैसे सुझाव दिए हैं। इसके अतिरिक्त विवाद समाधान समिति की पात्रता सीमा ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹10 करोड़ करने और बोर्ड फॉर एडवांस रूलिंग्स को अधिक प्रभावी बनाने की माँग भी की गई है।
अप्रत्यक्ष कर: ₹1.5 लाख करोड़ के सीमा शुल्क विवादों के लिए एमनेस्टी योजना
अप्रत्यक्ष करों के क्षेत्र में एसोचैम ने लगभग ₹1.5 लाख करोड़ के पुराने सीमा शुल्क विवादों के समाधान के लिए एकमुश्त कस्टम्स विवाद समाधान (एमनेस्टी) योजना शुरू करने का सुझाव दिया है। साथ ही अपीलीय आदेशों के बाद स्वतः रिफंड, एक समान प्री-डिपॉजिट प्रणाली और समान प्रकृति के मामलों के लिए एकीकृत मूल्यांकन व अपील प्रक्रिया लागू करने की माँग रखी गई है।
भारत के बढ़ते मुक्त व्यापार समझौता (FTA) नेटवर्क को ध्यान में रखते हुए एसोचैम ने धारा 28डीए और CAROTAR 2020 के तहत मूल स्थान सत्यापन प्रक्रियाओं को सरल बनाने की माँग की है। इसके लिए जोखिम-आधारित सुरक्षा आवश्यकताओं, समयबद्ध सत्यापन प्रक्रिया और डिजिटल हस्ताक्षरित मूल प्रमाण-पत्रों की स्वीकृति जैसे उपाय सुझाए गए हैं।
एसोचैम की अपेक्षाएँ
गौरतलब है कि यह प्री-बजट ज्ञापन ऐसे समय आया है जब सरकार वित्त वर्ष 2027-28 के बजट की तैयारियाँ शुरू कर रही है और पूँजी बाज़ारों में निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना नीतिगत प्राथमिकताओं में है। एसोचैम का मानना है कि इन सुधारों से निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा, पूँजी बाज़ार सुदृढ़ होंगे, वैश्विक निवेश प्रवाह को प्रोत्साहन मिलेगा और भारत विनिर्माण तथा निवेश के लिए अधिक आकर्षक गंतव्य बनेगा। आगामी महीनों में वित्त मंत्रालय इन सुझावों पर विचार-विमर्श करेगा।