कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में LOC पर घुसपैठ की कोशिश नाकाम, जुमगुंड में मुठभेड़
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर में 17 अक्टूबर 2026 की सुबह सुरक्षा बलों ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर एक बड़ी घुसपैठ की कोशिश को विफल कर दिया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह घटना जुमगुंड इलाके में हुई, जहाँ जवानों ने संदिग्ध गतिविधि भाँपते हुए घुसपैठियों को ललकारा, जिसके बाद दोनों तरफ से गोलीबारी हुई।
मुख्य घटनाक्रम
सूत्रों ने बताया कि केरन सेक्टर के जुमगुंड इलाके में एलओसी के निकट संदिग्ध हलचल देखे जाने के बाद सतर्क जवानों ने घुसपैठियों को चुनौती दी। इसके बाद कुछ देर तक गोलीबारी का सिलसिला चला। घटना की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है और इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है।
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियाँ सीमा पार घुसपैठ, ड्रोन गतिविधियों और हथियारों की तस्करी को लेकर पहले से ही हाई-अलर्ट पर हैं।
एलओसी की सुरक्षा व्यवस्था
जम्मू-कश्मीर में लगभग 740 किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा है, जो कुपवाड़ा, बांदीपोरा, बारामूला, राजौरी, पुंछ और जम्मू जिलों से होकर गुजरती है। भारतीय सेना इस पूरे खंड की सुरक्षा करती है और यहाँ बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र तैनात है।
इस तंत्र में लगभग 550 किलोमीटर लंबी तारबंद बाड़ शामिल है, जिसकी चौबीसों घंटे निगरानी की जाती है। पुंछ जैसे गेट चेकपॉइंट्स पर डिजिटल बॉर्डर क्रॉसिंग सिस्टम भी लगाए गए हैं ताकि स्थानीय निवासियों की आवाजाही सुव्यवस्थित हो सके।
ड्रोन और तस्करी का बढ़ता खतरा
गौरतलब है कि एलओसी के अलावा जम्मू-कश्मीर में लगभग 200 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा भी है, जो जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों में फैली है। इसकी सुरक्षा सीमा सुरक्षा बल (BSF) की जिम्मेदारी है।
सीमा पार से ड्रोनों के जरिये हथियार, गोला-बारूद, नकदी और नशीले पदार्थ गिराने की घटनाएँ हाल के वर्षों में बढ़ी हैं। सेना और बीएसएफ दोनों इन गतिविधियों पर नजर रखने के लिए तकनीकी साधनों का भी सहारा ले रही हैं।
आगे की स्थिति
सूत्रों के अनुसार, जुमगुंड इलाके में अभियान अभी जारी है और अतिरिक्त विवरण की प्रतीक्षा है। क्षेत्र में अर्धसैनिक बलों की तैनाती और कड़ी कर दी गई है। यह घटना कुपवाड़ा में एलओसी की संवेदनशीलता को एक बार फिर रेखांकित करती है और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता की परीक्षा लेती है।