आईएनएस सुदर्शिनी ने ओमान के सलालाह से 'लोकायन-2026' यात्रा फिर शुरू की, भारत-ओमान नौसेनाओं में बढ़ी दोस्ती
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना का तीन मस्तूलों वाला पाल प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी 17 अक्टूबर 2026 को ओमान के सलालाह बंदरगाह से रवाना होकर अपनी ऐतिहासिक अंतरमहासागरीय यात्रा 'लोकायन-2026' के अगले चरण में आगे बढ़ गया है। यह पोत 14 से 17 अक्टूबर 2026 तक सलालाह में लंगर डाले रहा, जिस दौरान भारत और ओमान की नौसेनाओं के बीच पेशेवर संवाद और मित्रता के अनेक कार्यक्रम आयोजित हुए।
लोकायन-2026 क्या है
लोकायन-2026 भारतीय नौसेना द्वारा शुरू की गई दस महीने लंबी अंतरमहासागरीय पाल यात्रा है, जिसका उद्देश्य भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना और युवा नौसैनिक प्रशिक्षुओं को वास्तविक समुद्री परिस्थितियों में व्यावहारिक अनुभव देना है। पारंपरिक डिज़ाइन पर बना आईएनएस सुदर्शिनी पालों के सहारे अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्रों को पार करते हुए भारत की कूटनीतिक उपस्थिति को भी मज़बूत कर रहा है। यह यात्रा भारत की 'महासागर' परिकल्पना — अर्थात् विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए साझा सहयोग — को व्यावहारिक रूप देती है।
सलालाह में भारत-ओमान नौसेना सहयोग
नौसेना के अनुसार, सलालाह में आईएनएस सुदर्शिनी के चार दिवसीय ठहराव के दौरान दोनों देशों के नौसैनिकों के बीच पेशेवर चर्चाएँ हुईं और खेल गतिविधियों में संयुक्त भागीदारी रही। इन आदान-प्रदानों ने भारत और ओमान की नौसेनाओं के बीच आपसी विश्वास और समन्वय को और सुदृढ़ किया। गौरतलब है कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती समुद्री कूटनीति के संदर्भ में ओमान एक महत्वपूर्ण साझेदार है।
प्रशिक्षुओं को मिल रही व्यावहारिक सीख
पाल के सहारे लंबी समुद्री यात्रा नौसेना के युवा प्रशिक्षुओं को अनुशासन, धैर्य और नेतृत्व की अहम सीख दे रही है। आईएनएस सुदर्शिनी का यह अभियान केवल भौगोलिक दूरियाँ तय करने तक सीमित नहीं है — यह समुद्री परंपरा, साहसिक अन्वेषण और पेशेवर उत्कृष्टता का संगम है। नौसेना के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्रों में मिलने वाला यह व्यावहारिक अनुभव किसी भी कक्षा-प्रशिक्षण से कहीं अधिक प्रभावी होता है।
वसुधैव कुटुंबकम् का समुद्री संदेश
इस अभियान के माध्यम से भारत की प्राचीन सभ्यतागत भावना 'वसुधैव कुटुंबकम्' — अर्थात् पूरी दुनिया एक परिवार है — का संदेश अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्रों तक पहुँचाया जा रहा है। यह यात्रा ऐसे समय में आई है जब भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी नौसैनिक उपस्थिति और कूटनीतिक पहुँच का विस्तार करने पर विशेष बल दे रहा है।
आगे की राह
आईएनएस सुदर्शिनी अपनी दस महीने की यात्रा में अनेक देशों के बंदरगाहों पर रुकते हुए समुद्री सहयोग और सद्भाव के नए रिश्ते बनाता जाएगा। लोकायन-2026 भारतीय नौसेना की वैश्विक पहुँच और समुद्री कूटनीति की दिशा में एक सतत प्रयास है, जो आने वाले महीनों में और अधिक देशों को भारत की मित्रता के दायरे में लाएगा।