आईएनएस सुदर्शिनी न्यूयॉर्क रवाना, 'लोकायन-26' के तहत भारत की समुद्री विरासत का होगा प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना का टॉल शिप आईएनएस सुदर्शिनी 1 जुलाई 2026 को न्यूयॉर्क के लिए रवाना हो गया, जहाँ यह सेल-फोर्थ 250 न्यूयॉर्क और सेल बोस्टन समारोहों में भारत का प्रतिनिधित्व करेगा। यह यात्रा भारत के महत्वाकांक्षी ट्रांसओशैनिक अभियान 'लोकायन-26' का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना और भारत-अमेरिका नौसैनिक सहयोग को और प्रगाढ़ करना है।
न्यूयॉर्क की ओर प्रस्थान
भारतीय नौसेना ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'अगला पड़ाव न्यूयॉर्क। समुद्री यात्रा की पुरानी परंपरा और भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को आगे बढ़ाते हुए आईएनएस सुदर्शिनी न्यूयॉर्क के लिए रवाना हो गया है।' नौसेना ने यह भी कहा कि यह यात्रा देशों के बीच दोस्ती, सहयोग, सद्भावना और आपसी भरोसे के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
बाल्टीमोर में महत्वपूर्ण पड़ाव
न्यूयॉर्क रवाना होने से पहले आईएनएस सुदर्शिनी ने बाल्टीमोर बंदरगाह पर कई अहम कार्यक्रमों में भाग लिया। इस दौरान अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा और मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर जहाज पर पधारे। जहाज के चालक दल ने सेल-टू-फिफ्टी मैरीलैंड के तहत आयोजित बाल्टीमोर सिटी परेड में भी हिस्सा लिया।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बाल्टीमोर बंदरगाह पर आईएनएस सुदर्शिनी की उपस्थिति भारत की समृद्ध समुद्री परंपरा और भारत-अमेरिका नौसेनाओं के बीच दशकों से चले आ रहे सहयोग एवं मित्रता का प्रतीक है। भारतीय नौसेना ने एक्स पर लिखा, 'अटलांटिक के पार समुद्री रिश्तों को मजबूत करते हुए।'
लोकायन-26 अभियान का सफर
'लोकायन-26' अभियान के अंतर्गत आईएनएस सुदर्शिनी 26 जून को वर्जीनिया के नॉरफॉक से रवाना होकर बाल्टीमोर पहुँचा। इस दौरान जहाज ऐतिहासिक चेसापीक एंड डेलावेयर (सी एंड डी) नहर से होकर गुजरा और मिड-अटलांटिक क्षेत्र के कई प्रमुख पुलों के नीचे से निकला — जो अपने आप में एक उल्लेखनीय नौसैनिक उपलब्धि है।
इससे पहले, जहाज ने 19 से 23 जून तक नॉरफॉक में आयोजित 'सेल टू-फिफ्टी वर्जीनिया' समारोह में भी भाग लिया, जिसमें दुनिया भर के कई टॉल शिप एकत्रित हुए थे। आईएनएस सुदर्शिनी ने परेड ऑफ सेल और सिटी क्रू परेड में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
भारत-अमेरिका समुद्री संबंधों पर असर
यह अभियान ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका अपने रणनीतिक साझेदारी को नए आयाम दे रहे हैं। गौरतलब है कि टॉल शिप कार्यक्रमों में भागीदारी केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि नौसैनिक कूटनीति का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। आईएनएस सुदर्शिनी की यह यात्रा समुद्री सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आपसी विश्वास निर्माण के भारत के व्यापक लक्ष्यों को आगे बढ़ाती है।
आगे क्या
न्यूयॉर्क के बाद आईएनएस सुदर्शिनी सेल बोस्टन कार्यक्रम में भाग लेगा, जो 'लोकायन-26' के तहत इस ट्रांसओशैनिक यात्रा का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। यह अभियान भारतीय नौसेना की वैश्विक उपस्थिति और समुद्री कूटनीति को नई ऊँचाई देने का प्रयास है।