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'लफ्ज, सुर और सफर': इरशाद कामिल और सतिंदर सरताज 26 जुलाई को पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्रों से करेंगे संवाद

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'लफ्ज, सुर और सफर': इरशाद कामिल और सतिंदर सरताज 26 जुलाई को पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्रों से करेंगे संवाद

सारांश

गीतकार इरशाद कामिल और सूफी गायक सतिंदर सरताज 26 जुलाई को अपनी मातृ संस्था पंजाब यूनिवर्सिटी लौट रहे हैं। 'लफ्ज, सुर और सफर' कार्यक्रम में वे छात्रों के साथ अपने रचनात्मक सफर की कहानियाँ साझा करेंगे — यह एक पीढ़ीगत संवाद है जो शब्द, सुर और संघर्ष को एक मंच पर लाता है।

मुख्य बातें

26 जुलाई को पंजाब यूनिवर्सिटी कन्वेंशन सेंटर, चंडीगढ़ में 'लफ्ज, सुर और सफर' कार्यक्रम का आयोजन।
गीतकार इरशाद कामिल और सूफी गायक-कवि सतिंदर सरताज — दोनों पंजाब यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र — छात्रों से संवाद करेंगे।
कार्यक्रम PUAA और CCF के संयुक्त सहयोग से आयोजित; प्रवेश निशुल्क , किंतु पंजीकरण अनिवार्य ।
संचालन शिक्षाविद पुष्पिंदर स्याल और अर्चना आर.
सीटें सीमित; प्रतिभागियों को प्रवेश के लिए वैध पहचान पत्र साथ लाना अनिवार्य।

गीतकार इरशाद कामिल और अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त सूफी गायक-कवि सतिंदर सरताज — दोनों पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ के पूर्व छात्र — 26 जुलाई को अपनी मातृ संस्था में लौटेंगे और छात्रों के साथ अपने रचनात्मक सफर के अनुभव साझा करेंगे। यह विशेष बातचीत कार्यक्रम 'लफ्ज, सुर और सफर' के नाम से पंजाब यूनिवर्सिटी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया जाएगा।

कार्यक्रम का स्वरूप और आयोजन

यह आयोजन पंजाब यूनिवर्सिटी एलुमनाई एसोसिएशन (PUAA) और चंडीगढ़ सिटिजंस फाउंडेशन (CCF) के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है। कार्यक्रम पारंपरिक मंच-प्रस्तुति की बजाय एक खुले संवाद के रूप में होगा, जिसमें दोनों कलाकार अपने जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों, संघर्षों और उन अनुभवों पर बात करेंगे जिन्होंने उन्हें आज की ऊँचाई तक पहुँचाया।

इस बातचीत का संचालन शिक्षाविद पुष्पिंदर स्याल और अर्चना आर. सिंह करेंगी, जो दोनों कलाकारों से साहित्य, संगीत और रचनात्मकता से जुड़े सवाल पूछेंगी। प्रवेश निशुल्क है, किंतु पंजीकरण अनिवार्य है। सीटें सीमित होने के कारण विश्वविद्यालय ने जल्द पंजीकरण कराने की सलाह दी है। सभी प्रतिभागियों को प्रवेश के लिए वैध पहचान पत्र साथ लाना होगा।

इरशाद कामिल: साहित्यिक गहराई और बॉलीवुड की आवाज़

इरशाद कामिल देश के सबसे प्रतिष्ठित गीतकारों में से एक हैं और सर्वश्रेष्ठ गीतकार के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। उन्होंने हिंदी सिनेमा को 'कुन फाया कुन', 'नादान परिंदे', 'अगर तुम साथ हो', 'फिर से उड़ चला', 'शायद' और 'बेखयाली' जैसे कालजयी गीत दिए हैं।

गौरतलब है कि कामिल ने पंजाब यूनिवर्सिटी का एंथम 'शान-ओ-शौकत' भी लिखा है, जो इस संस्था से उनके गहरे जुड़ाव का प्रमाण है। उनकी लेखनी साहित्यिक परंपरा और समकालीन अभिव्यक्ति के अनूठे संगम के लिए जानी जाती है।

सतिंदर सरताज: सूफी संगीत का वैश्विक चेहरा

सतिंदर सरताज सूफी गायन, कविता और गीत-लेखन में अंतरराष्ट्रीय पहचान रखते हैं। 'साईं', 'उड़ारियां', 'मासूमियत', 'मैं ते मेरी जान', 'इबादत' और 'रुतबा' जैसी रचनाओं के ज़रिए उन्होंने पंजाबी कविता और सूफी संगीत को वैश्विक श्रोताओं तक पहुँचाया है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय विश्वविद्यालय अपने पूर्व छात्रों को युवा पीढ़ी से जोड़ने के लिए नए रास्ते तलाश रहे हैं। सरताज का यह दौरा पंजाबी साहित्य को मुख्यधारा में लाने की उनकी दशकों लंबी यात्रा का एक और पड़ाव है।

विश्वविद्यालय का उद्देश्य और छात्रों पर असर

पंजाब यूनिवर्सिटी की कुलपति रेणु विग ने कहा कि यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय परिसर और संबद्ध कॉलेजों के नए छात्रों के लिए एक प्रेरणादायक स्वागत होगा। उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों को दोबारा आमंत्रित करने से विश्वविद्यालय और एलुमनाई के बीच संबंध और प्रगाढ़ होंगे तथा छात्रों और समाज के साथ सार्थक संवाद को बल मिलेगा।

यह कार्यक्रम पूर्व छात्रों, विश्वविद्यालय एवं संबद्ध कॉलेजों के छात्रों, साहित्य प्रेमियों, कलाकारों और संस्कृति में रुचि रखने वाले सभी लोगों के लिए खुला है। दोनों कलाकारों की उपस्थिति इस आयोजन को महज़ एक कार्यक्रम से आगे ले जाकर एक पीढ़ीगत संवाद का रूप देती है — जहाँ शब्द, सुर और जीवन का सफर एक साथ मिलते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूरक हैं। हालाँकि, असली सवाल यह है कि क्या ऐसे एकल आयोजन दीर्घकालिक मार्गदर्शन कार्यक्रमों में तब्दील होते हैं, या महज़ एक यादगार शाम बनकर रह जाते हैं। कला और साहित्य में करियर बनाने की चाहत रखने वाले छात्रों के लिए संरचित मेंटरशिप की ज़रूरत इस तरह के एक कार्यक्रम से कहीं अधिक है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'लफ्ज, सुर और सफर' कार्यक्रम क्या है?
यह पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ द्वारा 26 जुलाई को आयोजित एक विशेष बातचीत कार्यक्रम है, जिसमें गीतकार इरशाद कामिल और सूफी गायक-कवि सतिंदर सरताज अपने रचनात्मक सफर और जीवन के अनुभव छात्रों के साथ साझा करेंगे। यह आयोजन PUAA और CCF के संयुक्त सहयोग से पंजाब यूनिवर्सिटी कन्वेंशन सेंटर में होगा।
इस कार्यक्रम में कैसे शामिल हो सकते हैं?
कार्यक्रम में प्रवेश निशुल्क है, लेकिन पंजीकरण अनिवार्य है। सीटें सीमित होने के कारण जल्द पंजीकरण कराने की सलाह दी गई है। प्रवेश के लिए सभी प्रतिभागियों को वैध पहचान पत्र साथ लाना होगा।
इरशाद कामिल और सतिंदर सरताज का पंजाब यूनिवर्सिटी से क्या संबंध है?
दोनों कलाकार पंजाब यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र हैं। इरशाद कामिल ने विश्वविद्यालय का एंथम 'शान-ओ-शौकत' भी लिखा है, जो इस संस्था से उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।
इरशाद कामिल की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या हैं?
इरशाद कामिल को सर्वश्रेष्ठ गीतकार के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने 'कुन फाया कुन', 'नादान परिंदे', 'अगर तुम साथ हो', 'बेखयाली' और 'शायद' जैसे चर्चित गीत लिखे हैं।
सतिंदर सरताज किस लिए जाने जाते हैं?
सतिंदर सरताज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध सूफी गायक, कवि और गीतकार हैं। 'साईं', 'उड़ारियां', 'इबादत' और 'रुतबा' जैसी रचनाओं के ज़रिए उन्होंने पंजाबी कविता और सूफी संगीत को वैश्विक दर्शकों तक पहुँचाया है।
राष्ट्र प्रेस
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