26 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या एक दिन की चूक से 18 वर्षों के लिए बंद हो सकता है जगन्नाथ पुरी मंदिर?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या एक दिन की चूक से 18 वर्षों के लिए बंद हो सकता है जगन्नाथ पुरी मंदिर?

सारांश

पुरी के जगन्नाथ मंदिर की कुछ अनोखी परंपराएं हैं जिनका पालन न करने पर यह 18 वर्षों के लिए बंद हो सकता है। जानिए इन परंपराओं के बारे में और कैसे वे मंदिर की आस्था और दिव्यता को बनाए रखते हैं।

मुख्य बातें

जगन्नाथ मंदिर की परंपराओं का पालन आवश्यक है।
आकाशीय अग्नि का महत्व समझें।
पटकासी सेवा की रोचकता।
भोग पकाने की विशेष प्रक्रिया जानें।
मंदिर का अनुशासन और आस्था का महत्व।

पुरी, 2 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर केवल आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि इसके रहस्यों और परंपराओं के लिए भी यह प्रसिद्ध है। यह मंदिर अपनी चमत्कारों, भव्य रथ यात्रा और अनगिनत कहानियों के लिए जाना जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि इस मंदिर की 2 ऐसी परंपराएं हैं, जिनका पालन यदि गलती से भी नहीं किया जाए तो यह मंदिर 18 वर्षों के लिए बंद हो सकता है?

जगन्नाथ पुरी मंदिर की सबसे पवित्र परंपराओं में से एक है ‘नीति चक्र के अनुसार महाप्रसाद की नित्य अग्नि जलाना’। इसे ‘आकाशीय अग्नि’ भी कहा जाता है, जो प्रतिदिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के लिए भोग पकाती है। यह अग्नि सदियों से कभी नहीं बुझी और इसे देव अग्नि का स्वरूप माना जाता है।

मंदिर की रसोई में सात मिट्टी के बर्तनों में भोग पकता है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इसमें सबसे नीचे बर्तन में रखा भोग सबसे लेट और सबसे ऊपर रखा हुआ भोग सबसे पहले पकता है।

मान्यता है कि यदि यह अग्नि किसी कारणवश बुझ जाए तो मंदिर को अपवित्र मानते हुए 18 साल तक भक्तों के लिए बंद करना पड़ता है। इस दौरान मंत्रोच्चार, अनुष्ठान और विशेष यज्ञों के जरिए मंदिर को पुनः शुद्ध किया जाता है।

इसके अलावा, पटकासी सेवा भी जगन्नाथ मंदिर की अहम परंपरा है। मंदिर की चोटी पर लगा पतित पावन झंडा प्रतिदिन पुजारियों द्वारा बदला जाता है। यह झंडा हवा की दिशा के विपरीत लहराता है, जिसे श्रद्धालु भगवान का चमत्कारी संकेत मानते हैं। 215 फीट ऊंचाई पर बिना किसी सुरक्षा के पुजारियों द्वारा झंडा बदलने की यह अनोखी परंपरा सदियों से निभाई जा रही है।

इन दो परंपराओं की अखंडता बनाए रखना मंदिर की शुद्धता और जीवंतता के लिए अनिवार्य है। इसे बारिश या तूफान में भी निभाया जाता है। इनकी निरंतरता ही मंदिर की दिव्यता और श्रद्धालुओं की आस्था को बनाए रखती है। यही कारण है कि पुरी का जगन्नाथ मंदिर न केवल भव्यता और आस्था का केंद्र है, बल्कि अपने अनुशासन और रहस्यमयी परंपराओं के लिए भी अद्वितीय है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय संस्कृति की गहराई और विविधता को भी दर्शाती हैं। यह आवश्यक है कि हम इन परंपराओं का पालन करें ताकि मंदिर की शुद्धता और श्रद्धालुओं की आस्था बनी रहे।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जगन्नाथ पुरी मंदिर क्यों बंद हो सकता है?
यदि मंदिर की दो प्रमुख परंपराओं का पालन नहीं किया जाता है, तो इसे 18 वर्षों के लिए बंद किया जा सकता है।
जगन्नाथ मंदिर की पवित्र अग्नि क्या है?
मंदिर की पवित्र अग्नि को 'आकाशीय अग्नि' कहा जाता है, जो भगवान जगन्नाथ के लिए भोग पकाती है।
पतित पावन झंडा कब बदला जाता है?
यह झंडा प्रतिदिन पुजारियों द्वारा बदला जाता है, और यह हवा की दिशा के विपरीत लहराता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 8 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले