जयशंकर और पेनी वोंग ने पश्चिम एशिया के तनाव पर की चर्चा
सारांश
Key Takeaways
- जयशंकर और पेनी वोंग के बीच बातचीत का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को समझना है।
- अमेरिका और ईरान के बीच कोई ठोस समझौता नहीं हुआ है।
- होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है।
- भारत इस क्षेत्र में स्थिरता के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
- अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रुख आवश्यक है।
नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग से फोन पर बातचीत की और पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव पर चर्चा की। यह बातचीत उस समय हुई, जब इस क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति बहुत ही तनावपूर्ण है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कोई ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।
बातचीत के बाद, जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, “आज ऑस्ट्रेलिया की सीनेटर पेनी वोंग के साथ पश्चिम एशिया के हालात पर उत्कृष्ट बातचीत हुई, उनके साथ विचारों का आदान-प्रदान सराहनीय रहा।”
आठ अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनी थी। यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमले किए थे, जिसमें ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और कई शीर्ष सैन्य अधिकारी मारे गए थे। इसके जवाब में, ईरान ने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
पिछले कुछ हफ्तों में, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कई देशों के विदेश मंत्रियों से बातचीत की है। भारत इस क्षेत्र के देशों और अपने महत्वपूर्ण साझेदारों के साथ लगातार संपर्क में बना हुआ है।
इससे पहले, एस. जयशंकर ने इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार से भी फोन पर बात की थी। दोनों के बीच पश्चिम एशिया के हालात और होर्मुज स्ट्रेट पर चर्चा हुई थी।
इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा कि उन्होंने जयशंकर से कहा कि अमेरिका का सख्त रुख बहुत आवश्यक है, ताकि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
उन्होंने आगे कहा, “हमने ईरान, होर्मुज स्ट्रेट और लेबनान पर चर्चा की। इजरायल के विदेश मंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए अमेरिका का सख्त रुख (ईरान में कोई संवर्धन नहीं, संवर्धित सामग्री को ईरान से हटाना) अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।’”
इसके अलावा, उन्होंने कहा, “होर्मुज स्ट्रेट में ईरान द्वारा नौवहन की स्वतंत्रता और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आर्थिक आतंकवाद के जरिए नुकसान पहुंचाना ऐसे कदमों की मांग करता है, जो सभी देशों (जिसमें भारत और हमारे खाड़ी के मित्र भी शामिल हैं) के लिए नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करें।”
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है और इसके जरिए वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है।