सूरत के किसान कमलेश पटेल ने 'धनजीवामृत' का औद्योगिक उत्पादन शुरू किया, रोज़ाना 1,000 बैग तैयार

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सूरत के किसान कमलेश पटेल ने 'धनजीवामृत' का औद्योगिक उत्पादन शुरू किया, रोज़ाना 1,000 बैग तैयार

सारांश

44 डिग्री की तपती गर्मी में सूरत के किसान कमलेश पटेल का खेत एक छोटी फैक्ट्री में बदल चुका है — जहाँ रोज़ाना 40,000 किलो 'धनजीवामृत' तैयार होता है। यह सिर्फ एक किसान की कहानी नहीं, बल्कि रासायनिक खाद के आयात को चुनौती देने का एक ज़मीनी प्रयोग है।

Key Takeaways

  • कमलेश पटेल (अंभेटी, पलसाणा, सूरत) ने 'धनजीवामृत' का औद्योगिक स्तर पर उत्पादन शुरू किया है।
  • वर्तमान में प्रतिदिन 40,000 किलो धनजीवामृत और 1,000 लीटर जीवामृत का उत्पादन; इस वर्ष 1 लाख थैलियाँ बेचने का लक्ष्य।
  • धनजीवामृत ₹6 प्रति किलो और जीवामृत ₹5 प्रति लीटर की दर से उपलब्ध।
  • गुजरात में 8 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं।
  • गुजरात सरकार ने BRC सब्सिडी और आर्थिक सहायता प्रदान की है।
  • 1 मई 2026 को सूरत में वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (VGRC) में कमलेश पटेल रासायनिक खाद के विकल्प पर चर्चा में भाग लेंगे।

सूरत जिले की पलसाणा तहसील के अंभेटी गांव के किसान कमलेश पटेल ने जैविक खाद 'धनजीवामृत' का औद्योगिक स्तर पर उत्पादन शुरू कर दिया है। 29 अप्रैल 2026 को जब पूरे गुजरात में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चल रहा था, तब मांगरोलिया गांव स्थित उनके खेत में 20 से अधिक मज़दूर खरीफ सीज़न से पहले प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए यह जैविक खाद तैयार करने में जुटे थे। रासायनिक खाद के आयात को कम करने और उसका सशक्त विकल्प लाखों किसानों तक पहुँचाने के संकल्प के साथ कमलेश पटेल यह मिशन चला रहे हैं।

धनजीवामृत क्या है और इसकी ज़रूरत क्यों

जीवामृत और धनजीवामृत प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले जैविक उर्वरक हैं, जो रासायनिक खाद के विकल्प के रूप में काम करते हैं। ये खाद मिट्टी में सूक्ष्म जीवों की वृद्धि करते हैं, भूमि के पोषक तत्वों को बढ़ाते हैं और फसल उत्पादन में सुधार लाते हैं। गुजरात में प्राकृतिक खेती का दायरा बढ़ने के साथ इनकी माँग भी तेज़ी से बढ़ रही है।

कमलेश पटेल की यात्रा और उत्पादन क्षमता

वर्ष 2016 में कमलेश पटेल ने कृषि विशेषज्ञ सुभाष पालेकर द्वारा आयोजित तीन दिवसीय 'ज़ीरो बजट प्राकृतिक खेती' सेमिनार में भाग लिया और उसी क्षण रासायनिक खाद त्यागकर प्राकृतिक खेती अपना ली। 2017 में उन्हें गन्ने की खेती में उल्लेखनीय परिणाम मिले — प्रति बीघा उत्पादन 45 टन तक पहुँचा। यह सफलता देखकर गाँव के अन्य किसानों ने भी इस पद्धति को अपनाने की इच्छा ज़ाहिर की, लेकिन वे स्वयं जीवामृत व धनजीवामृत बनाने की प्रक्रिया में नहीं पड़ना चाहते थे। इसी प्रेरणा से कमलेश पटेल ने इन उर्वरकों का बड़े पैमाने पर उत्पादन आरंभ किया।

वर्तमान में कमलेश पटेल प्रतिदिन औसतन 40,000 किलो धनजीवामृत और 1,000 लीटर जीवामृत तैयार करते हैं। धनजीवामृत ₹6 प्रति किलो और जीवामृत ₹5 प्रति लीटर की दर से बेचा जाता है। पिछले वर्ष उन्होंने 50,000 थैलियाँ (प्रत्येक 40 किलो) बेचीं और इस वर्ष एक लाख थैलियाँ तैयार करने का लक्ष्य रखा है। चालू वर्ष में दैनिक उत्पादन 2,000 बैग तक ले जाने की भी योजना है।

सरकारी सहयोग और प्रशिक्षण की भूमिका

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में राज्य में प्राकृतिक खेती का विस्तार हो रहा है। राज्यपाल आचार्य देवव्रत गाँव-गाँव जाकर किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित कर रहे हैं। राज्य सरकार के कृषि विभाग ने कमलेश पटेल को बायो रिसोर्स सेंटर (BRC) के लिए सब्सिडी दी है और धनजीवामृत उत्पादन में भी आर्थिक सहायता प्रदान की है। कमलेश पटेल कृषि विभाग द्वारा प्रमाणित मास्टर ट्रेनर भी हैं और अनेक किसानों को प्राकृतिक खेती की प्रेरणा देते हैं।

वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस में सहभागिता

1 मई 2026 को सूरत में आयोजित होने वाली वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (VGRC) के पहले दिन 'रासायनिक खाद में आत्मनिर्भरता — आयात के विकल्प की रणनीतियाँ' विषय पर चर्चा होगी, जिसमें कमलेश पटेल भी सहभागी होंगे। यह मंच उनके अनुभव को राष्ट्रीय नीति-निर्माण से जोड़ने का अवसर है।

गुजरात में प्राकृतिक खेती की स्थिति

आँकड़ों के अनुसार, राज्य में अब तक 8 लाख से अधिक किसान रासायनिक खाद को त्यागकर प्राकृतिक खेती की ओर मुड़ चुके हैं और साढ़े पाँच हेक्टेयर से अधिक भूमि पर प्राकृतिक खेती हो रही है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब भारत रासायनिक उर्वरकों के आयात पर भारी निर्भरता का सामना कर रहा है। कमलेश पटेल जैसे किसान-उद्यमी इस परिदृश्य को बदलने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

Point of View

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या धनजीवामृत जैसे स्थानीय समाधान आपूर्ति शृंखला के स्तर पर टिकाऊ और किफ़ायती बने रह सकते हैं। सरकारी सब्सिडी पर टिकी इस व्यवस्था की दीर्घकालिक स्वायत्तता अभी साबित होनी बाकी है। फिर भी, एक किसान का यह उद्यमशील प्रयोग नीति-निर्माताओं को यह दिशा ज़रूर दिखाता है कि आत्मनिर्भर कृषि की शुरुआत खेत से ही होती है।
NationPress
29/04/2026

Frequently Asked Questions

धनजीवामृत क्या है और यह रासायनिक खाद से कैसे अलग है?
धनजीवामृत एक जैविक उर्वरक है जो मिट्टी में सूक्ष्म जीवों की वृद्धि करता है और पोषक तत्वों को बढ़ाता है। यह रासायनिक खाद का प्राकृतिक विकल्प है जो भूमि की उर्वरता को दीर्घकालिक रूप से सुधारता है, जबकि रासायनिक खाद मिट्टी को धीरे-धीरे नुकसान पहुँचाती है।
कमलेश पटेल कितना धनजीवामृत बनाते हैं और कहाँ बेचते हैं?
कमलेश पटेल प्रतिदिन औसतन 40,000 किलो धनजीवामृत और 1,000 लीटर जीवामृत तैयार करते हैं। इसे गुजरात के साथ-साथ राज्य के बाहर भी बेचा जाता है — धनजीवामृत ₹6 प्रति किलो और जीवामृत ₹5 प्रति लीटर की दर से।
गुजरात में प्राकृतिक खेती कितनी बड़ी हो चुकी है?
आँकड़ों के अनुसार गुजरात में 8 लाख से अधिक किसान रासायनिक खाद छोड़कर प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं और साढ़े पाँच हेक्टेयर से अधिक भूमि पर प्राकृतिक खेती हो रही है। राज्यपाल आचार्य देवव्रत और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में यह अभियान तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस में कमलेश पटेल की क्या भूमिका होगी?
1 मई 2026 को सूरत में आयोजित VGRC के पहले दिन 'रासायनिक खाद में आत्मनिर्भरता — आयात के विकल्प की रणनीतियाँ' विषय पर होने वाली चर्चा में कमलेश पटेल सहभागी होंगे। वे अपने व्यावहारिक अनुभव के आधार पर जैविक खाद उत्पादन के मॉडल को साझा करेंगे।
कमलेश पटेल को प्राकृतिक खेती की प्रेरणा कहाँ से मिली?
2016 में कमलेश पटेल ने कृषि विशेषज्ञ सुभाष पालेकर के 'ज़ीरो बजट प्राकृतिक खेती' सेमिनार में भाग लिया और तभी रासायनिक खाद त्यागने का फैसला किया। 2017 में गन्ने की खेती में प्रति बीघा 45 टन उत्पादन की सफलता ने उनके संकल्प को और मज़बूत किया।
Nation Press