क्या जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी में 'वतन को जानो' कार्यक्रम से युवाओं की भूमिका बदल जाएगी?
सारांश
Key Takeaways
- युवाओं को राष्ट्र-निर्माण में शामिल करना।
- सांस्कृतिक विविधता की समझ बढ़ाना।
- शैक्षणिक और करियर विकल्पों की जानकारी।
- एकता की भावना को प्रोत्साहित करना।
- जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए एक नई दिशा।
नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी के द्वारा आयोजित छठा कश्मीरी युवा आदान–प्रदान कार्यक्रम 'वतन को जानो' का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के युवाओं को देश के अन्य भागों की सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था से परिचित कराना है।
छह दिवसीय इस कार्यक्रम में थीमैटिक और इंटरएक्टिव सत्र, शैक्षणिक संस्थानों का भ्रमण, लोकतांत्रिक और राष्ट्रीय महत्व के स्थलों की यात्रा, तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में जम्मू और कश्मीर के अनंतनाग, कुपवाड़ा, बारामूला, बडगाम, श्रीनगर और पुलवामा जिलों से चयनित 132 युवा प्रतिभागी शामिल हैं। इसे 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जिला युवा अधिकारी (माई भारत उत्तर पूर्व) दिवाकर भाटी ने बताया कि यह कार्यक्रम देशभर के 15 स्थानों पर आयोजित किया जा रहा है। जम्मू और कश्मीर के विभिन्न जिलों से चुने गए युवा प्रतिभागियों का मुख्य उद्देश्य राष्ट्र-निर्माण से जोड़ना है। 18 से 25 वर्ष के युवाओं के लिए यह पहली बार होगा कि वे अन्य क्षेत्रों की संस्कृति को प्रत्यक्ष देख और समझ सकेंगे।
प्रोफेसर असगर अली ने कहा कि इस कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य युवाओं में एकता की भावना विकसित करना है। इसके माध्यम से उन्हें उनके भविष्य के लिए बेहतर करियर विकल्पों की जानकारी दी जाएगी। पहले दो दिनों में प्रतिभागियों की काउंसलिंग की जाएगी। 'वतन को जानो' थीम का चयन इसलिए किया गया है कि हम सभी भारतीय हैं और एकता के भाव को महसूस कर सकें।