क्या शंख भस्म कैल्शियम से भरपूर है और हड्डियों तथा जोड़ों को नया जीवन देती है?
सारांश
Key Takeaways
नई दिल्ली, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आयुर्वेद में उपचार के लिए दुर्लभ जड़ी-बूटियों का उपयोग सदियों से होता आ रहा है। ये जड़ी-बूटियाँ बड़े से बड़े रोगों से मुक्ति दिलाने की क्षमता रखती हैं। क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेद में भस्म के माध्यम से भी रोगों का उपचार किया जाता है?
हम यहाँ शंख भस्म की चर्चा कर रहे हैं, जिसे आयुर्वेद में चमत्कारी भस्म कहा जाता है।
शंख भस्म एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसका उपयोग एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याओं के उपचार में किया जाता है। इसमें अम्लरोधी गुण होते हैं जो सीने में जलन और दर्द से राहत प्रदान करते हैं। रसशास्त्र में शंख को शुद्ध वर्ग के अंतर्गत एक खनिज के रूप में वर्णित किया गया है और यह आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा दैनिक अभ्यास में उपयोग की जाने वाली महत्वपूर्ण भस्मों में से एक है।
शंख भस्म का प्रयोग पेट से जुड़ी समस्याओं से लेकर हड्डियों और जोड़ों के विकारों के उपचार में किया जाता है। ध्यान दें कि बिना चिकित्सक की सलाह के इसका उपयोग न करें, क्योंकि इसे सीधे नहीं बल्कि किसी अन्य चीज में मिलाकर सेवन किया जाता है। इसका स्वाद तीखा होता है और रोग के अनुसार सेवन की मात्रा निर्धारित की जाती है।
यदि आपकी पाचन अग्नि कमजोर है, पेट में दर्द होता है, गैस के कारण उल्टी होती है या सिर में दर्द होता है, तो शंख भस्म का सेवन किया जा सकता है। शंख भस्म पाचन अग्नि को पुनर्स्थापित करती है, जिससे भोजन का पाचन बेहतर होता है।
शंख भस्म मुख्यतः कैल्शियम कार्बोनेट का स्रोत होती है। यह हड्डियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने, ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने और दांतों की मजबूती में सहायक है। यदि शरीर में कैल्शियम की कमी है, तो भी इसका सेवन किया जा सकता है, लेकिन गर्भवती महिलाओं को चिकित्सक से सलाह लेना आवश्यक है।
शंख भस्म शरीर में वात और कफ दोषों को संतुलित करने में भी मदद करती है। यदि ये दोष असंतुलित होते हैं, तो कई बीमारियों का जन्म होता है। इससे पेट से लेकर त्वचा तक की समस्याएँ हो सकती हैं। इसके अलावा, चेहरे के मुहांसों और दाग धब्बों से छुटकारा पाने के लिए भी इसका लेपन और सेवन किया जा सकता है।