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क्या एआर रहमान का 'कम्युनल' बयान संगीत को प्रभावित करता है? सिंगर शान का मत

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क्या एआर रहमान का 'कम्युनल' बयान संगीत को प्रभावित करता है? सिंगर शान का मत

सारांश

ए. आर. रहमान के 'कम्युनल' बयान पर सिंगर शान ने अपनी राय रखी है। जानिए क्या है इस विवाद का सच और संगीत में सांप्रदायिकता का क्या स्थान है।

मुख्य बातें

संगीत में कोई सांप्रदायिक पहलू नहीं होता।
काम न मिलने का अनुभव हर कलाकार का होता है।
रहमान एक बेहतरीन संगीतकार हैं, जिनकी प्रशंसा बढ़ रही है।
संगीत के पीछे एक सोच होती है।
संगीत सभी को जोड़ता है।

मुंबई, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बॉलीवुड के प्रमुख संगीतकारों में से एक ए. आर. रहमान अपने 'कम्युनल' बयान के कारण विवादों में हैं। इस मुद्दे पर राजनीति से लेकर हिंदी सिनेमा के कई बड़े गायक और साधु-संत अपनी राय व्यक्त कर चुके हैं।

अब हिंदी सिनेमा के तीन मशहूर गायक- शान, शंकर महादेवन और अनूप जलोटा ने भी अपनी बात रखी है। गायक शान ने कहा कि उन्हें भी कई वर्षों तक काम नहीं मिला, लेकिन उन्होंने इसे कभी व्यक्तिगत रूप से नहीं लिया।

ए. आर. रहमान के बयान पर शान ने कहा, “हर किसी की अपनी राय होती है, और यह हमेशा विभाजित रहेगी। यह कोई नियम नहीं है कि सबकी राय एक समान हो। लेकिन हमें इसे अत्यधिक महत्व नहीं देना चाहिए, क्योंकि हर गाने के पीछे एक सोच होती है। संगीतकार या निर्माता अपने विचारों के आधार पर फैसले लेते हैं। कुछ लोग इसे सही समझेंगे, तो कुछ इसे गलत मानेंगे। हमें इसमें क्यों उलझना चाहिए? इसमें उलझने से कोई लाभ नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “काम न मिलने की बात हो, तो मैं यहाँ आपके सामने हूँ। मैंने इतने वर्षों में बहुत कुछ गाया है, फिर भी कभी-कभी मुझे भी काम नहीं मिलता। लेकिन मैं इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं लेता। हर किसी की अपनी सोच और पसंद होती है। हमें कितना काम मिलेगा, यह हमारे हाथ में नहीं है। जो भी काम मिले, उसे अच्छे से करना चाहिए। रहमान की जो भी परियोजनाएँ होती हैं, उनमें उनकी विशेष शैली झलकती है। वे एक अद्भुत संगीतकार हैं, और उनके प्रशंसकों की संख्या कम नहीं हुई है, बल्कि बढ़ रही है।”

शान ने कहा कि अगर ऐसी कोई समस्या होती, तो मुझे नहीं लगता कि संगीत में कोई सांप्रदायिक या अल्पसंख्यक पहलू होता। संगीत इस तरह से काम नहीं करता। अगर ऐसा होता, तो पिछले 30 वर्षों में हमारे तीन सुपरस्टार, जो अल्पसंख्यक समुदाय से हैं, इतनी तरक्की नहीं कर पाते। ऐसा नहीं है।

वहीं गायक अनूप जलोटा ने कहा, “यह बिल्कुल गलत है। उन्होंने 25 वर्षों का काम मात्र 5 वर्षों में कर दिखाया है। इससे अधिक और क्या कहा जा सकता है? उन्होंने बहुत मेहनत की है और कई उत्कृष्ट परियोजनाएँ पूरी की हैं। उनके प्रशंसकों के दिल में उनके लिए बहुत इज्जत है और यह सम्मान हमेशा बरकरार रहेगा।”

भारतीय गायक और संगीतकार शंकर महादेवन ने कहा, “मैं आपकी बात समझता हूँ और मैं कहना चाहूँगा कि गीत का निर्माण करने वाला और गीत को रिलीज़ या प्रचारित करने का निर्णय लेने वाले दो अलग-अलग व्यक्ति होते हैं। अक्सर, ये निर्णय लेने वाले लोग संगीत से जुड़े नहीं होते। जो हम चाहते हैं, वह सामने नहीं आता, क्योंकि कोई और हमारे लिए निर्णय लेता है।”

संपादकीय दृष्टिकोण

ए. आर. रहमान का बयान केवल एक व्यक्तिगत राय है। संगीत एक ऐसी कला है जो सभी को जोड़ती है, और इसमें सांप्रदायिकता का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। हमें इस पर चर्चा करना चाहिए कि कैसे हम संगीत के माध्यम से एकजुट हो सकते हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या ए. आर. रहमान का बयान संगीत में सांप्रदायिकता को दर्शाता है?
नहीं, ए. आर. रहमान का बयान व्यक्तिगत राय है और संगीत में सांप्रदायिकता का कोई स्थान नहीं है।
क्या शान ने अपने करियर में काम न मिलने की बात कही?
हाँ, शान ने कहा कि उन्हें भी कई सालों तक काम नहीं मिला, लेकिन उन्होंने इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं लिया।
राष्ट्र प्रेस
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