क्या जम्मू-कश्मीर में चार दिनों बाद मौसम में सुधार हुआ?

सारांश
Key Takeaways
- जम्मू-कश्मीर में मौसम में सुधार हुआ है।
- केंद्रीय मंत्री ने मौसम की स्थिति पर अपडेट दिया।
- भूस्खलन ने कई लोगों की जान ली।
- राहत कार्य अभी भी जारी है।
- स्कूल-कॉलेज बंद हैं।
श्रीनगर, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण उत्पन्न तबाही के बाद आज सुबह स्थानीय निवासियों के लिए राहत का दिन साबित हुआ। लगभग 5 दिनों के बाद, जम्मू-कश्मीर के कुछ क्षेत्रों में मौसम में सुधार देखा गया। आज धूप निकली, जिससे लोगों ने सुखद अनुभव किया। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि अब जम्मू-कश्मीर का मौसम पहले से बेहतर हो गया है।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "यहां आईएमडी (भारतीय मौसम विज्ञान विभाग) की एक आश्वस्त करने वाली रिपोर्ट है। जम्मू-कश्मीर में खराब मौसम की स्थिति में आज सुधार हुआ है। अगले दो दिनों के लिए रेड अलर्ट की जगह अब येलो अलर्ट जारी किया गया है।"
उन्होंने आगे बताया, "अगले दो दिनों में जम्मू, उधमपुर और डोडा के क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा (24 घंटों में 7 से 11 सेमी) होने की संभावना है। 29 अगस्त को जम्मू-कश्मीर में मौसम की स्थिति में और सुधार होगा।"
पिछले तीन दिनों में भारी बारिश के कारण जम्मू संभाग में सबसे अधिक नुकसान हुआ है। कटरा में श्री माता वैष्णो देवी मंदिर मार्ग पर बारिश के दौरान भूस्खलन के परिणामस्वरूप 34 लोगों की मृत्यु हुई और करीब 15 लोग घायल हुए।
जम्मू क्षेत्र में स्कूल-कॉलेज अभी भी बंद हैं। डोडा जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-244, जो किश्तवाड़ से डोडा को जोड़ता है, अभी भी यातायात के लिए बंद है। कश्मीर के अनंतनाग, कुलगाम, पुलवामा, शोपियां, बडगाम और श्रीनगर जिलों में शैक्षणिक संस्थानों को एहतियात के तौर पर बुधवार को बंद रखा गया। इसके अलावा, कश्मीर विश्वविद्यालय ने भी आज होने वाली सभी परीक्षाओं को स्थगित किया।
इसके अतिरिक्त, पिछले दिनों में भारी बारिश के कारण पूरे केंद्र शासित प्रदेश में बाढ़ जैसी स्थिति बनी। झेलम और अन्य नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया। हालांकि, चार दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश के बाद क्षेत्र के बड़े हिस्से जलमग्न होने पर निचले इलाकों से हजारों लोगों को रेस्क्यू किया गया। कई टीमें अब भी राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।