शिव खोड़ी श्राइन बोर्ड बैठक: डिविजनल कमिश्नर रमेश कुमार ने रानसू में की अध्यक्षता, CCTV और टेंडर के निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू के डिविजनल कमिश्नर रमेश कुमार ने 14 जून 2026 को रानसू में श्री शिव खोड़ी श्राइन बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें पवित्र तीर्थस्थल पर बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने और श्रद्धालुओं की सुविधाओं में विस्तार के लिए ठोस निर्देश दिए गए। बैठक में श्राइन बोर्ड के समग्र कामकाज की समीक्षा की गई और कई विकास कार्यों को मौके पर ही स्वीकृति प्रदान की गई।
मुख्य निर्देश और निर्णय
डिविजनल कमिश्नर रमेश कुमार ने बैठक में स्पष्ट किया कि तीर्थस्थल पर बुनियादी ढाँचे के उन्नयन और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार हेतु निरंतर प्रयास जारी हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि तीर्थस्थल के निकट और तीर्थयात्रा मार्ग पर दुकानों के लिए शीघ्रातिशीघ्र टेंडर जारी किए जाएँ।
इसके साथ ही, श्राइन परिसर के प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने पर विशेष बल दिया गया, ताकि सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता किया जा सके।
हेलीपैड और अग्नि सुरक्षा पर विशेष ध्यान
बैठक के दौरान डिविजनल कमिश्नर ने हेलीपैड के आसपास की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया, विशेष रूप से अग्नि सुरक्षा बुनियादी ढाँचे की स्थापना पर ध्यान केंद्रित किया गया। संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया कि सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय समयबद्ध रूप से लागू किए जाएँ।
अमरनाथ यात्रा 2026 की तैयारियाँ
गौरतलब है कि हाल ही में डिविजनल कमिश्नर रमेश कुमार ने रामबन जिले का दौरा कर आगामी श्री अमरनाथ यात्रा-2026 की तैयारियों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नशरी से बनिहाल तक नेशनल हाईवे-44 को फोरलेन बनाने की परियोजना की प्रगति का भी आकलन किया।
मानसून और बाढ़ तैयारी की समीक्षा
इससे पहले डिविजनल कमिश्नर ने जम्मू संभाग में बाढ़ तैयारी और मानसून प्रबंधन की भी विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने डिप्टी कमिश्नरों को निर्देश दिया कि जिला स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएँ और नदियों एवं जल निकायों में जल स्तर की निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जाए।
पहाड़ी जिलों में भूस्खलन और बाढ़-संभावित क्षेत्रों की पहचान कर पूर्व-निवारक उपाय करने के निर्देश दिए गए। साथ ही, सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स को प्रशिक्षण देने और स्थानीय निवासियों की सहभागिता से मॉक ड्रिल आयोजित करने पर भी बल दिया गया।
यह सभी कदम ऐसे समय में उठाए जा रहे हैं जब जम्मू-कश्मीर में मानसून सत्र निकट है और तीर्थयात्रा का मौसम भी अपने चरम पर है — ऐसे में प्रशासनिक तत्परता और अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाती है।