13 अक्टूबर 2026
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जंतर मंतर में जबरन अतिक्रमण पर एफआईआर दर्ज, दिल्ली पुलिस ने डी-नोटिफाई किया धरना स्थल

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जंतर मंतर में जबरन अतिक्रमण पर एफआईआर दर्ज, दिल्ली पुलिस ने डी-नोटिफाई किया धरना स्थल

सारांश

जंतर मंतर को आधिकारिक धरना स्थल से डी-नोटिफाई कर दिया गया है और वहाँ जबरन घुसने पर एफआईआर भी दर्ज हुई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर रामलीला, बुराड़ी और सीबीडी ग्राउंड को नए विरोध स्थल के रूप में चिह्नित किया गया — दशकों पुराने एक प्रतीकात्मक विरोध-केंद्र का अंत।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर 2026 को जंतर मंतर परिसर में जबरन प्रवेश के मामले में अतिक्रमण की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की।
जंतर मंतर को आधिकारिक रूप से निर्धारित धरना स्थल से डी-नोटिफाई किया गया; सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में यह कदम उठाया गया।
तीन नए वैकल्पिक विरोध स्थल — रामलीला ग्राउंड , बुराड़ी ग्राउंड और सीबीडी ग्राउंड (पूर्वी दिल्ली) — चिह्नित किए गए।
IYC अध्यक्ष उदय भानु चिब की याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ से तीन प्रार्थनाओं पर नोटिस जारी किया।
याचिका CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति न देने को चुनौती से संबंधित थी।

दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर 2026 को जंतर मंतर परिसर में अनधिकृत रूप से जबरन प्रवेश करने के मामले में अतिक्रमण की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। सूत्रों के अनुसार, यह मामला हाउस के माध्यम से अनधिकृत प्रवेश को लेकर दर्ज किया गया है, जो हाल के कानूनी और प्रशासनिक घटनाक्रमों के बीच सामने आया है।

जंतर मंतर की डी-नोटिफिकेशन

इसी दिन दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत को सूचित किया कि जंतर मंतर को आधिकारिक तौर पर निर्धारित धरना स्थल के रूप में डी-नोटिफाई कर दिया गया है। पुलिस की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने न्यायमूर्ति अमित महाजन की एकल पीठ को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के पिछले सप्ताह के आदेश के अनुपालन में यह निर्णय लिया गया।

एएसजी शर्मा ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उपयुक्त स्थलों की पहचान कर उन्हें निर्धारित किया जाना चाहिए और हमने ठीक वैसा ही किया है।'

तीन नए वैकल्पिक प्रदर्शन स्थल

दिल्ली पुलिस ने राजधानी में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए तीन वैकल्पिक स्थलों की पहचान की है — रामलीला ग्राउंड, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली स्थित सीबीडी ग्राउंड। अधिकारियों के अनुसार, ये स्थल शीर्ष न्यायालय के निर्देशानुसार बुनियादी सुविधाओं और ढाँचे से लैस होंगे।

गौरतलब है कि जंतर मंतर दशकों से देश के सबसे प्रमुख विरोध-स्थलों में से एक रहा है, और इसकी डी-नोटिफिकेशन राजनीतिक दलों एवं नागरिक समाज के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव है।

याचिका का पृष्ठभूमि और कानूनी विवाद

यह सुनवाई भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के अध्यक्ष उदय भानु चिब की उस याचिका पर हुई, जिसमें उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से दिल्ली पुलिस के इनकार को चुनौती दी थी। एएसजी शर्मा ने तर्क दिया कि जंतर मंतर के डी-नोटिफाई होने से याचिका स्वयं निष्फल हो गई है।

हालाँकि, याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी कि याचिका में उठाई गई अन्य प्रार्थनाएँ अभी भी विचारणीय हैं। दिल्ली पुलिस के वकील ने नोटिस जारी करने का विरोध किया, किंतु न्यायमूर्ति महाजन ने याचिका में उठाई गई तीन प्रार्थनाओं पर नोटिस जारी किया।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश और व्यापक संदर्भ

यह पूरा घटनाक्रम सुप्रीम कोर्ट द्वारा कुछ दिन पहले दिए गए उस आदेश के बाद सामने आया है, जिसमें सक्षम अधिकारियों से राजधानी में शांतिपूर्ण और वैध विरोध प्रदर्शन के लिए बुनियादी सुविधाओं से लैस उपयुक्त वैकल्पिक स्थलों की पहचान करने को कहा गया था। यह ऐसे समय में आया है जब प्रदर्शनकारियों के अधिकार और प्रशासनिक नियंत्रण के बीच संतुलन पर राष्ट्रीय बहस तेज़ हो रही है।

जंतर मंतर की डी-नोटिफिकेशन के साथ-साथ अतिक्रमण की एफआईआर का दर्ज होना इस विवाद को कानूनी और प्रशासनिक — दोनों स्तरों पर और जटिल बनाता है। आने वाले दिनों में उच्च न्यायालय की आगामी सुनवाई में स्पष्ट होगा कि शेष प्रार्थनाओं पर अदालत क्या रुख अपनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बुराड़ी और सीबीडी ग्राउंड जंतर मंतर की उस प्रतीकात्मक शक्ति के बराबर नहीं हैं, जो सदन की छाया में होने से मिलती थी। IYC की याचिका पर नोटिस जारी होना बताता है कि अदालत इस मामले को केवल निष्फल नहीं मानती। असली सवाल यह है कि क्या नए 'निर्धारित स्थल' वास्तव में नागरिकों के विरोध-अधिकार को सुविधाजनक बनाते हैं, या उसे दृश्यता से दूर कर देते हैं।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंतर मंतर परिसर में एफआईआर क्यों दर्ज की गई?
दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर 2026 को जंतर मंतर परिसर में हाउस के माध्यम से अनधिकृत रूप से जबरन प्रवेश करने के मामले में अतिक्रमण की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की। सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है।
जंतर मंतर को धरना स्थल से डी-नोटिफाई क्यों किया गया?
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह आदेश दिया था कि राजधानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थल चिह्नित किए जाएँ। उसी आदेश के अनुपालन में दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर को डी-नोटिफाई किया और तीन नए स्थान निर्धारित किए।
दिल्ली में अब विरोध प्रदर्शन के लिए कौन-से नए स्थल हैं?
दिल्ली पुलिस ने रामलीला ग्राउंड, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली स्थित सीबीडी ग्राउंड को नए निर्धारित विरोध स्थलों के रूप में चिह्नित किया है। ये स्थल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार बुनियादी सुविधाओं से लैस होंगे।
IYC अध्यक्ष उदय भानु चिब की याचिका किस बारे में थी?
भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के अध्यक्ष उदय भानु चिब ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से दिल्ली पुलिस के इनकार को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने याचिका में उठाई गई तीन प्रार्थनाओं पर नोटिस जारी किया।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में क्या आदेश दिया?
न्यायमूर्ति अमित महाजन की एकल पीठ ने दिल्ली पुलिस के नोटिस जारी करने के विरोध के बावजूद याचिका में उठाई गई तीन प्रार्थनाओं पर नोटिस जारी किया। इसका अर्थ है कि अदालत ने याचिका को पूरी तरह निष्फल नहीं माना।
राष्ट्र प्रेस
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