जेसीडी प्रभाकर तमिलनाडु विधानसभा के नए अध्यक्ष, ओम बिरला ने एक्स पर दी बधाई
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु विधानसभा को 12 मई 2026 को नया अध्यक्ष मिला, जब टीवीके विधायक जेसीडी प्रभाकर को सदन में सर्वसम्मति से स्पीकर पद पर निर्विरोध चुन लिया गया। इस ऐतिहासिक चुनाव पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर हार्दिक बधाई दी।
मुख्य घटनाक्रम
12 मई को तमिलनाडु विधानसभा में विशेष सत्र बुलाया गया। कार्यवाहक विधानसभा अध्यक्ष एम.वी. करुपैया ने सदन को बताया कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने जेसीडी प्रभाकर के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने निर्विरोध स्वीकार कर लिया। इसके बाद करुपैया ने कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में अपना कार्यकाल समाप्त होने की घोषणा की। इसी सत्र में थोरैयूर निर्वाचन क्षेत्र के विधायक रवि शंकर को भी सर्वसम्मति से उपाध्यक्ष चुना गया।
ओम बिरला की बधाई
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 14 मई को एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'जेसीडी प्रभाकर को तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में सर्वसम्मति से चुने जाने पर हार्दिक बधाई। मुझे आशा है कि आपके कुशल नेतृत्व में सदन लोकतांत्रिक आदर्शों और विधायी परंपराओं को और मजबूत करेगा। आपके सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं।'
मुख्यमंत्री विजय का स्वागत और ऐतिहासिक संदर्भ
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सचिवालय स्थित अध्यक्ष कक्ष में प्रभाकर को स्वर्ण शॉल और फूलों का गुलदस्ता भेंट किया। सदन में बोलते हुए विजय ने लोकतांत्रिक परंपराओं के महत्व पर जोर दिया और इंग्लैंड की राजशाही के उस युग का उल्लेख किया जब अध्यक्ष संसद के निर्णयों को राजा तक पहुँचाने में व्यक्तिगत जोखिम उठाते थे।
विजय ने कहा, 'संसद द्वारा किसी भी प्रस्ताव को अस्वीकार किए जाने पर अध्यक्ष की यह जिम्मेदारी होती थी कि वह राजा को सूचित करे। उन दिनों राजाओं के पास मृत्युदंड देने का भी अधिकार होता था, और संसद का रुख बताने पर अध्यक्षों को कभी-कभी गंभीर दंड का सामना करना पड़ता था।' उन्होंने उस पुरानी प्रथा का भी उल्लेख किया जिसमें नव निर्वाचित अध्यक्ष प्रतीकात्मक रूप से कुर्सी पर बैठने में हिचकिचाते थे और सदन के नेताओं द्वारा उन्हें आसन तक ले जाया जाता था।
आगे क्या
जेसीडी प्रभाकर के नेतृत्व में तमिलनाडु विधानसभा का नया सत्र आरंभ होगा। सर्वसम्मति से हुए इस चुनाव को सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों के बीच सहमति का संकेत माना जा रहा है। रवि शंकर के उपाध्यक्ष बनने के साथ विधानसभा का नया नेतृत्व पूरी तरह स्थापित हो गया है।